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रेल प्रशासन हुवा मेहरबान, मध्यप्रदेश में 17 जोड़ी गाड़ियोंके स्टोपेजेस हुए पुनर्बहाल

14 अगस्त 2023, सोमवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, त्रयोदशी, विक्रम संवत 2080

आजकल कोई रेल सुविधा की बहाली या पुनर्बहाली होती है, तो उसे ‘कृपा’ बरसी है, समझा जाता है।

जिस तरह शून्याधारित समयसारणी के नाम पर रेल प्रशासन की ओर से, बेरहमीसे सैकड़ों, हजारों यात्री गाड़ियोंके नियमित स्टोपेजेस एक परिपत्रक निकाल, रद्द कर दिए थे, कई गाड़ियोंका अस्तित्व सदा के लिए मिटा दिया गया, ग़ैरउपनगरिय क्षेत्र की अनेकों यात्री गाड़ियोंमे ऐसे बदलाव हुए की कई नियमित, रोजाना अप डाउन करनेवाले रेल यात्री भौंचक रह गए। समयसारणी के अजीबोगरीब बदलावों के चलते अब उन्हें अपने नियमित रोजगारोंपर पहुंचने के लिए घर से दो दो, चार चार घण्टे पहलेही निकल जाना पड़ता है। जिस कार्यक्रम के नाम और उद्देश्य पर यह सब खेला हुवा है, वह “शून्याधारित समयसारणी” का न तो पूरा कार्यान्वयन दिख रहा न ही कोई उल्लेखनीय सफलता! रेल विभाग कोई महत्वाकांक्षी निर्णय तो ले लेता है, मगर जब उसे इस तरह मँझधार में लाकर खड़ा कर दिया जाता है तो उसकी हालत, न उगलते बन रहा है न ही निगलते बन रही ऐसी हो जाती है। गाड़ियाँ बन्द कर दी, स्टोपेजेस रद्द कर दिए मगर उसके बदले कम अन्तर की मेमू/डेमू चलवाने का जो प्रावधान था, उस दिशामे रेल विभाग चला ही नही, ठिठक रहा, ठोकरें खा रहा है। डेमू/मेमू गाड़ियोंजे के लिए प्रशासन के पास पर्याप्त रैक नही है और समुचित रखरखाव के डिपो नही है।

इस शून्याधारित समयसारणी के बहुत से परिपत्रक बीते 2-3 वर्ष में, सोशल मीडिया पर बड़ी धूम मचाते थे। फलानी गाड़ी बन्द, फलाँ स्टोपेजेस रद्द आम रेल यात्री बेचारा परेशान! क्या करता, देखते जा रहा था। उसे दिलासा दिया गया था, बदले में डेमू/मेमू गाड़ियाँ चलेंगी। उसकी रोजमर्रा की रेल यात्रा में कोई बाधा नही आएगी। गाड़ियाँ और स्टोपेजेस बन्द होने के बाद शुरू हुवा ऐसा लम्बा इंतज़ार, की खत्म ही नही हो रहा था। यात्रिओंने, उनके छोटे-बड़े असंगठित यात्री संगठनों गुटों ने रद्द स्टोपेजेस की पुनर्बहाली की माँग रखना शुरू कर दिया। साँसदोंके जरिये माँगे रेल प्रशासन तक पहुंचाने का दौर चल पड़ा। माँगोंका दबाव भारी पड़ता गया और स्टोपेजेस की पुनर्बहाली शुरू हुई। रेल प्रशासन ने अपनी शून्याधारित वाली कड़ी कार्रवाई पर “एक्सपेरिमेंटल हॉल्ट” का परदा किया और 6 – 6 की अवधी वाले अस्थायी स्टोपेजेस अब धीरे धीरे आगामी घोषणा किये जाने तक मे बदल स्थायी की दिशा में निकल पड़े है।

इसी कड़ी में, मध्यप्रदेश में जबलपुर मण्डल के पथारिया, रीठी, सलाइयाँ, सुमरेरी, तुरकी रोड, उन्छेरा भोपाल मण्डल के शाजापुर, कोटा मण्डल के श्री महावीरजी, विक्रमगढ़ आलोट और कापरेन इन स्टेशनोंपर मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंके स्टोपेजेस की बहाली की गई है।

