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रेल्वेने की 30 जुन तक की सारी टिकटें रद्द, रिफण्ड जारी।

वैसे यह खबर तो हमने कल ही दे दी थी। आज परीपत्रक साथ अटैच किए है, ताकी आपको अपनी टिकटें रद्द कराने में कोई सम्भ्रम न रहे। साथ ही रिफण्ड कैसे लेना है इसका भी परीपत्रक है।

श्रमिक स्पेशल गाड़ियाँ जो राज्य सरकारोंके अनुरोध पर चलाई जा रही है, राजधानी स्पेशल गाड़ियाँ और 22 तारीख से शुरू की जाने वाली स्पेशल मेल एक्सप्रेस गाड़ियाँ निर्धारित घोषणा के अनुसार चलती रहेंगी।

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15 से शुरू की जा रही मेल / एक्सप्रेस की बुकिंग्ज

जल्द ही याने 22 मई से और भी गाड़ियाँ शुरू की जा रही है और इनकी बुकिंग्ज 15 मई से IRCTC के द्वारा ही कि जाएगी।

इन गाड़ियोंमे वेटिंग लिस्ट टिकटें भी बुक की जानी है, वातानुकूलित प्रथम श्रेणी में 20, वातानुकूलित 2 टियर में 50, वातानुकूलित 3 टायर में 100 और स्लिपर क्लास में 200 तक बुकिंग आबंटित किए जाएंगे। लेकिन यात्रा करने का अधिकार केवल और केवल कन्फर्म्ड यात्री को ही रहेगा। राजधानी स्पेशल की ही तरह इन गाडियोमे भी तत्काल, प्रिमियम तत्काल और करन्ट कोटा टिकट नही रहेंगे और ना ही टीटीई गाड़ी में सीटें दे पाएंगे।

यह जो मेल एक्सप्रेस या दूसरी गाड़ियाँ शुरू की जा रही है, वह गाड़ियाँ भी राजधानी स्पेशल और श्रमिक एक्सप्रेस के तरह स्पेशल ट्रेन्स ही रहेंगी। रेलवे से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सामान्य ट्रेनों याने टाइमटेबल में प्रकाशित की गई शेड्यूल्ड ट्रेनों का परिचालन 30 जून तक स्थगित ही रहेगा और जिन लोगों ने 30 जून तक का टिकट लिया है उनको टिकट रद्द होने का सारा पैसा वापस मिलेगा.

इन गाड़ियोंमे मेल/एक्सप्रेस, इन्टरसिटी और शताब्दी गाड़ियाँ शुरू की जाएगी। जल्द ही यह गाड़ियाँ कौनसे स्टेशनोके बीच चलेंगी इनकी लिस्ट प्रकाशित की जा रही है। तो दिल थामे रहिए, आपके लिए भी ट्रेनोंकी शुरुवात हो रही है।

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स्पेशल राजधानी गाड़ियोंका विस्तृत लेखाजोखा

मई की 12 तारीख से राजधानी स्पेशल गाडियाँ चल पड़ी है। वैसे तो लॉक डाउन की शुरुवात होने से भारतीय रेल पर 24 जोडी राजधानी गाडियाँ चलाई जा रही थी, अब लॉक डाउन के काल मे बहोत सारे लोग कहीं कहीं अटक से गए है और श्रमिक कामगारोंकी श्रेणी में नही आतें तो उनके लिए 15 जोड़ी राजधानी गाड़ियां चलाई जा रही है। इसका मतलब रेग्युलर चलने वाली 9 राजधानी गाड़ियाँ फिलहाल नही चल रही है। आइए देखते है कौनसी है वह गाडियाँ।

3 राजधानी गाडियाँ डिब्रूगढ़ की चलती थी जिसमे केवल 1 02423/02424 वाया बरौनी और रोजाना चलती थी, चलाई जा रही है। 20504/20503 नई दिल्ली डिब्रूगढ़ राजधानी वाया मुजफ्फरपुर, लखनऊ और 20505/20506 नई दिल्ली डिब्रूगढ़ टाउन वाया वाराणसी बलिया नहीं चल रही है।

