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आज से भारतीय रेल पर सारी ट्रेनोंकी टिकट बुकिंग अगली सूचना तक रद्द।

अब तक यह चल रहा था, 15 अप्रेल से आगे सारी टिकटें IRCTC के ई पोर्टल पर बुक की जा रही थी, जिसे 3 मई तक लॉक डाउन की घोषणा के बाद 3 मई तक की सारी गाड़ियाँ रद्द कर रिफण्ड दिए जाने की सूचना दे दी गयी है।

इसमें एक बात और जान लीजिए, 3 मई के बाद भी IRCTC के ई पोर्टल पर कोई भी टिकट बुकिंग भी अगली सूचना दिए जाने तक स्थगित की गई है। यानी अब सारी अटकलोंको भी आराम दे दिया गया है।

अब बात करते है रिफण्डस की। आपके टिकट 3 मई की तारीख तक के है और ई टिकट है तो आपको कुछ भी नही करना है, गाड़ियाँ रद्द हो चुकी है और आपका रिफण्ड रास्तेमें है जो कभी भी आपके अकाउंट में दस्तक दे देगा। यदि PRS काउंटर टिकट है तो आप SMS के जरिए 139 रेलवे की हेल्पलाइन पर फोन करके, जब भी आपको सूचना आ जाए तब कैंसल कर लीजिए, काऊंटर्स ओपन किए जाने पर अपना कैश ले लीजिएगा।

एक विशेष बात और है, यदि आपकी टिकट 3 मई के बाद की है और गाड़ी कैंसल की कोई सूचना अभी जारी नही की गई है मगर आप अपनी रेल यात्रा नही करना चाहते तो भी आपके टिकट कैसल करने पर आपको पूरा रिफण्ड दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

निश्चिंत रहिए, घर पर ही रहिए, आगे रेल यात्रा करनी है या नही यह सुनिश्चित कर लीजिए और फिर घर बैठे बैठे ही अपने टिकट रद्दीकरण का काम कर लीजिए। निम्नलिखित परीपत्रक पढ़ लीजिए, उसमे स्पष्ट किया गया है।

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कल क्या हो, किसने जाना?

लॉक डाउन की घोषित मियाद पूरी होने को बस चन्द घंटे बचे है। कल सुबह 10 बजे हमारे प्रधानमंत्री इस विषय को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा करनेवाले है।

मित्रों, आप सभी लोगोंके मन मे हलचल मची हुई है, लॉक डाउन बढ़ेगा, खत्म होगा या आंशिक स्वरूप में रहेगा? रेलगाड़ियोंका क्या होगा, शुरू हो जाएगी या अभी नही होगी? नही हुई तो फिर कब होगी और शुरू हो गयी तो कुछ ही गाड़ियाँ चलेगी? गाडीके अन्दर कितने यात्री यात्रा कर पाएंगे? सवाल, सवाल और सवाल। यह सब ढेर सारे सवाल और तमाम उल्टी सीधी बातें हमारे चैनलों, वेबसाइटस और वॉट्सऐप पर चर्चाओं आम लोगोंके मन मे निर्माण कर दिए है।

सबसे पहले आप सोचिए, यदि आपको पता चलता है की 15 तारीख से गाड़ियाँ शुरू होने जा रही है, तो आपका क्या प्लान है? घूमने जाना है? रिश्तेदारों के यहाँ जाना है या व्यापार व्यवसाय करने निकल पड़ना है? हमारे ख्याल से कई सारे कारण है जो आपको रेल में यात्रा करने के लिए मजबूर कर रहे हो ऐसे वास्तविकता है ही नही। समझिए की लॉकडाउन खत्म किया जाता है तो भी ऐसा कोई कारण नही की आप रेल में बैठने दौड़ पड़ेंगे। कारखाने, दफ़्तर शुरू किए गए तो भी व्यापार व्यवसाइयों का काम फोन पर होता रहेगा।

