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यात्रीगण कृपया ध्यान दें, अनेकों गाड़ियाँ प्रयागराज जंक्शन नही जाएंगी।

18 फरवरी 2025, मंगलवार, फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, षष्टी, विक्रम संवत 2081

महाकुम्भ प्रयागराज में अनेक विशेष गाड़ियाँ चलाई जा रही है मगर इससे नियमित चलनेवाली गाड़ियोंपर बुरा असर पड़ रहा है। गाड़ियोंका रखरखाव एवं परिचालनिक स्टाफ की कमी के चलते अनेक नियमित गाड़ियोंको या तो पूर्णतः रद्द किया गया है या फिर उनका मार्ग परिवर्तन किया जा रहा है। यह बदलाव दिनांक 18 से 28 फरवरी तक रखा जाएगा।

महाकुंभ मेला 2025 के दौरान भुसावल मंडल से गुजरने वाली कुछ ट्रेनों का रद्दीकरण

उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज मंडल में महाकुंभमेला-2025 के चलते भुसावल मण्डल से होकर गुजरने वाली निम्नलिखित यात्री गाड़ियाँ अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेंगी।

1) गाड़ी संख्या 19045 सूरत – छपरा ताप्ती गंगा एक्सप्रेस दिनांक 19 फरवरी 2025 से 27 फरवरी 2025 तक अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।

2) गाड़ी संख्या 19046 छपरा – सूरत ताप्ती गंगा एक्सप्रेस दिनांक 21 फरवरी 2025 को अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।

3) गाड़ी संख्या 19483 अहमदाबाद – बरौनी एक्सप्रेस दिनांक 18 फरवरी 2025 से 26 फरवरी 2025 तक अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।

4) गाड़ी संख्या 19435 अहमदाबाद – आसनसोल एक्सप्रेस दिनांक 20 फरवरी 2025 और 27 फरवरी 2025 को अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।

5) गाड़ी संख्या 01025 दादर – बलिया त्रि-साप्ताहिक एक्सप्रेस विशेष दिनांक 18 फरवरी 2025 से 27 फरवरी 2025 तक अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।

6) गाड़ी संख्या 01026 बलिया – दादर त्रि-साप्ताहिक एक्सप्रेस विशेष दिनांक 21 फरवरी 2025 को अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।

7) गाड़ी संख्या 01027 दादर – गोरखपुर एक्सप्रेस विशेष दिनांक 18 फरवरी 2025 से 27 फरवरी 2025 तक अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।

8) गाड़ी संख्या 01028 गोरखपुर – दादर एक्सप्रेस विशेष दिनांक 20 फरवरी 2025 को अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।

9) गाड़ी संख्या 11055 लोकमान्य तिलक टर्मिनस – गोरखपुर एक्सप्रेस दिनांक 18 फरवरी 2025 से 27 फरवरी 2025 तक अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।

10) गाड़ी संख्या 11056 गोरखपुर – लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस दिनांक 21 फरवरी 2025 को अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।

11) गाड़ी संख्या 11059 लोकमान्य तिलक टर्मिनस – छपरा एक्सप्रेस दिनांक 18 फरवरी 2025 से 27 फरवरी 2025 तक अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।

12) गाड़ी संख्या 11060 छपरा – लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस दिनांक 20 फरवरी 2025 को अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी

महाकुंभ मेला 2025 के दौरान भुसावल मंडल से गुजरने वाली कुछ ट्रेनों का मार्ग परिवर्तन

रेलवे प्रशासन ने महाकुंभ मेला 2025 के मद्देनजर भुसावल मंडल से गुजरने वाली कुछ ट्रेनों का मार्ग परिवर्तन करने का निर्णय लिया है। मार्ग परिवर्तन की जानकारी निम्नानुसार है –

