1 सितम्बर 2023, शुक्रवार, पूर्वभाद्रपद, कृष्ण पक्ष, द्वितिया, विक्रम संवत 2080
20836/35 पुरी राउरकेला पुरी वन्देभारत एक्सप्रेस सप्ताह में 6 दिन प्रत्येक शनिवार छोड़कर चलाई जाने का प्रस्ताव है।
20836 पुरी राउरकेला वन्देभारत प्रातः 5:00 बजे पुरी से प्रस्थान करेंगी और दोपहर 12:45 को राउरकेला पहुचेंगी। वापसीमे 20835 राउरकेला पुरी वन्देभारत एक्सप्रेस दोपहर 14:10 को राउरकेला से प्रस्थान करेंगी और रात 21:40 की पुरी पहुचेंगी। मार्ग में खुर्दा रोड, भुबनेश्वर, कटक, ढेनकनाल, अनुगुल, केरेजंगा, सम्बलपुर सिटी, झारसुगुड़ा स्टेशनोंपर ठहराव लेंगी।
चूँकि यह प्रस्तावित समयसारणी है, अंततः इसमे बदलाव भी लाये जा सकते है।
29 अगस्त 2023, मंगलवार, निज श्रावण, शुक्ल पक्ष, त्रयोदशी, विक्रम संवत 2080
मित्रों, कल दिनांक 28 सितम्बर को भुसावल मण्डल ने एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की। कल 12860 हावड़ा मुम्बई गीतांजलि एक्सप्रेस ने भुसावल मण्डल में 130 kmph की दौड़ लगाई। यूँ तो भुसावल मण्डल में 130 के गति से LHB रैक वाली गाड़ियाँ चलाने की अनुमति मिल गई थी, मगर यह कल से ही शुरू हुई है। अब सारी LHB रैक वाली गाड़ियाँ 130 kmph गति से मार्गक्रमण करेंगी।
कई सोशल मीडिया में 130 गति की गुणा गणित लगा कर भुसावल से 4 घण्टे में मुम्बई, 3 घण्टे में नागपुर, भोपाल, सूरत यह दिखाना शुरू हो जाएगा, मगर ऐसा नही होता। मित्रों, यह रेलवे ट्रैक है, कोई रोडवेज नही। यहाँ पर ट्रैक पर रेल गाड़ियोंकी कतारें लगी होती है और भला हो आधुनिक सिग्नल सिस्टम का, के स्लॉट्स 8-10 किलोमीटर से घट कर 2-3 किलोमीटर पर आ गया है। यदि गाड़ी को 130 kmph अर्थात अमूमन 2 किलोमीटर प्रति मिनट चलना है तो उसका रास्ता लम्बी दूरी तक साफ होना जरूरी है। इसी वजह से गाड़ियोंकी अधिकतम गति भले ही 130 kmph हुई हो, एवरेज गति लगभग पुरानी या उससे थोड़ी बेहतर ही रहेंगी। हाँ यह है, की अब गाड़ियाँ अपने शेडयूल को बेहतर रखने की भरकस कोशिश करेंगी, समयपर चलेंगी।
चलिए, हम हमारे विषयपर आते है। अब तक भुसावल मण्डल में मुम्बई – शिर्डी वन्देभारत इगतपुरी से मनमाड़, अंकाई तक चल रही है। ऐसे में हम हमारे क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से आग्रह करेंगे, क्यों न भुसावल – पुणे के बीच कल्याण होकर एक वन्देभारत चला दी जाए?