12185/86 रानी कमलापति रीवा रानी कमलापति रेवांचल एक्सप्रेस, 18477/78 पुरी योगनगरी ऋषिकेश पुरी उत्कल एक्सप्रेस, 12911/12 इन्दौर हावडा इन्दौर क्षिप्रा एक्सप्रेस इनका पथारिया स्टेशन पर स्टोपेजेस

11271/72 इटारसी भोपाल इटारसी विंध्याचल एक्सप्रेस का रीठी और सलाइयाँ में स्टोपेज

18235/36 भोपाल बिलासपुर भोपाल एक्सप्रेस का सुमरेरी में स्टोपेज

11751/52 रेवा चिरमिरी रेवा एक्सप्रेस का तुरकी रोड और उन्छेरा में स्टोपेज

18247/48 बिलासपुर रेवा बिलासपुर एक्सप्रेस का तुरकी रोड पर स्टोपेज

11125/26 रतलाम ग्वालियर रतलाम एक्सप्रेस, 15045/46 गोरखपुर ओखा गोरखपुर एक्सप्रेस, 19167/68 अहमदाबाद वाराणसी सिटी अहमदाबाद साबरमती एक्सप्रेस, 22193/94 दौंड ग्वालियर दौंड एक्सप्रेस, 22195/96 झाँसी बान्द्रा झाँसी एक्सप्रेस इन गाड़ियोंका शाजापुर में स्टोपेज

19037/38 बान्द्रा बरौनी बान्द्रा अवध एक्सप्रेस एवं 20941/42 बान्द्रा गाज़ीपुर सिटी बान्द्रा एक्सप्रेस का श्री महावीरजी स्टेशनपर स्टोपेज

20813/14 पुरी जोधपुर पुरी एक्सप्रेस का विक्रमगढ़ आलोट पर स्टोपेज

19807/08 कोटा हिसार कोटा एक्सप्रेस का कापरेन स्टेशन पर स्टोपेज

गौरतलब यह है, स्टोपेजेस का आदेश रेल प्रशासन ने जारी कर दिया है और उसे कार्यान्वित करने का काम सबन्धित क्षेत्रीय विभाग और मण्डल जल्द ही करेंगे। उपरोक्त स्टोपेजेस की समयसारणी का अलग से परिपत्रक निकाला जाएगा।

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पूर्वतटिय रेलवे ECoR में मन्चेश्वर, भुबनेश्वर और हरीदासपुर में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कार्य हेतु ब्लॉक लिया जा रहा है। 85 जोड़ी यात्री गाड़ियाँ रद्द, 04 जोड़ी परावर्तित और 11 जोड़ी आँशिक रद्द!

13 अगस्त 2023, रविवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, द्वादशी/त्रयोदशी, विक्रम संवत 2080

यात्रीगण कृपया ध्यान दीजिए, पूर्वतटीय रेलवे में दिनांक 17 से 30 अगस्त भुबनेश्वर – मन्चेश्वर के बीच रेल तिहरीकरण का कार्य, मन्चेश्वर में यार्ड सुधार कार्य, भुबनेश्वर स्टेशन एवं यार्ड सिग्नलिंग उन्नयन, हरिदासपुर में दिनांक 14 से 21 अगस्त तक सिग्नल सिस्टम का उन्नयन कार्य, सम्बलपुर एवं सम्बलपुर सिटी के बीच रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर कार्य। इन कार्योंके चलते 85 जोड़ी यात्री गाड़ियोंको रद्द किया जा रहा है। 11 जोड़ी गाड़ियाँ आँशिक रद्द तो अन्य 04 जोड़ी गाड़ियाँ मार्ग परिवर्तन कर चलेंगी। विस्तृत परिपत्रक निम्नलिखित है,

85 जोड़ी रद्द यात्री गाड़ियोंकी सूची :-

11 जोड़ी गाड़ियाँ आँशिक रद्द की जानेवाली है, उसकी सूची :-

4 जोड़ी परावर्तित मार्ग से चलाई जानेवाली गाड़ियोंकी सूची :-

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दो नई गाड़ियाँ उद्धाटन की राह पर! उदयपुर – जयपुर वन्देभारत और नागपुर – जबलपुर, शहडोल एक्सप्रेस