अपनी निर्धारित मार्ग के बजाय प्रयागराज छिवकी से गुजरने वाली ट्रेनें

  1. गाड़ी संख्या 11061 लोकमान्य तिलक टर्मिनस – जयनगर पवन एक्सप्रेस, लोकमान्य तिलक टर्मिनस से प्रस्थान करने वाली दिनांक – 18.02.2025 से 28.02.2025 तक।
  2. गाड़ी संख्या 11062 जयनगर – लोकमान्य तिलक टर्मिनस पवन एक्सप्रेस, जयनगर से प्रस्थान करने वाली दिनांक 18.02.2025 से 27.02.2025 तक।
  3. गाड़ी संख्या 11033 पुणे – दरभंगा एक्सप्रेस, पुणे से प्रस्थान करने वाली – 19.02.2025 और 26.02.2025।
  4. गाड़ी संख्या 11034 दरभंगा – पुणे एक्सप्रेस, दरभंगा से प्रस्थान करने वाली दिनांक 21.02.2025 और 28.02.2025 को

इन गाड़ियों को प्रयागराज जंक्शन की जगह, प्रयागराज छिवकी स्टेशन पर अस्थायी ठहराव प्रदान किया गया है।

अपनी निर्धारित मार्ग के बजाय कानपुर, लखनऊ मार्ग से गुजरने वाली गाड़ियाँ

  1. गाड़ी संख्या 11071 लोकमान्य तिलक टर्मिनस – वाराणसी कामायनी एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025 से 27.02.2025 तक। यह ट्रेन अपने निर्धारित मार्ग के बजाय बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ, जौनपुर होते हुए वाराणसी पहुंचेगी।
  2. गाड़ी संख्या 11072 वाराणसी – लोकमान्य तिलक टर्मिनस कामायनी एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025 से 27.02.2025 तक यह ट्रेन जौनपुर, लखनऊ, कानपुर सेंट्रल, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, बीना होते हुए लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी।
  3. गाड़ी संख्या 22129 लोकमान्य तिलक टर्मिनस – अयोध्या कैंट एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025, 23.02.2025 और 25.02.2025। यह ट्रेन वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ होते हुए अयोध्या कैंट पहुंचेगी।
  4. गाड़ी संख्या 22130 अयोध्या कैंट – लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 19.02.2025, 24.02.2025 और 26.02.2025 को यह ट्रेन लखनऊ, कानपुर सेंट्रल, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी होते हुए लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी।
  5. गाड़ी संख्या 12167 लोकमान्य तिलक टर्मिनस – बनारस एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025 से 27.02.2025 तक। यह ट्रेन इटारसी, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, कानपुर सेंट्रल, उन्नाव होते हुए बनारस पहुंचेगी।
  6. गाड़ी संख्या 12168 बनारस – लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025 से 27.02.2025 तक। यह ट्रेन उन्नाव, कानपुर सेंट्रल, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, बीना, इटारसी होते हुए लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी।
  7. गाड़ी संख्या 22177 मुंबई – वाराणसी एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025 से 27.02.2025 तक। यह ट्रेन इटारसी, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, कानपुर सेंट्रल, उन्नाव होते हुए बनारस पहुंचेगी।
  8. गाड़ी संख्या 22178 वाराणसी – मुंबई एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025 से 27.02.2025 तक यह ट्रेन उन्नाव, कानपुर सेंट्रल, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, बीना, इटारसी होते हुए मुंबई पहुंचेगी।
  9. गाड़ी संख्या 22104 अयोध्या कैंट – लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025 और 25.02.2025 को यह ट्रेन लखनऊ, कानपुर सेंट्रल, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, बीना होते हुए लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी।
  10. गाड़ी संख्या 22103 लोकमान्य तिलक टर्मिनस – अयोध्या कैंट एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 24.02.2025 को यह ट्रेन बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ होते हुए अयोध्या कैंट पहुंचेगी।
  11. गाड़ी संख्या 15017 लोकमान्य तिलक टर्मिनस – गोरखपुर काशी एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025 से 27.02.2025 तक। यह ट्रेन इटारसी, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ, माँ बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़, जंघई होते हुए गोरखपुर पहुंचेगी।
  12. गाड़ी संख्या 15018 गोरखपुर – लोकमान्य तिलक टर्मिनस काशी एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025 से 28.02.2025 तक। यह ट्रेन जंघई, माँ बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़, लखनऊ, कानपुर सेंट्रल, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, बीना, इटारसी होते हुए लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी।

