


जी हाँ, यह मेलात्तूर रेलवे स्टेशन है। दक्षिण रेलवे के पलक्कड़ डिवीजन में और केरल राज्य में, शोरानुर जंक्शन से निलाम्बुर के लिए एक ब्रांच लाइन जाती है। उस लाइनपर यह एक छोटासा स्टेशन है।



जी हाँ, यह मेलात्तूर रेलवे स्टेशन है। दक्षिण रेलवे के पलक्कड़ डिवीजन में और केरल राज्य में, शोरानुर जंक्शन से निलाम्बुर के लिए एक ब्रांच लाइन जाती है। उस लाइनपर यह एक छोटासा स्टेशन है।
मित्रों, जिस तरह चश्मा हम में से कइयों के जीवन का अविभाज्य घटक हो गया है, उसी तरह अब मास्क भी पहनना अत्यावश्यक श्रेणी में आ गया है। दिनभर मास्क पहनने से कानों के पीछे दर्द होना या खुजली होना आदि परेशानियों से मुक्ति का एक उपाय हमे प्रेषित हुवा है। इसे आप भी प्रयोग में लाकर फायदा लीजिए।
हाँ, रेल्वेकी कोई खबर रही तो हम तुरन्त आप तक पहुचेंगे, वादा रहा।
02823/02824 भुबनेश्वर नई दिल्ली भुबनेश्वर राजधानी स्पेशल 4 दिनोंके लिए परावर्तित मार्ग पर चलाई जाएगी।
02824 नई दिल्ली भुबनेश्वर राजधानी स्पेशल जो दिनांक 18 से 21 मई को नई दिल्ली से चलने वाली है टाटानगर, राउरकेला, झारसुगुड़ा, संबलपुर सिटी, अंगुल, भुबनेश्वर इस मार्ग से चलेगी और इसी प्रकार 02823 भुबनेश्वर नई दिल्ली राजधानी स्पेशल जो दिनांक 19 से 22 मई को भुबनेश्वर से चलेगी उपरोक्त मार्ग से नई दिल्ली पहुंचेगी।
यह गाड़ी अपने हालिया मार्ग भद्रक, बालासोर, हिजल्ली होकर नही जाएगी। अतः खड़गपुर के लिए हिज्जली उतरने वाले यात्री उपरोक्त 4 दिनोंमें इन गाड़ियोंमे यात्रा नही कर पाएंगे।
यह मार्ग परिवर्तन “अम्फान साइक्लोन” की वजह से किया जा रहा है। इसके उपरान्त साइक्लोन की वजह से यदि और भी कोई परिवर्तन किया जाता है तो यात्रिओंको सूचित किया जाएगा। यह समाचार रेल प्रशासन द्वारा परीपत्रक जारी कर के दिया है।





पूरे देश भर से श्रमिकोंके लिए ओंके गांव तक गाड़ियाँ चलाई जा रही है। पश्चिम बंगाल के भी कई सारे श्रमिक, बंगाली कारीगर जो शहरोंमें सोने पर कारीगरी का काम करते है, लॉक डाउन के चलते हलकान हो रहे है। जादा तर इन कारीगरोंका काम परसेंटेज शेयरिंग पर होता है। मासिक वेतन या बंधा बंधाया रोजगार नही और इसी वजह से काम बंद होते ही इन बेचारोंके खाने के भी लाले पड़ गए है। 2 महिनेसे इनके व्यापारी और व्यवसायोंसे जुड़े लोग इनकी भोजन और जीवनावश्यक जरूरतें पूरी करने का भरकस प्रयत्न कर रहे है, लेकिन महाराष्ट्र में लॉक डाउन 31 मई तक बढ़ाए जाने की ख़बरोंको सुन कर यह लोग अब अपना धैर्य खोते जा रहे। बार बार मदद ले कर कारीगरोंको अपने आत्मसन्मान पर चोट सी महसूस होती है। जहाँ प्रशासन आत्मनिर्भरता बढ़ाए जाने पर बल दे रही है, वहां यह लोग और इनका काम पूर्णतया मंदी की कगार पर है।
इन सब कारीगरों, इन के व्यापारी और व्यवसायी की ओर से पश्चिम बंगाल सरकार से प्रार्थना है, की इनकी भी सुनवाई करे और इनको इनका गांव नसीब हो।
रेल प्रशासन की ओरसे पश्चिम बंगाल के लिए श्रमिक गाड़ियोंका सारा कार्यक्रम तय है। राज्य प्रशासन का आपस मे समन्वय हो जाए तो यह गाड़ियाँ अपने तय प्रोग्राम पर चलना शुरू हो जाएगी।