12 अगस्त 2023, शनिवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, एकादशी, विक्रम संवत 2080

उदयपुर पहुंचा वन्देभारत का रैक

एक और वन्देभारत एक्सप्रेस चलने के लिए तैयार हो रही है। उदयपुर सिटी – जयपुर – उदयपुर सिटी। 8 कोच का रैक उदयपुर सिटी पहुंच चुका है और इसके ट्रायल रन्स का शेड्यूल भी सामने आ गया है। उदयपुर जयपुर के बीच परिपत्रक में ट्रायल्स, उदयपुर, मावली जंक्शन, चंदेरिया, भीलवाड़ा, अजमेर, किशनगढ़, जयपुर इस मार्ग से बताई गई है मगर खींचतान में कोटा, बूँदी मार्ग भी अपना जोर लगा रहा है।☺️ देखते है, अन्ततः परिचालन की घोषणा किस के पाले में जाएगी। गौरतलब चर्चा यह भी है, इस गाड़ी को भी इन्दौर – भोपाल वन्देभारत की तरह सड़क परिवहन की कड़ी चुनौती रहनेवाली है। वन्देभारत गाड़ियोंके तगड़े किराए और प्रीमियम स्टेटस, देश मे सभी क्षेत्रोंमें समान रूप में पचाये नही जा रहे। जहाँ उद्योग, व्यापार व्यवसाय निमित्त यात्राएं होती है, जैसे मुम्बई, अहमदाबाद, चेन्नई, बेंगलुरु वन्देभारत या पर्यटन यह प्रमुख कारण है जैसे वाराणसी, दिल्ली, कटरा, केरल की वन्देभारत गाड़ियोंको अच्छा यात्री भार मिला है। वहीं इन्दौर, भोपाल, जबलपुर, नागपुर, बिलासपुर जैसे शहरोंके बीच वन्देभारत को यात्री भार की कमी से गुजरना पड़ रहा है।

यह एक मेल/एक्सप्रेस श्रेणी की नई साप्ताहिक गाड़ी घोषित की गई है। नागपुर – जबलपुर, शहडोल के बीच। जिस तरह नागपुर से जबलपुर के बीच नियमित मार्ग इटारसी होकर ढेर गाड़ियाँ चल रही है, यह बिल्कुल आशा के अनुरूप अलग नए मार्ग सौंसर, छिंदवाड़ा, सेवनी, नैनपुर, जबलपुर होकर आगे कटनी होते हुए शहडोल ले जाई जा रही है। इसमे भी नागपुर, गोंदिया, बालाघाट होकर जबलपुर ले जाने की चर्चाए थी। मगर छिंदवाड़ा होकर चलना इस क्षेत्र की सम्पर्कता, रेल कनेक्टिविटी के लिए आवश्यक ही था। यह गाड़ी के फेरे साप्ताहिक से बढ़ते चले यह आशा है।

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वन्देभारत vs गरीबों की रेल

09 अगस्त 2023, बुधवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, नवमी, विक्रम संवत 2080

मित्रों, वैसे हम विशुद्ध रूप से, सिर्फ और सिर्फ रेल सम्बन्धी ख़बरोंसे जुड़े हुए है, हमारे ब्लॉग को किसी राजनीति से कोई लेनादेना नही। मगर दिनोंदिन एक बात हमारे मन मे कौंध रही है, नई और बहुचर्चित वन्देभारत एक्सप्रेस पर मीडिया, सोशल मीडिया में दी गयी विशेष तवज्जों और वह भी अलग नज़रिए वाली। जैसे की वन्देभारत एक्सप्रेस से मवेशी कटे, वन्देभारत लोको का चेहरा बिगड़ा, वन्देभारत एक्सप्रेस पर पत्थरबाजी, वन्देभारत एक्सप्रेस का फलाना नुकसान हुवा इत्यादि।