यात्रियों से अनुरोध है कि वे अपनी यात्रा योजना बनाते समय उपरोक्त मार्ग परिवर्तन का ध्यान रखें। अधिक जानकारी के लिए यात्री संबंधित रेलवे हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। असुविधा से बचने के लिए रेलवे द्वारा अधिकृत रेलवे पूछताछ सेवा NTES/139 से गाड़ी की सही स्थिति की जानकारी पता करके तदनुसार यात्रा प्रारम्भ करें।

यह है पूरा परिपत्रक,

आंशिक रद्द की गई गाड़ियाँ

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नई दिल्ली हादसा : हर तरह की अनुशासनहीनता!

16 फरवरी 2025, रविवार, फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, चतुर्थी, विक्रम संवत 2081

कल नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक दर्दनाक हादसा हुवा। रेलवे स्टेशन पर हुई यात्रिओंकी भगदड़ में करीबन 18 मौते और 10 गम्भीर रूप से घायल हुए है। बताया जा रहा है, प्लेटफार्म क्रमांक 14 पर नामित गाड़ी का प्लेटफार्म बदलकर 16 किया गया, ऐसी उद्घोषणा की गई और यात्रिओंकी भगदड़ मच गई। प्लेटफार्म बदलाव के चलते भगदड़ में यात्रिओंकी जान जाने के ऐसे मामले पहले ही भारतीय रेल के इतिहास में दर्ज है, फिर भी इस तरह के हादसे हो रहे है। कितनी दुर्भाग्यपूर्ण बात है!

प्रत्येक दुर्घटना के पीछे कहीं न कही अनुशासनहीनता यह कारण होता है। यहाँपर हर स्तर पर अनुशासनहीनता दिखाई देती है। रेल यात्रिओंमें अनुशासन की कमी होना यह सहज बात है। यह लोग प्रोफेशनल या भीड़ व्यवस्थापन में अनुभवी नही होते है। लेकिन रेल कर्मियोंका क्या, और वह भी देश की राजधानी का शहर, जहाँ भारतीय रेल का मुख्यालय रेल बोर्ड है, मण्डल और क्षेत्रीय कार्यालय है। तमाम आधुनिक सुविधाए है, दल, बल है जिससे हर आपदाओं से निपटने की क्षमता होनी चाहिए?

रेल विभाग ने इस हादसे की जाँच के लिए उच्चस्तरीय समिति की घोषणा कर दी है। जाँच होती रहेगी, तथ्य सामने आएंगे भी। लेकिन खुली आँखों से दिखाई देती है, लापरवाही और नाकारापन। उसका इलाज़ कब होगा?

किस तरह किसी एक ही प्लेटफार्म पर क्षमता से ज्यादा यात्री प्रवेश कर जाते है? किस तरह मिस-अनाउंसमेंट की जाती है? जहाँ सैंकड़ों CCTV कैमेरे लगे हो, और यात्री नियंत्रित नही किए जा सकते? आखिर किस तरह का व्यवस्थापन है?

हाल ही में, हमने प्रयागराज जंक्शन पर रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर बात कही थी। वहाँपर चप्पे चप्पे पर यात्री सुरक्षा हेतु रेल सुरक्षा बल के जवान तैनात है। यात्रिओंको बेहतरीन तरीक़े से नियंत्रित कर प्लेटफार्म पर छोड़ा जाता है। चौबीस घण्टे गाड़ियोंकी सटीक उद्घोषणा की जा रही है। गाड़ी आने के संकेत के साथ, अमूमन गाड़ी के प्लेटफार्म पर पहुँचने से 30 मिनट पहले, यात्रिओंको प्लेटफार्म पर जाने की सूचना दी जाती है। प्लेटफार्म पर भी गाड़ी प्लेटफार्म पर आकर रुकने तक सुरक्षा बल के जवान प्लेटफार्म के किनारोंपर खड़े रहते है, ताकि यात्री कहीं पटरी पर न गिरे। माना की भीड़ का केंद्र प्रयागराज है, मगर व्यवस्थापन में इतनी कुशलता तो होनी चाहिए कि बदलते हालातों को भाँप सके!