भुसावल – पुणे के बीच प्रतिदिन चलनेवाली हुतात्मा एक्सप्रेस जो स्थानीय यात्रिओंके बीच बेहद लोकप्रिय थी, स्थायी रूप से बन्द कर दी गयी है। इस गाड़ी में दो वातानुकूल चेयर कार हुवा करती थी, जो सदा ही फूल चलती थी। दूसरा यह गाड़ी कल्याण होकर चलती थी। इससे क्षेत्र के यात्रिओंको पुणे, पनवेल, मुम्बई (कल्याण) नासिक, मनमाड़ सभी स्टेशनोंकी कनेक्टिविटी मिल जाती थी। अतः इस बन्द गाड़ी के ऐवज में अब वन्देभारत प्रीमियम गाड़ी चलाने में कतई हर्ज नहीं। आगे हम देखते है, रेल प्रशासन प्रत्येक वन्देभारत शुरू करवाने हेतु कुछ तथ्य जाँचती है, उन पर चर्चा करते है।
वन्देभारत एक्सप्रेस यह सम्पूर्ण वातानुकूलित प्रीमियम रेल सेवा है। अतः रेल प्रशासन किसी क्षेत्र में इस गाड़ी को लॉन्च करने से पहले यह देखना चाहता है, स्थानीय यात्रिओंकी क्या जरूरतें है और वह किस तरह पूर्ण होती है। वन्देभारत जिन दो स्टेशनोंके बीच चलेगी, उन में से एक कमसे कम जिला मुख्यालय हो, उच्च शैक्षणिक संस्थानों से परिपूर्ण हो, बिजनेस हब हो या औद्योगिक इकाइयों से समृध्द हो। उक्त स्थानों के बीच सड़क, रेल एवं हवाई यातायात की स्थिति कैसी है, माँग और आपूर्ति की क्या व्यवस्था है यह भी जाना जाता है।
भुसावल शहर, जलगाँव जिला मुख्यालय से मात्र 25 किलोमीटर है। इसके अलावा भुसावल मण्डल में बुरहानपुर जिला 50 किलोमीटर, बुलढाणा जिला 100 किलोमीटर पड़ता है। भुसावल, जलगाँव क्षेत्र से पूरे देशभर में केला, इस फल का वितरण होता है। मार्ग के चालीसगांव जंक्शनसे धुलिया जिला जुड़ा है। नासिक यह बड़ा औद्योगिक हब और तीर्थ क्षेत्र भी भुसावल रेल मण्डल के अंतर्गत आता है। नासिक से पुणे के बीच फिलहाल कोई भी सीधा रेल सम्पर्क नही है, अपितु हजारों करोड़ रुपये की सेमी हाई स्पीड रेल परियोजना वर्षोँसे प्रलम्बित है, जिसे धरातल पर आने के लिए और लम्बा इंतज़ार करना होगा। भुसावल – कल्याण के बीच रेल सेवा तो बेहतर है मगर बसें, हवाई जहाज जो जलगाँव हवाई अड्डे से जुड़ती है न के बराबर है। भुसावल – जलगाँव क्षेत्र के बहुत से छात्र और कामगार वर्ग नासिक, मुम्बई और पुणे के लिए नियमित यात्रा करते है।
नियमित रेल गाड़ियाँ मुम्बई के लिये करीबन 8, 9 घंटे, पुणे के लिए करीबन 10 घण्टे का अवधि लेती है। वहीं बसेस को भी अमूमन 12 घंटे लग जाते है। बसों के किराए मुम्बई, पुणे के लिए, ₹ 1000 से 2000 के बीच है, तो जलगाँव से पुणे के बीच हवाई सेवा चली, जो की फिलहाल उपलब्ध नही है, तकरीबन किराए ₹3000 रह सकते है और शहर से शहर के बीच (एयर पोर्ट टु एयर पोर्ट नहीं) हवाई यात्रा का समय 4 से 6 घण्टे हो सकता है।