सबसे पहले जरूरत होगी मजदूर, श्रमिक, वेतनभोगी कर्मचारियोंकी और इन्हे जरूरत होगी सबअर्बन गाड़ियोंकी या शार्ट डिस्टेन्स चलनेवाली गाड़ियोंकी। अब इन लोगोंका वर्गीकरण कर के, जरूरत के हिसाब से, परिचयपत्र के साथ, इनको रेलोंमें एन्ट्री दी जा सकती है। जितने भी कर्मचारी, मजदूर, श्रमिक है उनके लिए उनके कारखानों, दफ्तरोंसे सम्मतिपत्र के आधार पर अनुमतिपत्र जारी कर उंन्हे रेल की पास के साथ यात्रा करने दी जा सकती है। साथ ही यही व्यवस्था जरूरतमंद यात्रिओंके लिए भी की जा सकती है। याने अपनी यात्रा करने के उचित कारण हो तो ही रेल में यात्रा करनी चाहिए।

कुछ दिनोंके बाद स्थानीय यातायात अनुशासन में चलती देख लम्बी दूरी की गाड़ियाँ भी स्पेशल शेड्यूल के साथ शुरू कराई जा सकती है। इन गाड़ियोंकी घोषणा उनके विशेष शेड्यूल से केवल 24 से 48 घंटे पहले की जानी चाहिए। गाड़ी में यात्रा करने के लिए यात्री को भारत सरकारका “आरोग्यसेतु” एप्लिकेशन, रेल यात्रा की विशेष अनुमतिपत्र जो किसी राजपत्रित अधिकार में जारी किया गया हो के साथ ही आवश्यक किया जाना चाहिए। खैर, हमारे विचार है और इसके पीछे आप सभी के अच्छे स्वास्थ्य की चिंता है।

लॉकडाउन हटाया गया या आँशिंक स्वरूप में रहा तो भी संक्रमण रोकने के लिए जितने भी नियम और एहतियात हमको बरतने है उनको आगे भी कायम रखते हुए ही सब कामकाज, ड्यूटी, व्यवसाय, व्यापार हमे करना होगा। घरसे निकलना है तो बिना उचित कारण के नही निकलना है और निकलना ही पड़े तो यात्रा चाहे रिक्शा, टैक्सी, बस या रेलगाड़ी, हवाईजहाज की क्यों न हो पूरा पूरा संयम, सावधानी सुरक्षा और कड़ा अनुशासन ही हमे संक्रमण से बचाए रख सकता है इसका ध्यान हमे रखना है।

अब हम यह सोचते है, कितना सुन्दर दृश्य होगा की हमारे देश के सारे पहिए चल पड़ेंगे। फिर वह रेल के हो या बसोंके, टैक्सी के हो या कारखानोंकी मशीनोंके। सारे भारतीय मजदूर, श्रमिक, कर्मचारी, व्यवसायी, व्यापारी, अफ़सर सभी अपनी अपनी सुरक्षा कायम रखते हुए, एकदूसरे को सहकार्य करते हुए अनुशासन कायम रख अपने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे है।

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अब ‘ जान भी जहान भी’

जान है तो जहान है और जान भी, जहान भी। लॉक डाउन के शुरुआती दौर में “हमे जान है तो जहान है” वाली उक्ति पर अमल करना था। इसका वास्तविक अर्थ यह के आप को अपनी जिन्दगी को सर्वप्रथम सम्भालना है, आप सम्भलोगे तो दुनिया सम्भलेगी और अब जब लॉक डाउन की मियाद पूरी होने को है, आगे बढ़ाए जाने की बाते चर्चा में है तब नयी बात सामने आ रही है ” जान भी, जहान भी।

मित्रों, लॉक डाउन की परिस्थितियों में हमने अपने आप पर संयम रखकर, अनावश्यक जनसम्पर्क से दूरी बनाकर संक्रमण को सीमित रखने में बड़ी भूमिका निभायी है। अब इसी तरह के संयम को कायम रखते हमको हमारे सहयोगियों, कर्मचारियों को सम्भालनेकी बारी आई है। एक बात अच्छी तरह से समझ ले, संक्रमण थमा है खत्म नही हुवा है तो जितनी भी एहतियात, पूर्वावधान हमने आज तक रखा था उसे कायम रखते हुए अब हमें हमारे उद्योग, व्यापार, हमारे जरूरी कार्य को आगे बढ़ाना है ताकी जो हमारे देश की अर्थव्यवस्था के पहिए रुक से गए थे वो चल पड़े।