रेल विभाग सुरक्षा साधनों से परिपूर्ण रहता है। प्रत्येक स्टेशनोंके ‘फुटफॉल’ अर्थात यात्रिओंकी आवाजाही के आँकड़े इनके रिकॉर्ड में है। तदनुसार रेलवे स्टेशनोंपर बंदोबस्त भी मुहैया किया जाता है। उन्नत तकनीकों द्वारा भीड़ का आभास भी पता किया जा सकता है। स्टेशनोंके आहाते से ही प्लेटफार्म की भीड़ को नियंत्रित किए जाने की आवश्यक प्रतिक्रिया ‘फीडबैक’ ली जा सकती है। इतनी अद्यतन व्यवस्थाओंके बावजूद इस तरह के हादसे होना यह बड़ी लापरवाही को उजागर करता है।

यह प्रजातन्त्र है। यहाँपर प्रतिनिधित्व पर कामकाज चलता है। जनता अपना प्रतिनिधि चुनती है, सरकारें बनती है। सरकार फिर प्रत्येक विभाग के लिए मंत्री के तौर पर अपना प्रतिनिधि बनाती है जो सम्बंधित विभाग से जनता के हितों के अनुसार काम करवाता है। क्या हमारा प्रतिनिधि अपना काम सम्बंधित विभाग से यथायोग्य तरीके से करवा पा रहा है? मित्रों, बड़ा गहन प्रश्न है।

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रेल बजट : सांख्यिकी और हक़ीकत

15 फरवरी 2025, शनिवार, फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, तृतीया, विक्रम संवत 2081

हाल ही में आम बजट के साथ रेल बजट का आवंटन भी घोषित हुवा। दो लाख पचपन हजार करोड़ रुपए का आवंटन, रोजाना तकरीबन 11 लाख से ज्यादा की यात्री संख्या मगर अलग बजट घोषणा बन्द कर केवल निधि की ही घोषणा की जाती है। पहले रेल बजट जब अलग से सादर किया जाता था, कई घोषणाए आम जनता की सुनने मिलती थी। नई गाड़ियाँ, नए रेल मार्ग, नए रेल सुधार इत्यादि। अब नई गाड़ियाँ और सारे सुधार केवल परिपत्रकों से घोषित किए जाते है। रेल बजट जानने, समझने का सारा खुमार काफ़ूर हो गया।

रेल बजट निधि आवंटित होने के बाद सदन में एक विपक्षी सांसद ने भारतीय रेल की कुछ सांख्यिकी और हक़ीकत पेश की। आइए, समझते है।