उपरोक्त स्थितियोंको देखते हुए, यह सहज है की भुसावल – पुणे वन्देभारत इन स्टोपेजेस के साथ चले, जलगाँव, पाचोरा, चालीसगांव, मनमाड़, लासलगांव (प्याज की अग्रगण्य मंडी), निफाड़ (अंगूर उत्पादन क्षेत्र) नासिक (बड़ा औद्योगिक शहर एवं तीर्थ क्षेत्र), इगतपुरी (भगवान बुद्ध तीर्थ), कल्याण मुम्बई कनेक्टिविटी हेतु (लोको रिवर्सल) कर्जत, लोनावला, चिंचवड़, शिवाजीनगर होकर पुणे पहुंचे। यह ज्यादा स्टोपेजेस वन्देभारत एक्सप्रेस गाड़ीका तकनीकी बलस्थान है। इस गाड़ी में तुरन्त पिकअप और इंस्टैंट कण्ट्रोल क्षमता है। साथ ही गाड़ी कण्ट्रोल के समय बिजली रिजनरेशन तकनिक मौजूद है।
इस गाड़ी की समयसारणी मध्य रेल की जो दिल्ली से मुम्बई के बीच राजधानी चलती है, उसके आगे या पीछे चलाई जा सकती है। सम्पूर्ण रेल मार्ग FEDL (फुल्ली इलेक्ट्रीफाइड डबल लाइन) है, 130 kmph गति के लिए अनुमति प्राप्त है। भुसावल से पुणे का पूर्ण सफर अमूमन 7 घंटे में पूरा कर सकती है। ऐसे में सुबह 6 बजे भुसावल से निकल 13 बजे पुणे पहुंचेगी और वापसी 14 बजे पुणे से निकल रात 22 बजे भुसावल लौट सकती है।
उपरोक्त समयसारणी के साथ यह वन्देभारत गाड़ी क्षेत्र में बेहद लोकप्रिय हो सकती है। आशा है, न सिर्फ जलगाँव क्षेत्र के अपितु धुळे, नासिक और पुणे क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी इस गाड़ी के लिए रेल प्रशासन से आग्रह करेंगे।
25 अगस्त 2023, शुक्रवार, निज श्रावण, शुक्ल पक्ष, नवमी, विक्रम संवत 2080
पश्चिम रेलवे के रतलाम मण्डल को वन्देभारत एक्सप्रेस मिलने जा रही है। हालाँकी यह अधिकृत परिपत्रक नही है, मगर इन्दौर – उधना वन्देभारत की यह समयसारणी चल रही चर्चाओंकी मजबूत पुष्टि करती है। आशा करते है, जल्द ही रेल प्रशासन द्वारा अधिकृत पत्रक गाड़ी क्रमांक सहित जारी किया जाएगा।
12 अगस्त 2023, शनिवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, एकादशी, विक्रम संवत 2080
उदयपुर पहुंचा वन्देभारत का रैक
एक और वन्देभारत एक्सप्रेस चलने के लिए तैयार हो रही है। उदयपुर सिटी – जयपुर – उदयपुर सिटी। 8 कोच का रैक उदयपुर सिटी पहुंच चुका है और इसके ट्रायल रन्स का शेड्यूल भी सामने आ गया है। उदयपुर जयपुर के बीच परिपत्रक में ट्रायल्स, उदयपुर, मावली जंक्शन, चंदेरिया, भीलवाड़ा, अजमेर, किशनगढ़, जयपुर इस मार्ग से बताई गई है मगर खींचतान में कोटा, बूँदी मार्ग भी अपना जोर लगा रहा है।☺️ देखते है, अन्ततः परिचालन की घोषणा किस के पाले में जाएगी। गौरतलब चर्चा यह भी है, इस गाड़ी को भी इन्दौर – भोपाल वन्देभारत की तरह सड़क परिवहन की कड़ी चुनौती रहनेवाली है। वन्देभारत गाड़ियोंके तगड़े किराए और प्रीमियम स्टेटस, देश मे सभी क्षेत्रोंमें समान रूप में पचाये नही जा रहे। जहाँ उद्योग, व्यापार व्यवसाय निमित्त यात्राएं होती है, जैसे मुम्बई, अहमदाबाद, चेन्नई, बेंगलुरु वन्देभारत या पर्यटन यह प्रमुख कारण है जैसे वाराणसी, दिल्ली, कटरा, केरल की वन्देभारत गाड़ियोंको अच्छा यात्री भार मिला है। वहीं इन्दौर, भोपाल, जबलपुर, नागपुर, बिलासपुर जैसे शहरोंके बीच वन्देभारत को यात्री भार की कमी से गुजरना पड़ रहा है।