हावड़ा के लिए 3 राजधानी गाडियाँ चलती थी, जिसमे 02301/02302 नई दिल्ली हावड़ा राजधानी वाया गया चल रही है। 12305/12306 नई दिल्ली हावड़ा राजधानी वाया पटना और 12313/12314 नई दिल्ली सियालदाह राजधानी वाया धनबाद नहीं चल रही है।

मुंबई के लिए 3 राजधानी चलाई जाती थी, जिसमे 02951/02952 मुंबई सेंट्रल नई दिल्ली राजधानी चल रही है तो 12953/12954 मुंबई सेंट्रल निजामुद्दीन अगस्त क्रांति राजधानी और 22221/22222 मुंबई छत्रपती शिवाजी महाराज टर्मिनस निजामुद्दीन मध्य रेल वाली राजधानी नहीं चलाई जा रही है।

राँची के लिए 2 राजधानी गाडियाँ चलती थी जिसमे 02453/02454 राँची नई दिल्ली राजधानी वाया प्रयागराज चल रही ही तो 20839/20840 राँची नई दिल्ली राजधानी वाया बोकारो नहीं चलाई जा रही है।

भुबनेश्वर के लिए 3 राजधानी गाडियाँ चलाई जाती थी जिसमे 02823/02824 नई दिल्ली भुबनेश्वर राजधानी वाया बोकारो ही चल रही है जिसे रोजाना चलाया जा रहा है मगर 20817/20818 नई दिल्ली भुबनेश्वर राजधानी वाया सम्बलपुर और 22811/22812 नई दिल्ली भुबनेश्वर राजधानी वाया आद्रा यह दोनों राजधानी नहीं चल रही है।

इस तरह 9 जोड़ी राजधानी गाडियाँ जो भलेही गंतव्य की समानता हो लेकिन मार्ग भिन्न भिन्न थे, स्पेशल वाले रन मे नहीं चलाई जा रही है। जिसमे सबसे जरूरी मध्य रेल की मुंबई निजामुद्दीन राजधानी है जो ऐसे मार्ग पर चलती है जहाँ पर फिलहाल कोई भी गाड़ी नहीं चल रही है। इसमे विशेष बात आपको बता दूँ तो देश का अग्रणी, सबसे पहला क्षेत्र जहांसे भारतीय रेल की शूरवात हुई थी, उस मार्ग पर मुंबई छत्रपती शिवाजी महाराज टर्मिनस से लेकर भुसावल और आगे खंडवा, इटारसी तक और भुसावल से नागपूर तक कोई भी स्पेशल राजधानी ट्रेन नहीं चल रही है। यूँ तो मध्य रेल का नागपूर इटारसी मार्ग छोड़ कोई भी मार्ग पर राजधानी स्पेशल नहीं चल रही है।

वातानुकूलित गाडियाँ चलने की वजह यह मालूम पड़ती है, एक तो इनमें सारा स्टाफ़ मौजूद रहता है। वातानुकूलित डिब्बों में यात्री संख्या कम होने से यह डिब्बे स्लिपर क्लास, जनरल क्लास से ज्यादा सुरक्षित तरीकेसे नियन्त्रित किए जा सकते है। किराया भी ज्यादा रहता है, उस कारण अनावश्यक रूपसे यात्रा करने वाले यात्रिओंको हतोत्साहित किया जा सकता है। इन गाड़ियोंके स्टापेजेस काफी कम है तो यात्री भी सिलेक्टेड हो जाते है।

इन 15 स्पेशल गाड़ियोंको मिली उत्स्फूर्त प्रतिक्रिया देखते हुए रेल प्रशासन यदि इसी तरह की वातानुकूलित गाडियाँ चलाना चाहती है तो क्यों न बाकी वातानुकूलित गाडियाँ भी चलानी चाहिए जिसमे दुरांतों, हमसफ़र, गतिमान, शताब्दी, डबलड़ेकर और गरीबरथ गाडियाँ आती है। इन गाड़ियोंके चलाए जाने से काफी मार्ग कवर कीए जा सकते है। अभी के हालत ऐसे है की कई सारे प्रमुख मार्ग जैसे मुंबई हावड़ा, मुंबई प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, लखनऊ दक्षिण मे मुंबई से हैदराबाद, चेन्नई, बंगलुरु, तिरुवन्तपुरम पश्चिम मे मुंबई से अहमदाबाद राजकोट, जामनगर, भुज, आगे अजमेर जयपुर जोधपुर बीकानेर यह सारी कनेक्टिविटी ठप्प हो गई है शुरू हो जाएगी।