* रेल बजट में वर्ष 2009 से 2014 के बाद करीबन 5 गुना इज़ाफा हुवा।
* रेल में यात्रिओंकी हालात गम्भीर, देश की प्रमुख यातायात का साधन, अब केवल मजबूरी की यातायात का साधन बन कर रह गई है भारतीय रेल।
* निरन्तर घटती रफ़्तार और बढ़ता किराया। चीन, जापान की सबसे धीमी ट्रेन भी भारत की सबसे तेज ट्रेन से अधिक तेज दौड़ती है।
* देश की नैशनल कैरियर, भारतीय रेल धीमी रहेंगी तो देश के विकास की गति भी धीमी ही रहेगी।
* वर्ष 2013/14 में औसत किराया 32पैसा/km था जो वर्ष 2021/22 में 66पैसा/km हो गया।
* एक जमाने मे लग्ज़री समझे जाने वाले वातानुकूलित थ्री, टू टियर भी आजकल सामान्य श्रेणी की तरह हो गए है। कोई भी यात्री एडजस्टमेंट का तमगा गले मे लटकाए आरक्षित यात्री से सटकर बैठ जाता है, कहता है, थोड़ा एडजस्ट कर लीजिए, एक स्टेशन ही तो जाना है।
* बेडरोल में हाइजीन, स्वच्छता मिलना मुश्किल, महीने में केवल एक बार धुलते है कम्बल
* प्लेटफार्म की चाय, नाश्ता, खाना अत्यंत अभिरुचि हीन।
* भीड़ के समय, विशेष गाड़ियाँ चलती तो है, मगर केवल उसे ही नसीब होती है, जो दिनरात टिकटोंकी बुकिंग पर नजरें गड़ाए रख सकता है। अर्थात भरपूर मिसमैनेजमेंट है, इन गाड़ियोंके परिचालन में।
* रेल टिकट बुकिंग वेबसाइट IRCTC पर रजिस्ट्रेशन करने से लेकर टिकट बुक करने तक सारी प्रोसीजर एक गहन तपस्या है। एखाद बार किसी तपस्या का फल मोक्ष मिल सकता है, पर IRCTC का तत्काल टिकट मिलना मुश्किल।
* जब अधिकृत ब्रेंड का पेयजल नामित किया गया हो तो नकली या हीन दर्जे के पेयजल, फुड पैकेट्स किस तरह बेचे जा सकते है?
* वरिष्ठ नागरिक किराया रियायत किसी न किसी रियायती दर पर दोबारा शुरू की जानी चाहिये।
* भेड़ बकरी की तरह, आलू की बोरियोंसे लदे रेल यात्री कोच। साधारण यात्री का कोई मोल नही।
* उचित मेंटेनेंस के अभाव का कारण दिया गया 75% दुर्घटनाओं में। जबकि मेंटेनेंस के नाम पर अचानक ही अनेकों नियमित गाड़ियाँ रद्द कर दी जाती है।

बड़ा लम्बा बयान था और हर तरह से हक़ीकत बयान की जा रही थी।

रेल विभाग में समग्र बदलाव की जरूरत है। चाहे वह टिकट बुकिंग हो, आरक्षण प्रणाली हो या रेल परिचालन हो। रेल विभाग ने एक बार शून्याधारित समयसारणी की घोषणा की तो थी, मगर पता नही परिचालन में व्यापक सुधार नही हो पाया।

आज रेल परिचालन में 200 km प्रति घण्टा गति क्षमता वाली LHB गाड़ियाँ पटरी पर लाई जा रही है, मगर रेल के बुनियादी संसाधन यथावत होने से इनकी औसत गति बढ़ ही नही पा रही है। एक तेज गति की वन्देभारत गाड़ी यदि रेल सिस्टम में जोड़ी गई तो कमसे कम 10 जोड़ी गाड़ियोंकी समयसारणी हिलती है। यह भीषण त्रासदी है। रेल नेटवर्क, स्टेशन नेटवर्क अद्यतन होना बेहद जरूरी है।

एक तरफ यात्रिओंकी गाड़ियोंको लेकर माँग भी बेतहाशा बढ़ रही है, दूसरी तरफ नियमित गाड़ियोंमे यात्री सुरक्षित और सुकून महसूस कर सके ऐसी हालत बिल्कुल नही है। टिकट जाँच दस्ते बढ़ गए है मगर जुर्माना देकर भी यात्री बड़े खुशी से यात्रा करना पसन्द कर रहे है। अर्थात दण्ड की रकम भी उसे दण्ड जैसे नही लगती है, इतनी मामूली है।

रेल कर्मियों का, यात्री के प्रति सेवा भाव कहीं न कही गुम हो चुका है। चूँकि पूरे गाड़ी में यात्री सुविधा हेतु नियुक्त TTE टिकट परीक्षक दो या तीन ही होते है, जो कई बार स्लिपर कोच में यात्री व्यवस्था देखने पहुँच ही नही पाते।

