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मध्य रेल CR के नए स्टोपेजेस के टाइमिंग्ज

23 अगस्त 2023, बुधवार, निज श्रावण, शुक्ल पक्ष, सप्तमी, विक्रम संवत 2080

मध्य रेल ने 42 जोड़ी गाड़ियोंके अस्थायी स्टोपेजेस हाल ही में घोषित किए है। उनमें से कुछ स्टोपेजेस के टाइमिंग्ज अर्थात समयसारणी जारी हुई है।

होटगी : 17319/20

कल्याण : 12261/62, 82356/55, 18519/20, 19667/68, 17221/22

कोपरगाँव : 18503/04

कान्हेगाव : 11409/10

नागपुर : 12213/14

आशा करते है, बचे हुए घोषित अस्थायी स्टोपेजेस के टाइमिंग्ज भी जल्द ही जारी किए जाएंगे।

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पुणे मण्डल में आज और कल बहुतसी यात्री गाड़ियाँ बाधित रहेंगी। नीरा, लोणन्द, चिंचवड़, खड़की, हडपसर स्टेशनोंपर रेल उन्नयन हेतु रेल ब्लॉक जारी है।

19 अगस्त 2023, शनिवार, निज श्रावण, शुक्ल पक्ष, तृतीया, विक्रम संवत 2080

पुणे मिरज रेल मार्ग पर, निरा लोनन्द स्टेशनपर रेल ब्लॉक जारी है। निम्नलिखित गाड़ियाँ बाधित रहेंगी।

पुणे दौंड मार्ग के हडपसर स्टेशनपर रेल ब्लॉक जारी है, निम्नलिखित गाड़ियाँ बाधित रहेंगी।

पुणे मुम्बई रेल मार्ग पर, खड़की चिंचवड़ स्टेशनपर रेल ब्लॉक जारी है। निम्नलिखित गाड़ियाँ बाधित रहेंगी।

10 गाड़ियाँ रद्द, पुणे – लोनावला उपनगरीय गाड़ियोंके 20 फेरे रद्द, 7 गाड़ियाँ नियंत्रित कर चलाई जाएंगी और 2 गाड़ियाँ रिशेड्यूल कर, अपने प्रारम्भिक स्टेशनसे नियोजित समय के स्थानपर देरी से प्रस्थान करेंगी।

सम्पूर्ण रद्द गाड़ियाँ :

नियंत्रित एवं रिशेड्यूल गाड़ियाँ :

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बड़ी खुशखबरी : मुम्बई – बल्हारशाह के बीच नई साप्ताहिक गाड़ी, अमृत एक्सप्रेस का रामेश्वरम तक और गोलगुम्बज एक्सप्रेस का पंढरपुर तक विस्तार

16 अगस्त 2023, बुधवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, अमावस्या, विक्रम संवत 2080

सेवाग्राम एक्सप्रेस की चंद्रपुर, बल्हारशाह लिंक एक्सप्रेस बन्द किये जाने के बाद क्षेत्र का मुम्बई सम्पर्क कट सा गया था। बची खुची कसर मुम्बई काझिपेट साप्ताहिक आनंदवन सुपर और ताडोबा एक्सप्रेस के शून्याधारित समयसारणी कार्यक्रम के तहत रद्द करने के बाद पूरी हो गयी। बल्हारशाह से वर्धा तक मुख्य ग्रैंड ट्रंक मार्ग के सभी यात्रिओंको मुम्बई जाने के लिए वर्धा जंक्शन का ही सहारा लेना पड़ रहा था। मुम्बई – बल्हार शाह के बीच सीधी यात्री गाड़ी की लगातार गुहार आखिरकार रेल प्रशासन के पल्ले पड़ी और अब एक साप्ताहिक गाड़ी चलने घोषणा सामने आई है, जल्द ही यह गाड़ी पटरी पर आ जाने की संभावना है। आप संक्षिप्त समयसारणी देखें,

16535/36 मैसूरु सोलापुर मैसूरु गोलगुम्बज एक्सप्रेस का सोलापुर से आगे पंढरपुर तक विस्तार करने की घोषणा की गई है। इस विस्तार से गाड़ी की समयसारणी में बदलाव भी होने वाला है। जब गाड़ी पंढरपुर तक विस्तारित की जाएगी तब मध्य रेल की ओरसे विस्तृत समयसारणी, बदलाव के साथ घोषित की जाएगी। फिलहाल संक्षिप्त समयसारणी निम्नलिखित है,

16343/44 तिरुवनंतपुरम मदुरै तिरुवनंतपुरम अमृत एक्सप्रेस को मदुरै से आगे रामेश्वरम तक विस्तारित किये जाने की घोषणा रेल प्रशासन ने की है। उक्त गाड़ी का रैक 16751/52 चेन्नई एगमोर रामेश्वरम चेन्नई एगमोर एक्सप्रेस साथ शेयरिंग होगा। अर्थात यात्रिओंका रैक शेयरिंग से कोई ताल्लुक नही रहता, यह केवल रेल परिचालन विभाग का रैक के तालमेल हेतु प्रयोजन है। यात्रिओंको तिरुवनंतपुरम से रामेश्वरम के बीच सीधी रेल सेवा उपलब्ध होने से मतलब है।