हमारा नारा “जान है, जहान भी है” ऐसा है तो बाकी मार्ग की सम्पर्कता भी अवश्य ही बढ़नी चाहिए तभी तो हम हमारा जहान याने व्यवसाय, व्यापार, रोजगार आदि बढ़ा पायेंगे।

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रेल गाड़ियाँ अब 31 मई तक रद्द की गई।

मित्रों, रेलवे के टाइमटेबल अनुसार चलाई जानेवाली सारी मेल / एक्सप्रेस, सुपरफास्ट उपनगरीय गाड़ियाँ, मेट्रो गाड़ियाँ दिनांक 31 मई 2020 के रात्रि 12 बजे तक रद्द की गई है।

इस बीच श्रमिक स्पेशल गाड़ियाँ, राजधानी स्पेशल गाड़ियाँ जो आज से शुरू की गई चलती रहेगी।

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कोरोना के साथ लड़कर हमने जीना सीख लिया।

आखिरकार आम आदमी के लिए रेल के पहिए घूमने लगे है, शुरवात नई दिल्ली से 15 गन्तव्यों के लिए की गई है। हावड़ा, मुम्बई, अहमदाबाद, पटना, बेंगालुरु, डिब्रूगढ़, बिलासपुर, भुबनेश्वर, जम्मूतवी, चेन्नई, राँची, मडगांव, सिकन्दराबाद, तिरुवनंतपुरम और अगरतला ऐसे यह 15 स्टेशन्स है।

माना यह प्रशासन की ओरसे प्रयोगात्मक शुरुआत हो सकती है, लेकिन सिर्फ 15 राजधानियोंसे काम चलना मुश्किल है। हमने हमारे पुराने पोस्ट में, राजधानी, दुरन्तो, गरीबरथ, शताब्दी, गतिमान आदि सभी तेज एवं कम स्टापेजेस वाली गाड़ियाँ शुरू की जाने के दरख्वास्त की थी। इन श्रेणीमे कमसे कम दुरन्तो तो शुरू की ही जा सकती है।

सिर्फ इन 15 गाड़ियोंके चलने से बहुत सारे भूभाग सम्पर्क के बिना रेलवे की राह तकते रह गए है। जिसमे सबसे प्रमुख मार्ग पुणे – मुम्बई से नागपुर होते हुए हावड़ा यह है। बीकानेर – जोधपुर – अहमदाबाद भुसावल होते हुए चेन्नई, बेंगालुरु । मुम्बई से भुसावल, जबलपुर होते हुए प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और मुम्बई से झांसी होते हुए कानपुर, लखनऊ से गोरखपुर यह ऐसे मार्ग है जिनकी यात्रिओंमें प्रचण्ड माँग है।

देश के बहुतांश नागरिकों ने कोरोना के संक्रमण से किस तरह लड़कर जीना है इसकी जानकारी अपने जीवन मे अपना ली है। आज लगभग 90% मोबाईल फोन्स स्मार्ट फोन है, इसमें भी लोग अपने फोन पर “आरोग्यसेतु” ऐप डाऊनलोड कर के उसका संक्रमण से बचने के लिए फायदा ले रहे है। ऐसी हालात में अब गाड़ियाँ बढ़ाई जानी चाहिए, भलेही उनके स्टापेजेस कम हो लेकिन देश का कोई भाग अछूता न रहे। रेल सम्पर्क बढ़ाए जाना बेहद जरूरी है।

जिस तरह से राजधानी और दुरन्तो लम्बी दूरी के शहरोंसे सम्पर्क बनाए रखेंगी उसी तरह शताब्दी और गरीबरथ गाड़ियाँ दो राज्योंकी राजधानीयोंको या महत्वपूर्ण शहरोंके सम्पर्क को बढ़ाएंगी। हम ऐसी आशा करते है, आने वाले दिनोंमें जरूर इसकी घोषणा की जाएगी।