कुल मिलाकर टका सेर भाजी टका सेर खाजा वाली गती है। न किराया उचित मूल्य में बढ़ेगा न ही सुविधाएं चाकचौबंद हो पाएगी।

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आपदा में अवसर ढूंढ, स्टेशनोंपर गुंडागर्दी की जा रही है।

11 फरवरी 2025, मंगलवार, माघ, शुक्ल पक्ष, चतुर्दशी, विक्रम संवत 2081

महाकुम्भ 2025 निमित्त नियमित गाड़ियोंके साथ-साथ कई विशेष गाड़ियोंका परिचालन किया जा रहा है। चूँकि नियमित गाड़ियोंमे आरक्षण दो, तीन माह पहले शुरू होकर अब तक पूर्णतः बुक हो गए है और विशेष गाड़ियोंमे भी आरक्षण खुलते ही बुकिंग फूल हो जा रही है। इस अवस्था मे आसपास के शहरोंसे निकलने वाले, महाकुम्भ श्रद्धालु, आरक्षित यानोंमें जबरन घुसपैठ करते दिखाई दे रहे है।

हाल ही में वाराणसी जंक्शन पर खड़ी एक महाकुम्भ विशेष गाड़ी के लोको, इंजिन में ही यात्री चढ़ते नजर आए। लोको पायलट ने रेल पुलिस की मदत से लोको खाली करवाया। आम यात्री कभी ऐसी अराजकता नही फैलाते है। यहाँ असामाजिक तत्व सक्रिय हो कर आम यात्रिओंको उकसाते है।

रेल विभाग में लोको या गार्ड की कैबिन में किसी आम यात्री का यात्रा करना प्रतिबन्धित है, रेल कानून में जुर्म है, दण्डित किए जाने का हक़दार है। लोको और गार्ड कैबिन में कई परिचालन से जुड़ी यन्त्र सामग्री होती है जो किसी आम व्यक्ति के समझ से परे होती है और वह उसका गलत तरीक़े से उपयोग कर रेल सामग्री और सवार यात्रिओंकी जान जोखिम में डाल सकता है।

आज बिहार के मधुबनी स्टेशन पर प्रयागराज होकर जानेवाली, स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस पर हुए कायराना और मूर्खतापूर्ण हमले के वीडियो वायरल हुए है। कुछ युवा गाड़ी के वातानुकूलित कोचों की खिड़कियाँ पत्थर से तोड़ रहे है। यह दृश्य इतने डरावने और खौफ़नाक है, की आम रेल यात्री की सुरक्षा पर बड़ा सा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर देते है। इतनी गुंडागर्दी? आखिर रेल सुरक्षा बल कर क्या रहा है? साफ दिखाई दे रहा है, गाड़ी के अंदर बैठे यात्री कितने सहमे हुए, खौफजदा है।

एक बात तो निश्चित है, यह तोडफ़ोड़ करने वाले कोई महाकुम्भ जानेवाले श्रद्धालु हो ही नही सकते। यह केवल आपत्ति, आपदा में, यात्री भीड़ का फायदा उठाकर, आम यात्रिओंको डरा कर, मज़े लेनेवाले मनचले गुंडे है।

रेल विभाग ने की कार्रवाई,

कल कुंभ मेले जाने वाले यात्रियों की अप्रत्याशित भीड़ मधुबनी, दरभंगा तथा समस्तीपुर रेलवे स्टेशनो पर हो गई थी जिसका संज्ञान लेते हुए रेलवे सुरक्षा बल, जीआरपी, टीटीई, टीसी एवं अन्य वाणिज्य स्टॉफ द्वारा इन यात्रियों को सहयोग कर ट्रेन में बोर्ड करने में मदद की गई है।

इन स्टेशनों सहित मंडल के विभिन्न छोटे बड़े स्टेशनो पर निरंतर उदघोषणा की जा रही है । जो यात्री ट्रेन में सवार नहीं हो सके उनके लिए आसानी से टिकट रद्द करने की व्यवस्था रेलवे द्वारा आरंभ है ।