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11139/40 मुम्बई गदग एक्सप्रेस, 11305/06 सोलापुर गदग एक्सप्रेस प्रतिदिन गाड़ियोंके होसापेट्टे विस्तार को रेल बोर्ड की अनुमति

08 अगस्त 2023, मंगलवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, अष्टमी, विक्रम संवत 2080

मित्रों, सोलापुर, गदग और होसापेटे क्षेत्र के यात्रिओंकी लम्बी माँग को आखिरकार रेल प्रशासन ने अनुमति की हरी झंडी दिखा दी है।

11305/06 सोलापुर गदग सोलापुर प्रतिदिन एक्सप्रेस कुछ समय परिवर्तन हो कर गदग से आगे होसापेटे तक सेवा देने जल्द ही पहुंचने वाली है।

साथ ही 11139/40 मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज से गदग के बीच चलनेवाली प्रतिदिन एक्सप्रेस भी होसापेटे तक विस्तारित की जा रही है।

रेल बोर्ड ने इस विस्तार को अनुमति दे दी है और स्थानीय क्षेत्र, मण्डल को इस बदलाव को यथोचित समय पर लागू करने कहा है।

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भारतीय रेल में आम यात्री के लिए सुनहरा काल

07 अगस्त 2023, सोमवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, सप्तमी, विक्रम संवत 2080

भारतीय रेल! हमारे देश का नैशनल कैरियर! हम आम लोगोंके लिए किफायती, सुरक्षित यातायात का प्रमुख साधन। उपनगरीय यात्रिओंको जोड़े तो किसी पश्चिमी देशोंकी समूची लोकसंख्या गिन लीजिए, इतने यात्रिओंकी एक दिन की ढुलाई, हमारी भारतीय रेल में होती है। क्या देश की प्रचण्ड लोकसंख्या इसका कारण है या भारतीय रेल के अत्यंत किफायती किराए यात्रिओंको रेल यात्रा करने के लिए आकर्षित करते है?

किसी नतीज़े पर पहुंचने से पहले और चर्चाको आगे बढाते है। भारतीय रेल में उपनगरीय गाड़ियाँ छोड़, देश की लम्बी दूरी की रेल यात्राओंको समझते है। इन गाड़ियोंमे सबसे महंगा टिकट वातानुकूल प्रथम श्रेणी का है और सबसे सस्ता द्वितीय श्रेणी का। इसी दायरे में टिकट की तमाम श्रेणियाँ, विभिन्न प्रकार की प्रीमियम, राजधानी, शताब्दी, नवावतारित वन्देभारत, जनशताब्दी, सुपरफास्ट, मेल/एक्सप्रेस और मेमू एक्सप्रेस गाड़ियाँ सम्मिलित है। चूँकि सवारी गाड़ियाँ संक्रमण काल मे बन्द हुई तो फिर आजतक चली ही नही। नही तो ग़ैरउपनगरीय क्षेत्र की सबसे सस्ती द्वितीय श्रेणी टिकट का तमगा उससे न छीन पाता। घनघोर आश्चर्य की बात है, देश की सबसे लम्बी चलनेवाली कन्याकुमारी – डिब्रूगढ़ विवेक एक्सप्रेस जो 4153 किलोमीटर यात्रा करती है, उसके बाद दूसरे क्रमांक की तिरुवनंतपुरम – सिल्चर अरुनोई एक्सप्रेस जो 3915 किलोमीटर चलती है, जिनके एण्ड टु एण्ड यात्रा में चार – चार दिन लग जाते है, उनमें भी द्वितीय श्रेणी साधारण टिकट भारतीय रेल में उपलब्ध है। इन सब बातों के दौरान हमारी रेल यात्री के स्वर्णिम काल की बात तो पिछे रह गई, चलिए लौटते है,

हमारी रेल में 3 प्रकार के यात्री होते है, रोजाना यात्रा करनेवाले, जिनमे बहुतसे यात्री उपनगरीय गाड़ियोंमें यात्रा करते है और इनके पास मासिक/त्रिमासिक (MST/QST) टिकट होता है। दूसरे फ्रिक्वेंट ट्रेवलर अक्सर रेल यात्रा करने वाले यात्री। जो अमूमन महीने – दो महीने में रेल यात्रा करते है। तीसरे कभीकभार यात्रा करनेवाले पर्यटक या कारणवश यात्रा करनी पड़े ऐसे रेल यात्री। इन फ्रिक्वेंट ट्रैवलर या नियमित यात्रा करनेवाले लोगोंकी चर्चा में भारतीय रेल में आम यात्रिओंका स्वर्णिम काल, संक्रमण के बाद जो ‘केवल आरक्षित यात्री’ बन्धन में यात्री गाड़ियाँ चल रही थी, वह था। है न, आश्चर्यभरी बात!