यह एक मेल/एक्सप्रेस श्रेणी की नई साप्ताहिक गाड़ी घोषित की गई है। नागपुर – जबलपुर, शहडोल के बीच। जिस तरह नागपुर से जबलपुर के बीच नियमित मार्ग इटारसी होकर ढेर गाड़ियाँ चल रही है, यह बिल्कुल आशा के अनुरूप अलग नए मार्ग सौंसर, छिंदवाड़ा, सेवनी, नैनपुर, जबलपुर होकर आगे कटनी होते हुए शहडोल ले जाई जा रही है। इसमे भी नागपुर, गोंदिया, बालाघाट होकर जबलपुर ले जाने की चर्चाए थी। मगर छिंदवाड़ा होकर चलना इस क्षेत्र की सम्पर्कता, रेल कनेक्टिविटी के लिए आवश्यक ही था। यह गाड़ी के फेरे साप्ताहिक से बढ़ते चले यह आशा है।
09 अगस्त 2023, बुधवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, नवमी, विक्रम संवत 2080
मित्रों, वैसे हम विशुद्ध रूप से, सिर्फ और सिर्फ रेल सम्बन्धी ख़बरोंसे जुड़े हुए है, हमारे ब्लॉग को किसी राजनीति से कोई लेनादेना नही। मगर दिनोंदिन एक बात हमारे मन मे कौंध रही है, नई और बहुचर्चित वन्देभारत एक्सप्रेस पर मीडिया, सोशल मीडिया में दी गयी विशेष तवज्जों और वह भी अलग नज़रिए वाली। जैसे की वन्देभारत एक्सप्रेस से मवेशी कटे, वन्देभारत लोको का चेहरा बिगड़ा, वन्देभारत एक्सप्रेस पर पत्थरबाजी, वन्देभारत एक्सप्रेस का फलाना नुकसान हुवा इत्यादि।
क्या यह, वन्देभारत vs गरीबों की रेल ऐसे नैरेटिव, रिवायत बनाने का एजेन्डा चलाया जा रहा है? क्या आज से पहले देश मे कभी कोई वातानुकूलित या प्रीमियम गाड़ी नही चलाई गई है? देश की पहली सम्पूर्ण वातानुकूलित नई दिल्ली हावडा राजधानी सन 1969 में चली थी और आज भारतीय रेल का गौरव है। वातानुकूलित कुर्सी यान वाली शताब्दी एक्सप्रेस 1988 से चलाई जा रही है। हालांकि यह गाड़ियाँ सर्वप्रथम चली तब भी देश में इनको कड़ी आलोचना का शिकार होना पड़ा। देश को ऐसी विलासपूर्ण, लग्जरी गाड़ियोंकी क्या जरूरत है, यह बोला जाता था मगर आज इन्ही गाड़ियोंका, देश की गतिमान, लोकप्रिय और भारतीय रेलवे की लाभदायक गाड़ियोंमे शुमार होता है।
वन्देभारत एक्सप्रेस ऐसी ही एक प्रीमियम, आधुनिक साजसज्जा, तकनीक वाली, देश को गौरवान्वित करनेवाली गाड़ी है। इसकी खूबियों के बारे में आप लोग इतनी बार पढ़ चुके होंगे के दोबारा से यहॉं गिनाने की कोई आवश्यकता हमें नही लगती। आज हम सिर्फ उस के लिए जो अलग व्यवहार, खबरें मीडिया में अग्रता से लाई जाती रही है, उस पर बात करेंगे।
क्या रेल पटरियों पर, रेल से टकरा कर आवारा मवेशियों के कटने की खबरें आम थी, अर्थात सुर्खियों में छपती थी? नहीं, मगर वन्देभारत के संदर्भ के कर यह खबर हेडलाइन्स में आती रही है। क्या पहले रेल पर पत्थरबाजी कभी नही हुई? होती थी और उनपर रेल प्रशासन की ओर से उपाय, उपचार और कड़ी कार्रवाई भी की गई है, मगर वन्देभारत पर यह खबरें सुर्खियों में छापी गयी। एक प्रवाद है, जिनके नाम होते है, उन्हें बड़ी आसानी से बदनाम भी किया जा सकता है, क्योंकि कौन, किस के बारे में, यह ज्यादा समझाना नही पड़ता। है ना?