दरभंगा में 126 अनारक्षित तथा 21 आरक्षित टिकट की वापसी हुई।

इस दौरान अव्यवस्था फैलाने तथा तोड़फोड़ करने वाले 4 व्यक्तियों को चिन्हित करते हुए इन्हें रेल सुरक्षा बल (RPF ) समस्तीपुर द्वारा गिरफ्तार किया गया है।

कुंभ मेला जाने वाले यात्रियों के लिए समस्तीपुर मंडल द्वारा दरभंगा, रक्सौल, जयनगर तथा सहरसा स्टेशनों से प्रयागराज होते हुए कानपुर के लिए आज 11-02-25 को 4 स्पेशल ट्रेने चलाई जा रही है ।

आशा करते है, रेल विभाग और रेल सुरक्षा बल सक्रियता से इन लोगोंकी पहचान करे, और उनपर कड़ी कानूनी कार्रवाई करे। सार्वजनिक क्षेत्र में पुलिस के रहते इतनी गुंडागर्दी की हिम्मत किस तरह की जा सकती है? बड़ा आश्चर्य है।

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प्रयागराज महाकुम्भ 2025 : स्वच्छ, सुन्दर, सात्विक एवं सुरक्षित!

09 फरवरी 2025, रविवार, माघ, शुक्ल पक्ष, द्वादशी, विक्रम संवत 2081

प्रयागराज महाकुम्भ 2025 निमित्त हमारी बहुत सी पोस्ट आई। कुछ विशेष गाड़ियोंकी, गाड़ियोंके नियंत्रण की और कुछ वहाँ के व्यवस्थाओं के बारे में थी। महाकुम्भ मेला अभी 26 फ़रवरी, महाशिवरात्रि तक जारी है। आज हम यहाँ पर कुछ आँखोँ देखी बयाँ करनेवाले है।

प्रयागराज महाकुम्भ 2025 में, पूर्ण पर्व काल मे लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान था, मगर कल दिनांक 08 फरवरी तक ही यह आँकड़ा 35 करोड़ तक पहुंच गया है और श्रद्धालुओं की संख्या अनुमान से डेढ़ गुना पहुँच सकती है।

एक बहुत ही कम समय की, पन्धरह घण्टे की महाकुम्भ मेला यात्रा में हमने प्रयागराज में, रेलवे और शहर व्यवस्था में कुछ उल्लेखनीय बातें नोट की है। प्रयागराज में उत्तरमध्य रेलवे का क्षेत्रीय मुख्यालय है। प्रयागराज के सभी स्टेशनोंपर नैनी, प्रयागराज जंक्शन, प्रयाग, प्रयागराज संगम, प्रयागराज छिंवकी, प्रयागराज रामबाग़ में रेल विभाग द्वारा रेल यात्रिओंका उत्कृष्ट प्रबंधन किया गया है। प्रयागराज जंक्शन पर प्रत्येक 10 मीटर पर रेल सुरक्षा बल के जवान तैनात है। यह तैनाती प्लेटफार्म, ऊपरी पैदल पुल, सर्क्युलेटिंग एरिया में आप को दिखाई देंगी।

किसी भी तरह की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा कर्मियोंके साथ उत्तम सार्वजनिक सम्बोधन प्रणाली, पब्लिक अड्रेसिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है। स्टेशनपर राउण्ड दी क्लॉक, 24 घण्टे यह जारी है। इसके अलावा प्रत्येक सुरक्षा बल का जवान चाहे वह महिला हो या पुरुष कर्मी, यात्रिओंको बेहद विनम्रता से सहयोग, सहायता एवं सलाह देने के लिए तत्पर है। अनारक्षित एवं आरक्षित यात्रिओंके लिए भिन्न भिन्न आगमन एवं प्रस्थान द्वार बनाए गए है। यात्रिओंकी अवांछनीय भीड़ के नियंत्रण हेतु सर्क्युलेटिंग एरिया में बनाए गए विशाल तंबुओं में उन्हें रुकाया जाता है और गाड़ी के आगमन सुचना की उद्घोषणा के साथ उन्हें प्लेटफार्म पर छोड़ा जाता है। प्लेटफार्म पर तैनात सुरक्षा बल के जवान, गाड़ी प्लेटफार्म पर स्थिर होने तक प्लेटफार्म के किनारोंपर यात्री सुरक्षा को मुस्तैदी से सम्भाल रहे है, जो बेहद उल्लेखनीय सेवा है।

