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सब कुछ वैसा, जैसा रेल दुनिया ने सोचा था…

मित्रों, आपको याद होगा हम बार बार अपील कर रहे थे रेल शुरू होनी चाहिए और उसके लिए हमने गाइडलाइंस भी सुझाई थी। आज रेल प्रशासन ने 15 जोड़ी याने 30 गाड़ियाँ शुरू किए जाने की घोषणा कर दी और 300 श्रमिक गाड़ियाँ भी चलेंगी। आइए देखते है, क्या समानताएं है हमारे सुझाव और रेल प्रशासन के नियमों में।

हमने PRS बुकिंग बिल्कुल बन्द रखने और टिकट केवल आईआरसीटीसी के जरिए ई-टिकट ही जारी किए जाने की बात की थी। ठीक वैसे ही हो रहा है।

ई-टिकट जारी हो और सिर्फ कन्फर्म ही टिकट बनाए जाए। रेल में से वेटिंग लिस्ट टिकट का चलन बिल्कुल बन्द किया जाए। ये भी हो गया। केवल कन्फर्म ही टिकट मिलेंगे, ताकि वेटिंग वालोंकी सेटिंग वाली गोलमोल यात्रा बन्द।

हमने कहा था, हर डिब्बे में रेलवे का चेकिंग स्टाफ़ जरूरी है। यह जो 15 जोड़ी गाड़ियाँ चलाई जाएगी वह सारी की सारी फुल्ली वातानुकूलित गाड़ियाँ होंगी, जिसमे वातानुकूलित फर्स्ट, सेकन्ड और थ्री टियर स्लिपर लगाए जाएंगे। याने न सिर्फ चेकिंग स्टाफ़ बल्कि अटेन्डेन्ट भी गाड़ी के डिब्बे में मौजूद रहेंगे जो यात्रियों को सुरक्षित अंतर रखने में सहायता करेंगे।

यह सारी 15 गाड़ियाँ राजधानी मार्ग पर चलने वाली राजधानी विशेष गाड़ियाँ ही होंगी। जिनके यात्रा के दौरान, बीचमे स्टापेजेस लगभग नही ही रहेंगे। केवल टेक्निकल स्टॉप पर ही यह गाड़ियाँ रोकी जाएगी। यह भी हमारे सुझावोंमें शामिल था।

सारी गाड़ियाँ विशेष गाड़ियाँ होनेकी वजह से विशेष नम्बर्स और अपने हिसाब से बनाए गए विशेष शेड्यूल याने टाइमटेबल के अनुसार चलेगी। जिसका किराया भी रेल प्रशासन अपने फेयर टेबल से अलग, विशेष प्रिमियम के साथ ले सकेगी। जब डिब्बों की क्षमता से कम यात्रिओंको प्रवेश देकर गाड़ियाँ चलानी है तो किराया ज्यादा चुकाना वाज़िब है।

यात्रिओंने यात्रा के दौरान खाना अपने साथ ही लाना होगा। जहाँ तक है बोतलबन्द पानी रेल कोचेस में मिल पाएगा।

जो 300 श्रमिक गाड़ियाँ चलेगी, वह जहाँतक है रेलवे ने जो क्वारण्टाइन कोचेस का निर्माण किया था उन्ही कोचेस को जोड़ कर चलाई जाएगी।

मित्रों, यह बात तय है की अब आपको रेल यात्रा करनी है तो आपके गाड़ी के तय समय से आपको स्टेशनपर जल्दी पोहोंचना होगा। खुद के उत्तम स्वास्थ्य का प्रमाण देना होगा। अब चलते, फिरते, भागते, दौड़ते करन्ट टिकट लेकर, बिना कन्फर्म रिजर्वेशन यात्रा के दिन भूल जाइए। अब न सिर्फ अपनी बल्कि अपने सहयात्रिओंकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आप पर है। तो सजग बनें और सुरक्षितता के साथ यात्रा करे, हाँ एक बात और बिल्कुल और बिल्कुल जरूरी हो तो ही रेल यात्रा के लिए निकले अन्यथा अपने सारे काम फोन पर से ही निपटाए। शुभ यात्रा, सुरक्षित यात्रा।

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यात्री ट्रेनें शुरू हो रही है।

कुछ स्तर पर यात्री गाड़ियाँ दिनांक 12 मई से शुरू होने जा रही है। बुकिंग कल 11 मई से शुरू हो जाएगी। और जल्द ही विस्तारपूर्वक खबर देंगे।