कुछ वन्देभारत गाड़ियाँ खाली चल रही है। मीडिया इस मामले भी बड़ी सक्रियता से उन्हें असफल होने का तमगा लिये पीछे दौड़ रहा है। एक अभ्यास बताता है, किसी भी वन्देभारत का परिचालन खर्च, गाड़ी मात्र 30 प्रतिशत यात्रीभार से भी चले तो, निकलता है। गौरतलब यह है, देश भर के सारे जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र में वन्देभारत चले इसके लिए आग्रही थे और है। देशभर में अब तक 25 वन्देभारत गाड़ियाँ चली है और कुल 200 वन्देभारत गाड़ियाँ आने वाली है। 25 में से 2 या 3 गाड़ियाँ अपेक्षित यात्री भार से कम यात्रिओंका वहन कर रही है, तो क्या वन्देभारत एक्सप्रेस को असफ़ल करार दिया जा सकता है, कदापि नहीं।
मीडिया का दूसरा चहेता विषय है, गरीबों की गाड़ियाँ विरुद्ध वन्देभारत एक्सप्रेस। यह कैसी तुलना है? भारतीय रेल में द्वितीय श्रेणी से लेकर एग्जीक्यूटिव और वातानुकूल प्रथम तक विभिन्न टिकट श्रेणियाँ है। अनारक्षित डेमू/मेमू से लेकर सम्पूर्ण वातानुकूलित राजधानी एक्सप्रेस तक की विभिन्न गाड़ियोंके प्रकार यात्रिओंके लिए चलाये जाते है। ऐसे में कम उत्प्रन्न वाले यात्रिओंको वन्देभारत एक्सप्रेस कहाँ आड़े आती है?
शून्याधारित समयसारणी कार्यक्रम के अंतर्गत कुछ गाड़ियोंको बन्द करना तय किया गया था। यह भारतीय रेल का दूरदृष्टिता विकास कार्यक्रम था। पुराने पारम्परिक कोचेस को बदलकर नए गतिमान आधुनिक LHB कोच लाना, रेल के सम्पूर्ण विद्युतीकरण से लोको का शंटिंग कर बदलने की प्रक्रिया से परिचालन समय की बचत करना, देशभर की पटरियों को उच्च क्षमता में बदलकर उनका मजबूतीकरण करना, सिग्नलिंग यंत्रणाओंको आधुनिक बनाना, सेल्फ प्रोपल्ड लोको वाली ट्रेन सेट को चलाना, मालगाड़ियोंके लिए समर्पित गलियारों का निर्माण, अलग रेल नेटवर्क या रेल दोहरीकरण, तिहरीकरण कर अलग पटरी बनाना, रेलवे स्टेशनोंको आधुनिकता का नया जामा पहनाना ताकी यात्रिओंके आवागमन में गतिशीलता आये, उनका आवागमन सुविधाजनक हो ऐसी व्यवस्था करना यह सारा कार्य भारतीय रेल को आधुनिकता की ओर ले जाने की जद्दोजहद ही तो है, क्या यह भद्दे नैरेटिव चलाने वालोंकी समझ से परे है? शायद नही, मगर बहुत से आम लोग इससे बरगलाए जरूर जा सकते है।
मित्रों, यह बात सच है, देश का आम यात्री साधारण गाड़ियाँ, मेल/एक्सप्रेस में साधारण कोच की कामना रखता है। उसे इन वातानुकूलित प्रीमियम गाड़ियोंकी न ही चाहत है, न ही फिलहाल कोई आवश्यकता। मगर हर व्यवस्था को बेहतर और ज्यादा बेहतर करने का अपना वक्त, समय होता है। जिस तरह आज रेल आधुनिकीकरण का वक़्त चल रहा है, उन सेल्फ प्रोपल्ड डेमू/मेमू गाड़ियोंका का भी वक़्त आएगा और जरूर आएगा। अपनी मांगों, जरूरतों को संजोए रखिये। भारतीय रेल आपकी हर सुविधाओंका ख्याल रख रही है। रेल तिहरीकरण, चौपदरी करण, DFC समर्पित मालगाड़ियोंके कॉरिडोर, बुलेट ट्रेन, हाई स्पीड/सेमी हाई स्पीड कॉरिडोर बन रहे है। ऐसी स्थिति में नियमित रेल मार्गों से न सिर्फ मालगाड़ियां हटेंगी बल्कि प्रीमियम और नॉनस्टॉप गाड़ियाँ भी अलग नेटवर्क पर जा सकती है।
रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट यह प्रसव वेदना है। आनेवाला काल भारतीय रेल के लिए एक उज्वल, उषःकाल लाने वाला है। बस, हम और आप सब इसी का इंतज़ार करते है।