रेलवे प्लेटफार्म और तमाम सर्क्युलेटिंग एरिया में साफसफाई व्यवस्था देखते ही बनती है। सैकड़ों सफाई कर्मचारी चौबीसों घण्टे, अविरत सेवा दे रहे है।

यही सारी व्यवस्था आप को रेल परिसर के दायरे से बाहर, प्रयागराज शहर में भी दिखाई देंगी। यहाँ राज्य शासन के पुलिस कर्मी यह जिम्मेदारी सम्भाल रहे है, जिससे तमाम यात्रिओंको, अपनेआप को सुरक्षित होने का एहसास दिलाता है। उनके सहयोग में कई अन्य केंद्रीय राखीव पुलिस CRPF, RAF की टुकड़ियाँ तैनात है। शहर महानगर निगम के सफाई कर्मी भी बेहद सतर्कता से अविरत सेवा दे रहे है।

शहर में दिनभर में अनुमान से दुगने यात्रिओंकी आवाजाही हो रही है। शहर की सार्वजनिक यातायात के लिए रिक्शा, ई-रिक्शा के अलावा शहर के कई युवा निम्न दर में अपने दुपहिया वाहन लेकर जरूरतमंद यात्रिओंको शहर के हर क्षेत्र में पहुँचाने के लिए उस्फूर्त सेवाएं दे रहे है।

कुम्भ के मेला क्षेत्र में भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था अतिउत्तम रखी गयी है। अनगिनत पुलिस कर्मी, सफाई कर्मी तैनात किए गए है। भीड़ को नियंत्रित करने हेतु, बैरिकेडिंग कर के आने-जाने के मार्गोंको विभाजित किया गया है। हालाँकि इन कारणोंसे श्रद्धालुओं को कुछ ज्यादा पैदल चलना पड़ता है, मगर नियोजन के लिए यह आवश्यक ही है।

महाकुम्भ के सुचारू नियोजन के लिए राज्य पुलिस बल एवं केन्द्रीय सुरक्षा बल, रेल विभाग, शहर यातायात विभाग का समन्वय बहुत उल्लेखनीय है। इसके साथ ही प्रयागराज के स्थानीय व्यवसायी, शहरवासी भी शहर पर आने वाले यात्रिओंके अतिरिक्त दबाव को बेहद शांतता एवं समझदारी से निभा रहे है। निगम के आवाहन पर अपने निजी बड़े वाहनों के उपयोग से और बिनावजह मेला क्षेत्र में जाने से परहेज कर रहे है।

कुल मिलाकर यह समझा जा सकता है, सभी सुरक्षा एजंसियों, यातायात व्यवस्था, नगर निगम सफाई व्यवस्थाओंके उत्कृष्ट समन्वय से महाकुम्भ 2025 यात्रिओंके लिए सुगम एवं सुरक्षित चल रहा है। जहाँ अनुमान से दुगुना, तिगुना जनसैलाब पहुँच जाए तो कुछ अप्रत्याशित घटना हो जाती है। हालाँकि इससे निपटने के लिए प्रशासन तुरन्त अपनी व्यवस्थाओंका केंद्रीकरण कर पहुँच रहा है। अन्ततः प्रयागराज शहर वासियोंके उत्कृष्ट सहयोग के साथ ही यात्रिओं, श्रद्धालुओं के भी अनुशासित रहने की नितान्त आवश्यकता है।