इसके लिए हमें आजकल भारतीय रेल के 90 फीसदी गाड़ियोंमे जो धान्दली चल रही है, उसे समझना होगा। रेल गाड़ियोंकी संरचना मानकीकरण के नामपर द्वितीय श्रेणी साधारण कोचों की कटौती, यात्री सुविधाओं की निगरानी रखनेवाले TTE चल टिकट निरीक्षक की कमी, और स्लिपर क्लास के रद्द नही किये गए प्रतिक्षासूची वाले काउंटर टिकट धारी यात्री, कम अन्तर यात्रा करनेवाले नियमित मासिक पास धारक और अनारक्षित टिकट धारक यात्री तमाम लोग बड़ी बेदरकारी से आरक्षित स्लिपर कोच और वातानुकूल थ्री टियर में धड़ल्ले से घुस कर यात्रा करने वाले यात्री। आज की ताजा ख़बर है, हावडा – चेन्नई मेल के आरक्षित कोच के यात्रिओंने खड़गपुर स्टेशनपर कोच में घुसे अनारक्षित यात्रिओंको निकाल बाहर करने तक गाड़ी को रोके रखा। यह गाड़ी खड़गपुर स्टेशनपर 4 घण्टे खड़ी रही।

आज कल की रेल गाड़ियोंकी स्थिति

यह सारी धान्दली, संक्रमण काल मे और बाद के लगभग 1 वर्ष तक बिल्कुल बन्द थी। केवल अग्रिम आरक्षण प्राप्त यात्री ही स्टेशन के अहाते में आ सकते थे। साधारण टिकट पूर्णतः बन्द कर दिए गए थे। अनारक्षित यात्रिओंके लिए रेलवे स्टेशन और तमाम यात्री गाड़ियाँ बन्द थी। सारे द्वितीय साधारण कोच में 2S आरक्षित द्वितीय सिटिंग के भाँती बुकिंग्ज की जा रही थी। तमाम मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट गाड़ियोंमें जितनी बुकिंग बस उतने ही यात्री यह माहौल था। केवल आवश्यकता पड़नेपर ही यात्री टिकट आरक्षित कर रेल यात्रा के लिए स्टेशनोंपर पहुंच रहा था। इस काल को यह लोग आम यात्रिओंके लिए स्वर्णिम काल कह रहे है।

मित्रों, यहॉं आपको निश्चित ही हैरानी लग रही होगी, बन्धनोंमें रहकर रेल यात्रा स्वर्णिम काल कैसे हो सकती है? क्या आरक्षित कोच में अनारक्षित यात्रिओंका यात्रा न करना यह उस संक्रमण काल का ही नियम था, पूर्वचलित न था? क्या MST धारक की स्लिपर क्लास में यात्रा करने की अनुमति है? क्या काउंटर का छपा टिकट वेटिंग लिस्ट में रह जाये तो भी आरक्षित श्रेणी में यात्रा कर सकता है? नहीं ना? फिर अब क्यों यह लोग नियमोंको ताक पर रख धान्दली मचा रहे है? क्यों रेल के टिकट जाँच दल, रेल्वेके अधिकारी अनाधिकृत यात्रिओंको दण्डित नही करते है? संक्रमण काल मे जो यात्री अनाधिकृत थे वे अब भी अनाधिकृत ही है। बस, फर्क यह है, लोगोंको नियमोंको ताक पर रखने की आदतसी हो गयी है। रेल विभाग को अपने वर्षोँ चले ढर्रों पर कायम है। हजारों किलोमीटर की साधारण टिकटें जारी कर ही रही है। अब भी काऊंटर्स की प्रतिक्षासूची में रह जानेवाली टिकट को बिना टिकट मान कर दण्डित करने में लापरवाही बरती जा रही है।

अब रेल प्रशासन को अपने आदि-अनादि काल के नियमोंको बदलने का वक्त आ गया है। कोई यात्री गाड़ी 500 किलोमीटर से ज्यादा यात्रा करनेवाली है, उसे सम्पूर्ण आरक्षित गाड़ी कर चलाया जाना चाहिए। इसके साथ ही 500 किलोमीटर से कम अन्तर की इंटरसिटी गाड़ियाँ, 250 किलोमीटर से आसपास अन्तर चलनेवाली अनारक्षित डेमू/मेमू गाड़ियोंकी समुचित व्यवस्था करना चाहिए। मासिक पास, द्वितीय अनारक्षित टिकट केवल इंटरसिटी और कम अन्तर वाली डेमू/मेमू तक ही सीमित होना चाहिए। MST टिकट में सड़क पर लगनेवाले टोल नाकोंकी तरह दखल ली जाए। यह जो भी स्टेशन डेवलपमेंट योजनाओं के अंतर्गत स्टेशनोंपर आगमन, एन्ट्री पॉइंट पर भी यात्री टिकट, पास चेक हो और अधिकृत व्यक्ति ही रेल आहाते में आए। यह इतनी सी अपेक्षाओंकी पूर्तता होती है तो भारतीय रेल सदा के लिए अपने यात्रिओंके लिए स्वर्णिम काल लेकर आएगी।

Photo courtesy : http://www.indiarailinfo.com