क्या यह, वन्देभारत vs गरीबों की रेल ऐसे नैरेटिव, रिवायत बनाने का एजेन्डा चलाया जा रहा है? क्या आज से पहले देश मे कभी कोई वातानुकूलित या प्रीमियम गाड़ी नही चलाई गई है? देश की पहली सम्पूर्ण वातानुकूलित नई दिल्ली हावडा राजधानी सन 1969 में चली थी और आज भारतीय रेल का गौरव है। वातानुकूलित कुर्सी यान वाली शताब्दी एक्सप्रेस 1988 से चलाई जा रही है। हालांकि यह गाड़ियाँ सर्वप्रथम चली तब भी देश में इनको कड़ी आलोचना का शिकार होना पड़ा। देश को ऐसी विलासपूर्ण, लग्जरी गाड़ियोंकी क्या जरूरत है, यह बोला जाता था मगर आज इन्ही गाड़ियोंका, देश की गतिमान, लोकप्रिय और भारतीय रेलवे की लाभदायक गाड़ियोंमे शुमार होता है।

वन्देभारत एक्सप्रेस ऐसी ही एक प्रीमियम, आधुनिक साजसज्जा, तकनीक वाली, देश को गौरवान्वित करनेवाली गाड़ी है। इसकी खूबियों के बारे में आप लोग इतनी बार पढ़ चुके होंगे के दोबारा से यहॉं गिनाने की कोई आवश्यकता हमें नही लगती। आज हम सिर्फ उस के लिए जो अलग व्यवहार, खबरें मीडिया में अग्रता से लाई जाती रही है, उस पर बात करेंगे।

क्या रेल पटरियों पर, रेल से टकरा कर आवारा मवेशियों के कटने की खबरें आम थी, अर्थात सुर्खियों में छपती थी? नहीं, मगर वन्देभारत के संदर्भ के कर यह खबर हेडलाइन्स में आती रही है। क्या पहले रेल पर पत्थरबाजी कभी नही हुई? होती थी और उनपर रेल प्रशासन की ओर से उपाय, उपचार और कड़ी कार्रवाई भी की गई है, मगर वन्देभारत पर यह खबरें सुर्खियों में छापी गयी। एक प्रवाद है, जिनके नाम होते है, उन्हें बड़ी आसानी से बदनाम भी किया जा सकता है, क्योंकि कौन, किस के बारे में, यह ज्यादा समझाना नही पड़ता। है ना?

कुछ वन्देभारत गाड़ियाँ खाली चल रही है। मीडिया इस मामले भी बड़ी सक्रियता से उन्हें असफल होने का तमगा लिये पीछे दौड़ रहा है। एक अभ्यास बताता है, किसी भी वन्देभारत का परिचालन खर्च, गाड़ी मात्र 30 प्रतिशत यात्रीभार से भी चले तो, निकलता है। गौरतलब यह है, देश भर के सारे जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र में वन्देभारत चले इसके लिए आग्रही थे और है। देशभर में अब तक 25 वन्देभारत गाड़ियाँ चली है और कुल 200 वन्देभारत गाड़ियाँ आने वाली है। 25 में से 2 या 3 गाड़ियाँ अपेक्षित यात्री भार से कम यात्रिओंका वहन कर रही है, तो क्या वन्देभारत एक्सप्रेस को असफ़ल करार दिया जा सकता है, कदापि नहीं।

मीडिया का दूसरा चहेता विषय है, गरीबों की गाड़ियाँ विरुद्ध वन्देभारत एक्सप्रेस। यह कैसी तुलना है? भारतीय रेल में द्वितीय श्रेणी से लेकर एग्जीक्यूटिव और वातानुकूल प्रथम तक विभिन्न टिकट श्रेणियाँ है। अनारक्षित डेमू/मेमू से लेकर सम्पूर्ण वातानुकूलित राजधानी एक्सप्रेस तक की विभिन्न गाड़ियोंके प्रकार यात्रिओंके लिए चलाये जाते है। ऐसे में कम उत्प्रन्न वाले यात्रिओंको वन्देभारत एक्सप्रेस कहाँ आड़े आती है?

