26 नवम्बर 2023, रविवार, कार्तिक, शुक्ल पक्ष, चतुर्दशी, विक्रम संवत 2080
मित्रों, भारतीय रेल, हमारे देश की नैशनल कैरियर अर्थात देश का परिवहन। यात्रिओंका मुख्यतः सस्ता, सुगम और सुरक्षित यातायात साधन। भारतीय रेल न सिर्फ देश की करोड़ों की आबादी में, लाखों यात्रिओंको एक ही दिन में ढोती है अपितु कई टनेज में मालवहन भी करती है। इसके अलावा एक बड़ा बोझ भारतीय रेलवे पर है, राजकीय महत्वकांक्षाएं। चूँकि हमारे देश मे रेल यह सार्वजनिक यातायात का साधन है और इसका परिचालन देश की सरकार के जिम्मे होता है, तमाम यात्रिओंकी जो अपेक्षाएं देश के सरकारोंसे होती है, उसी तरह इसके प्रति भी हो गई है। गति तीव्रतम, आरामदायक, साफसुथरी आसनव्यवस्था और सबसे बड़ी अपेक्षा किरायों में सस्ती, ज्यादातर रियायती 😊 दूसरी तरफ कोई यात्री सेवा शुरू होती है तो अलग ही राजकीय उपलब्धि जताई जाती है।
आज ट्विटर पर भारतीय रेल की कमाई के बारे में एक अभ्यासपूर्ण पोस्ट, अपने ग्राफिक्स के साथ दिखी तो उसी के आधारपर कुछ विचार यहाँ प्रगट कर रहा हूँ। उपरोक्त ट्विटर अकाउंट श्री अंशुल गुप्ता जी का है, (@anshgupta64 ट्विटर अकाउंट से साभार)
FY23 में भारतीय रेलवे का राजस्व ₹2.4 लाख करोड़ था! लाभ के मामले में, पूर्वी तटीय रेलवे ECoR भारत में सबसे अधिक लाभार्जन करने वाला रेलवे नेटवर्क था।
आइये समझते हैं रेलवे कैसे कमाती है?
निम्नलिखित ग्राफ़िक में भारतीय रेल के 16 क्षेत्रीय विभाग के आय के आँकड़े दर्ज है।

देश के प्रमुख महानगरों, मुम्बई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और देश को राजस्व में अग्रसर रखने वाले राज्य महाराष्ट्र, गुजरात तामिलनाडु रेल विभाग ने घाटे में दिखाए है। दरअसल भारतीय रेलवे अपने राजस्व के लिए माल के परिवहन पर बहुत अधिक निर्भर है। उपरोक्त ग्राफ़िक में अयस्क और कोयला ढोने वाले क्षेत्र नफे में दिख रहे है।
इस हरे फायदा कमानेवाले क्षेत्र की सच्चाई कुछ इस तरह है।
रेलवे 1 किमी की यात्रा करने वाले प्रति टन माल से 1.84 रुपए कमाता है, जबकि 1 किमी की यात्रा करने वाले प्रति यात्री का किराया 0.64 रुपए है।
यात्री राजस्व अर्जन के मामले में, रेल विभाग का अधिकांश राजस्व वातानुकूल 3 टियर और द्वितीय श्रेणी साधारण वर्ग से आता है। जबकि 87% रेल यात्री द्वितीय श्रेणी में यात्रा करते हैं, वे यात्री राजस्व में केवल 32% योगदान करते हैं। औसतन, रेलवे द्वितीय श्रेणी में यात्रा करने वाले प्रति यात्री से ₹35 कमाता है।


जब टिकट बुकिंग से कमाई की बात आती है,
टिकट का मूल्य रेलवे द्वारा लिया जाता है और आईआरसीटीसी जो की रेलवे की उपकम्पनी है, केवल सुविधा शुल्क से कमाई करता है। इसके अलावा आईआरसीटीसी के कमाई में रेलवे भी अपना हिस्सा कमाती है:
- रेलनीर पैकेज्ड बोतलबन्द पीने का पानी से मुनाफे का 15%
- आईआरसीटीसी द्वारा अर्जित कैटरिंग लाइसेंस फीस का 40%


कुल मिलाकर निष्कर्ष यह है, रेल विभाग कमाता मालभाड़े से और लगाता यात्री गाड़ियोंमें है। यात्रिओंके लिए उपयुक्त आवागमन सुविधाए जिसमे प्लेटफार्म, शेड, आसन व्यवस्था, ऊपरी पैदल पुल, एस्कलेटर, लिफ्ट, प्रतिक्षालय, टिकट बुकिंग काउंटर्स इत्यादि,यात्री सुरक्षा एवं सुव्यवस्था के लिए रेल कर्मी जैसे रेल सुरक्षा बल, विविध वाणिज्यिक रेल कर्मी। वहीं माल लदान के लिए ज्यादा व्यवस्था, लागत नही लगती।
इसके बावजूद आज सर्वसाधारण रेल यात्री रेल विभाग से संतुष्ट नहीं है। रेल यात्रिओंकी अपेक्षाएं, आशाएं उनके ज्यादातर यात्रा करनेवाले द्वितीय श्रेणी या ग़ैरवातानुकूल स्लिपर वर्ग से है और वही वर्ग के कोच रेल विभाग नियमित मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंसे लगातर कम करते जा रहा है।
रेल विभाग का दृष्टिकोण अपने मजबूत कमाउँ पक्ष, मालभाडे से अर्जन बढाना है, मगर जो नियमित यात्री गाड़ियोंसे यात्रा करनेवाले द्वितीय श्रेणी के 87% यात्री जिनके लिए उनके पास कोई ठोस उपाय योजना दिखाई नही दे रही। एक तरफ रेल मन्त्री आश्वासित करते पाए जाते है, आनेवाले 5-7 वर्षोंमें रेल विभाग से प्रतिक्षासूची हटा देंगे, कैसे? कैसे हो पाएगा यह, क्या प्रतिक्षासूची टिकट बन्द कर के या सभी यात्री गाड़ियोंको सम्पूर्ण अनारक्षित कर के? यह उपाय ही उनके बयान के सापेक्ष दिखाई पड़ते है। अन्यथा समुचित गाड़ी संख्या बढाने के लिए भारतीय रेल का इन्फ्रास्ट्रक्चर चार छह वर्ष में तैयार होना सम्भव नही है। आज भी कई जंक्शन स्टेशन्स ऐसे है, गाड़ियाँ घण्टो प्लेटफार्म उपलब्धि के इंतजार में आउटर्स पर खड़ी रहती है। गंतव्य से अपनी वापसी यात्रा आरम्भ करने हेतु रखरखाव के लिए 6-8 घण्टे प्रतीक्षा करती पाई जाती है।
समस्या बहुत बिकट है और उपाय इतने साधारण नही है। मगर आशाओंके किरण जगे है, रेल में इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की भूख जगी है। जगह जगह पर रेल दोहरीकरण, तिहरीकरण, चौपदरी करण चल रहा है। मालभाड़ा समर्पित रेल गलियारा पूर्णत्व की ओर है। नए प्लेटफार्म, नए टर्मिनल्स बनाए जा रहे है। बस, यह सारी क़वायद चलती रहे। देर से सही मगर एक न एक दिन यह बुनियादी सुविधाओं से हम रेल नेटवर्क पर ज्यादा यात्री गाड़ियाँ, मालगाड़ीयाँ देख पाएंगे।