भारतीय रेलवे ने 12 मई, 2020 से शुरू में 15 जोड़ी ट्रेनों (30 वापसी यात्रा) के साथ धीरे-धीरे यात्री ट्रेन संचालन को फिर से शुरू करने की योजना बनाई है।  ये ट्रेनें डिब्रूगढ़, अगरतला, हावड़ा, पटना, बिलासपुर, रांची, भुवनेश्वर, सिकंदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, तिरुवनंतपुरम, मडगांव, मुंबई सेंट्रल, अहमदाबाद और जम्मू तवी को जोड़ने वाली नई दिल्ली स्टेशन से विशेष ट्रेनों के रूप में चलाई जाएंगी।

इसके बाद, भारतीय रेलवे COVID-19 देखभाल केंद्रों के लिए 20,000 कोचों को आरक्षित करने के बाद उपलब्ध कोचों के आधार पर नए मार्गों पर और अधिक विशेष सेवाएं शुरू करेगा और पर्याप्त संख्या में कोचों को “श्रम स्पेशल” के रूप में प्रतिदिन 300 ट्रेनों के संचालन को सक्षम करने के लिए आरक्षित किया जाएगा। 

इन ट्रेनों में आरक्षण के लिए बुकिंग 11 मई को शाम 4 बजे शुरू होगी और केवल IRCTC की वेबसाइट (https://www.irctc.co.in/) पर उपलब्ध होगी। 

रेलवे स्टेशनों पर टिकट बुकिंग काउंटर बंद रहेंगे और कोई काउंटर टिकट (प्लेटफॉर्म टिकट सहित) जारी नहीं किया जाएगा।  केवल वैध कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों को रेलवे स्टेशनों में प्रवेश करने की अनुमति होगी।  यात्रियों को चेहरा ढंकना अनिवार्य होगा और प्रस्थान के समय स्क्रीनिंग से गुजरना होगा और केवल यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने की अनुमति होगी।  ट्रेन कार्यक्रम सहित अन्य विवरण अलग-अलग समय पर जारी किए जाएंगे।

उपरोक्त जानकारी भारतीय रेलवे के ट्वीटर अकाउंट से साभार

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जरा घर में भी मास्क लगा रहने दे।

एक सुन्दर सन्देश आईआरसीटीसी ने जनहित में जारी किया है। घर से बाहर निकलते हो तो चेहरे पर मास्क चढ़ाना जरूरी है, क्योंकी यह मास्क आपका वायरस के इंफेक्शन से बचाव करेगा। लेकिन आपका यह मास्क आप जरा घर मे भी लगा ही रहने दे। अब आप पूछेंगे, ऐसा क्यों? घर मास्क पहनने की क्या जरूरत है?

जी, जरूरत है। लॉक डाउन में चौबीसों घंटे घरोंमें रह रहकर इन्सान का मुँह किसी चक्की की तरह चलता ही रहता है या यूँ कहिए की चरखे की तरह चलता है। चप्पा चप्पा चरखा चले। मतलब तो आप समझ गए ही होंगे। भाई, यह आपके दिनभर खाते रहने से सम्बंधित है। एक तो कोई काम नही रहता, न कोई टारगेट। घूम घूम कर मन मे यही विचार क्या खाना है, नाश्ता में क्या बनवाए, लंच और डिनर और बीच बीच मे ऐसे ही कुछ न कुछ। बस, चलते ही रहता है।

जरा गृहिणी से पूछिए, इस महीने राशन की क्या स्थिति है? वहीं जानती है, दिनभर रसोई घर से निकलने की फुरसत ही नही। लॉक डाउन नही हुवा जैसे गर्मियोंकी छुट्टियाँ चल रही हो। आज यह व्यंजन तो कल वो। आज इनकी पसंद का मीनू तो कल कुछ और। इन चक्कर मे न सिर्फ ओवर ईटिंग हो रही बल्की ओवर वेस्टेज भी हो रही है।

एक तरफ ऐसी भीषण स्थिति है, कई लोगोंको एक वक्त का खाना तक नसीब नही हो पा रहा। अलग अलग समस्याएं है। कोई मज़दूरोंके घर राशन खत्म हो गया है, और रोजगार बन्द होने से खरीदने के लिए पैसा भी नही है। तो किसी के पास पैसा है, राशन भी है मगर बनाने वाला कोई नही, बाहर होटल, रेस्टोरेंट सब बन्द, यहाँ तक की कई बन्दे ऐसे है, अब चाय भी बनाना सीख रहे है यु ट्यूब के चैनलोंपर जा जा कर। चावल, खिचड़ी के साथ साथ अब दाल कैसे गलती है या जलती है इसका अनुभव भी लिया जा रहा है।