शून्याधारित समयसारणी कार्यक्रम के अंतर्गत कुछ गाड़ियोंको बन्द करना तय किया गया था। यह भारतीय रेल का दूरदृष्टिता विकास कार्यक्रम था। पुराने पारम्परिक कोचेस को बदलकर नए गतिमान आधुनिक LHB कोच लाना, रेल के सम्पूर्ण विद्युतीकरण से लोको का शंटिंग कर बदलने की प्रक्रिया से परिचालन समय की बचत करना, देशभर की पटरियों को उच्च क्षमता में बदलकर उनका मजबूतीकरण करना, सिग्नलिंग यंत्रणाओंको आधुनिक बनाना, सेल्फ प्रोपल्ड लोको वाली ट्रेन सेट को चलाना, मालगाड़ियोंके लिए समर्पित गलियारों का निर्माण, अलग रेल नेटवर्क या रेल दोहरीकरण, तिहरीकरण कर अलग पटरी बनाना, रेलवे स्टेशनोंको आधुनिकता का नया जामा पहनाना ताकी यात्रिओंके आवागमन में गतिशीलता आये, उनका आवागमन सुविधाजनक हो ऐसी व्यवस्था करना यह सारा कार्य भारतीय रेल को आधुनिकता की ओर ले जाने की जद्दोजहद ही तो है, क्या यह भद्दे नैरेटिव चलाने वालोंकी समझ से परे है? शायद नही, मगर बहुत से आम लोग इससे बरगलाए जरूर जा सकते है।

मित्रों, यह बात सच है, देश का आम यात्री साधारण गाड़ियाँ, मेल/एक्सप्रेस में साधारण कोच की कामना रखता है। उसे इन वातानुकूलित प्रीमियम गाड़ियोंकी न ही चाहत है, न ही फिलहाल कोई आवश्यकता। मगर हर व्यवस्था को बेहतर और ज्यादा बेहतर करने का अपना वक्त, समय होता है। जिस तरह आज रेल आधुनिकीकरण का वक़्त चल रहा है, उन सेल्फ प्रोपल्ड डेमू/मेमू गाड़ियोंका का भी वक़्त आएगा और जरूर आएगा। अपनी मांगों, जरूरतों को संजोए रखिये। भारतीय रेल आपकी हर सुविधाओंका ख्याल रख रही है। रेल तिहरीकरण, चौपदरी करण, DFC समर्पित मालगाड़ियोंके कॉरिडोर, बुलेट ट्रेन, हाई स्पीड/सेमी हाई स्पीड कॉरिडोर बन रहे है। ऐसी स्थिति में नियमित रेल मार्गों से न सिर्फ मालगाड़ियां हटेंगी बल्कि प्रीमियम और नॉनस्टॉप गाड़ियाँ भी अलग नेटवर्क पर जा सकती है।

रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट यह प्रसव वेदना है। आनेवाला काल भारतीय रेल के लिए एक उज्वल, उषःकाल लाने वाला है। बस, हम और आप सब इसी का इंतज़ार करते है।

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11139/40 मुम्बई गदग एक्सप्रेस, 11305/06 सोलापुर गदग एक्सप्रेस प्रतिदिन गाड़ियोंके होसापेट्टे विस्तार को रेल बोर्ड की अनुमति

08 अगस्त 2023, मंगलवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, अष्टमी, विक्रम संवत 2080

मित्रों, सोलापुर, गदग और होसापेटे क्षेत्र के यात्रिओंकी लम्बी माँग को आखिरकार रेल प्रशासन ने अनुमति की हरी झंडी दिखा दी है।

11305/06 सोलापुर गदग सोलापुर प्रतिदिन एक्सप्रेस कुछ समय परिवर्तन हो कर गदग से आगे होसापेटे तक सेवा देने जल्द ही पहुंचने वाली है।

साथ ही 11139/40 मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज से गदग के बीच चलनेवाली प्रतिदिन एक्सप्रेस भी होसापेटे तक विस्तारित की जा रही है।

रेल बोर्ड ने इस विस्तार को अनुमति दे दी है और स्थानीय क्षेत्र, मण्डल को इस बदलाव को यथोचित समय पर लागू करने कहा है।