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रेलवे का स्लिपर क्लास

चार महीने पहले, लम्बी कतारोमे, धक्के खाते, आरक्षण कन्फर्म करवा के आखिर वो यात्रा की शुभ घड़ी आ ही गई थी की हम इलाहाबाद के कुम्भ स्नान का पुण्य अपने गांठ बांध लें।

गाड़ी पुणे स्टेशन से दोपहर सवा चार बजे छुटने वाली थी। तीर्थयात्रा जाना था, बड़े बूढ़े कहते है बारवास में सकून देखना चाहिए पैसे नही, तो कैब बुलवा ली और पहुंच गए स्टेशन। हालाँकि कुम्भ में शाहीस्नान के पर्व की तिथि तो नही थी पर पुणे स्टेशन की भीड़ देख कर ऐसा लग रहा था, जैसे सभी को हमारे साथ ही पूण्य अर्जित करने की सूझी है।

पौने चार बजे गाड़ी स्टेशनपर लगी, तो क्या जनरल डिब्बे और क्या आरक्षित शयनयान डिब्बे। भीड़ तो ऐसे उमड़ी की जैसे लंगर लगा हो। हम भी हो लिए, हमारे डिब्बे एस 4 की ओर। बड़ी जद्दोजहद के बाद डिब्बे में घूंसे, अपने बर्थ तक पहुँचे, तो हमारी दोनोंही लोअर बर्थ पर 6 – 6 लोग पहलेसे ही जमे थे। अब वार्तालाप देखिए, हमने कहा, “भाई यह हमारे रिजर्वेशन है, हमे बैठने दीजिए।” अपने पाँव मोड़ कर के, आगे पीछे खिसक के, सलाह मिली, “लीजिए, आप बैठ जाइए। रिजर्वेशन टिकट तो हमारे भी है, बस कन्फर्म नही हुए वेटिंग में है।” अब पूरी डिब्बे की भीड़ के सामने हम विलेन बने, ” ये सिट मुझे दे दे ठाकुर” वाली स्टाईल में गब्बर की तरह दिखाई दे रहे थे और सैंकड़ों जय, वीरू और बसंतियाँ हमे घूर रही थी। जाना तो सभी को इलाहाबाद, वाराणसी। खैर! अब शुरू हुआ एडजस्टमेंट वाला खेल। गाड़ी चल पड़ी तो थोड़े सरको, जरा खिसको, थोड़ा बैठो और सेट हो जाओ।

गाड़ी चले, 4 घंटे हो चुके थे। टिटी साहब का कोई अतापता नही था। हमें भरोसा था, बाबूजी आएंगे और बिना रिजर्वेशन वालोंसे हमारी जगह ख़ाली करवा देंगे। अब तो हमारी बेगम भी हमे अपनी आंखें दिखाने लग गई थी। शाम ढलते ढलते, वैसी ही भीड़भाड़ मे हमने अपना टिफिन निकाला और खाना खा लिए। रात के 10 बज गए, ” भाई, अब हम सोएंगे, बर्थ खाली कर दो” थोड़े लोग इधर उधर हो गए, जगह बनाई गई और श्रीमतीजी मिडल बर्थ पर और हम निचले बर्थ पर लेट गए। बड़ी मुश्किल से नींद आई, अचानक हमारे पैर किसी भारी वजन से दब गए। हड़बड़ाकर उठने हुए तो हमारे बगल में हमारी बर्थ पर एडजस्ट हुवा एक बन्दा दन से नीचे गिरा, उसको सम्भालते तब तक जो पैर पर का बोझा भी लुढक़ चुका था। बड़ाही हडक़म्प मच गया। क्योंकि जहाँ ये लोग गिरे वहाँ भी लोग हाथ पैर पसारे चित हुए पड़े थे। ” ऐ काका, शांती से सोते रहा, काहे उठत रहे?” इधर हम अपने दबे पैरों का दर्द सहते बोले, ” भैया, हमारा बर्थ …..” अरे चाचा, आप ही तो सोये है, तनिक टिक लिए तो कौन तकलीफ़ हो गई? रात का समय है, आँख लग गई, तो थोड़ा सा…., और वैसे भी सुबह होने को है। आप पूरी रात सोए हो, अब हम भी थोड़ा सो ले?”

हम सोच रहे, हमारा कहाँ चूक हो गया, शायद स्लिपर क्लास में रिजर्वेशन कराने में? वातानुकूलित डिब्बे में एडजस्ट वाला खेला नही होता।

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शेगांव रुकेंगी प्रेरणा एक्सप्रेस एवं जोधपुर चेन्ने जोधपुर एक्सप्रेस।

दिनांक :03/02/19
प्रेस नोट

शेगांव स्टेशनों पर दो ट्रेनो को एक मिनट का ठहराव

रेलवे ने छह महीने की अवधि के लिए विभिन्न स्टेशनों पर निम्नलिखित ट्रेनों को छह महिनेके प्रायोगिक आधार पर एक मिनट का ठहराव प्रदान करने का निर्णय लिया है। विवरण निम्नानुसार हैं:
गाड़ी संख्या 22137/22138 नागपुर अहमदाबाद प्रेरणा एक्सप्रेस शेगांव स्टेशन पर 03.02 .19 से प्रभावी।
ट्रेन संख्या 22137 शेगांव से 14.44 बजे और अहमदाबाद की ओर आगे की यात्रा के लिए 14.45 बजे प्रस्थान करेगी और यह गाड़ी रविवार ,शनिवार ,बुधवार यह दिन चलेगी l
ट्रेन संख्या 22138 शेगांव से 05.39 बजे और नागपुर की ओर आगे की यात्रा के लिए 05.40 बजे प्रस्थान करेगी और यह गाड़ी सोमवार ,मंगलवार ,शुक्रवार यह दिन चलेंगी l
गाड़ी संख्या 22663 /22664 जोधपुर चैन्नेई एग्मोर एक्सप्रेस शेगांव स्टेशन पर 03/02/19से प्रभावी।
ट्रेन संख्या 22663 शेगांव से 11.14 बजे पहुंचेगी और जोधपुर की ओर आगे की यात्रा के लिए 11.15 बजे रवाना होगी और यह गाड़ी रविवार के दिन चलेगी l
ट्रेन संख्या 22664 , शेगांव 19.52 बजे और चैन्नेईएग्मोर की ओर आगे की यात्रा के लिए 19.53 बजे प्रस्थान करेगी और यह गाड़ी मंगलवार के दिन चलेंगी l

सभी संबंधित कृपया परिवर्तन पर ध्यान दें और सुविधा का लाभ उठाएं।