दायरे सीमित ही खुलेंगे, हो सकता है सार्वजनिक वाहन व्यवस्थाओंमें बंधन लगे होंगे, रेल में सीमित आसन व्यवस्थाएं रहेगी, कुछ ही गाड़ियाँ चलाई जाएगी, जरूरी और सुरक्षित स्टेशनोंपर ही यात्रिओंको आवागमन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जी, आप सही समझ रहे है, आपातकाल जैसी स्थितियाँ महसुस कर रहे है न? नही, वैसा नही होगा क्योंकी यह हमारे आत्मसंयम और स्वानुशासन के साथ किया गया प्रयोग होगा। आने वाले दिन कुछ इसी तरह के होंगे।

हमे सिर्फ और सिर्फ सरकारी सूचनाओंपर ही ध्यान देना है, उन्हीपर अंमल करना है। किसी भी उलूलजुलुल ख़बरोंको न तो पढ़ना है, न ही किसी अन्य को फॉरवर्ड करना है। “हकुना मटाटा“, समझे? इस पूर्वी अफ्रीकी स्वाहिली कहावत का अर्थ है ” सब ठीक हो जाएगा, चिन्ता मत करो”

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खयाली पुलाव पंचायती

फिर से पंचायत बैठ गयी है। अब विषय है, रेल प्रशासन ने जो 20,000 यात्री डिब्बों को आइसोलेशन वॉर्डस में कनवर्ट किया है उसपर। पंचायती कह रहे है, इन डिब्बों को जोड़कर रेल गाड़ियाँ बनाई जाएगी और उंन्हे 15 अप्रेलसे चलाई जाएगी।

यह आइसोलेशन वाले जो डिब्बे है, उनकी मिड्ल बर्थ निकाली गई है। 6 बर्थ की कैबिन में अब 4 ही बर्थ है। हर कैबिन पर प्लास्टिक कर्टन/ पर्दा लगाया गया है। और आगे यह भी चर्चा उछाली जा रही है की इन डिब्बों का एक अलग श्रेणी का टिकट भी बनाया जाएगा जिसे नॉन एयर कंडीशन 2 टियर स्लिपर क्लास कहा जाएगा और उसका किराया स्लिपर क्लास और AC 3 टियर के बीच की रेंज का रहेगा। यात्री को 4 घंटे पहले स्टेशनपर आना पड़ेगा, खुद का मेडिकल चेकअप कराना होगा, तभी गाड़ी में यात्रा कर पाएंगे।

मित्रों, इन सारी पंचायतोंको अब आप बस टाइमपास की तरह लेते चलिएगा, क्योंकी रेल प्रशासन ने बार बार यही कहा है, जब भी फैसला होगा तब उसकी घोषणा कर दी जाएगी।

अब रही बात आइसोलेशन डिब्बों की, तो यह वहीं पारंपरीक डिब्बे है जिन्हे कई मेल एक्सप्रेस गाड़ियोंके पुराने डिब्बे बदल कर LHB डिब्बे लगाए गए थे। जहाँ गाड़ियोंकी गति 110 kmph से बढाकर 130 kmph और 160 kmph करने के लिए एक निश्चित कार्यक्रम के तहत बदला जा रहा है। यह पुराने डिब्बे जगह जगह के यार्डोंमे खाली पड़े थे, उन डिब्बों का सदुपयोग हो इसीलिए उनमें मिड्ल बर्थ काटे गए, ऑक्सीजन सिलेंडर्स के लिए स्टैंड्स बनाए गए, टॉयलेट को कन्वर्ट कर बाथरूम बनाया गया, एक एक कैबिन में 3-3 डस्ट बिन लगाए गए। अब आप बताइए, क्या यह डिब्बे किसी गाड़ी में कैसे भला लगाए जाएंगे? खैर।

हम अभी उचित घोषणा का इंतजार करेंगे। तब तक खयाली पुलाव का मज़ा लीजिए।