कुल मिलाकर यह है, की जितना जरूरत है, उतना ही पकाए, उतना ही खाए। यह आपकी सेहत भी दुरुस्त रखेगा और किसी के जरूरतमंद की जरूरत भी पूरी होगी। अपने राशन का दुरुपयोग न करें। जरा सोचिए, आप ही की गली के नुक्कड़ पर आज फिर कोई भूखा सोया होगा।

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नादानी, नासमझी या दुर्भाग्य!

आज सुबह महाराष्ट्र के औरंगाबाद – जालना शहरोंके बीच दक्षिण पूर्व रेलवे के नान्देड विभाग में रेल लाइन पर एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हुवा। रेल की पटरी पर 16 जिन्दगी धराशायी हो गयी, इन सोलह लोगोंका काल बनी परभणी से मनमाड़ की ओर जानेवाली मालगाड़ी।

क्या कहना चाहिए इसे? रेल की पटरी, बसों ट्रकों से बहता रास्ता यह कोई सोने की, बैठने की जगह कतई नही है। रात भर चलते जा रहे श्रमिक मजदूर थक कर लेट गए पर कहाँ रेल की पटरी पर? कैसी नादानी, नासमझी कर बैठे? उन्हीं के जत्थे में से चार लोग रेल पटरी से दूर खेत मे जाकर सोए थे वह बच गए। बताइए वे लोग क्यों बच गए? वह चार लोग जिस जगह लेटे थे वहाँपर रेल गाड़ी नही जा सकती थी। जब यह लोग सुरक्षित स्थान पर जाकर सो सकते है तो बाकी लोग क्यों पटरी पर लेट गए?

लॉक डाउन के चलते रेलवे की आवाजाही हर मार्ग पर बहोत कम है, लेकिन शुरू है। किसी जीवित याने लाईव ऑपरेटिंग में रेल लाइन पर आवाजाही करना न सिर्फ खतरनाक है बल्कि कानूनन जुर्म भी है। यह लोग किस तरह की नासमझी के कारण इस भयावह दुर्घटना के शिकार हुए है यह समझना अब नामुमकिन है, क्योंकी वह सारे जिंदगी से हात धो बैठे है।

ऐसे हादसों मे दुर्घटना की जाँच की जाती है। रेल गाड़ी किस गति से आ रही थी, दृष्यमानता कितनी थी, लोको पायलट ने हॉर्न बजाया था या नही, गाड़ी रोकने की कोशिशें किस तरह की गई, इमरजेंसी ब्रेकिंग में क्या रेल गाड़ी भी हादसे की शिकार हो सकती थी? इत्यादि कई सारे सवाल और लम्बी तहकीकात। लेकिन इस बीच दुर्घटनाग्रस्त पीडितोंकी लापरवाही, नासमझी, गैरजिम्मेदाराना हरकत को कोई शायद ही नकार पाएगा। ज़िन्दगियाँ जब मौतों में बदल जाए तो दुर्घटना में किसका दोष था यह ढूंढना बेमानी हो जाता है।

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भुसावल – प्रयागराज रेल मार्ग का विद्युतीकरण पूरा।

भुसावल से इटारसी, इटारसी से कटनी और प्रयागराज से सतना विद्युतीकरण पूरा हो गया था केवल बीच का कटनी से सतना मार्ग का विद्युतीकरण बाकी था। हालाँकि इलेक्ट्रिक लोको से गाड़ियाँ चलाई जा रही थी। कटनी में एक डीजल लोको और लगाकर गाड़ी सतना तक जाती थी, वहाँ पर डीज़ल लोको निकल जाता था और गाड़ी इलेक्ट्रिक लोको से आगे बढ़ जाती थी। इस लॉकडौन के काल मे रेल प्रशासन ने वह बचा हुआ विद्युतीकरण का काम भी पूरा कर लिया है। इससे प्रयागराज की ओर जाने वाली सारी गाड़ियाँ शंटिंग के लिए बिना रुके सीधी चलेगी।

साभार : सतना भास्कर