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वन्देभारत एक्सप्रेस लुभाती तो है, मगर कमबख़्त जेब है की बैठने नही देती।

28 जून 2023, बुधवार, आषाढ, शुक्ल पक्ष, दशमी, विक्रम संवत 2080

देश भर में, भारतीय रेल पर वन्देभारत प्रीमियम गाड़ी के 24 रैक के जरिए 46 सेवाएं चल पड़ी है।

सोलह कोच की वन्देभारत एक्सप्रेस जब किसी मार्ग पर नही भरा रही थी तो रेल प्रशासन ने अपनी तिकड़म जोड़कर उसे आधी याने आठ कोच की कर बुकिंग्ज में प्रतिक्षासूची हाज़िर करवा दी और उसे ‘फुल्ली सक्सेसफुल’ की श्रेणी में ला कर रख दिया। अब बताइए, जब आठ कोच की गाड़ी भी न भरा पाए तो…? कुछ इस तरह की अवस्था वन्देभारत एक्सप्रेस के बिलासपुर – नागपुर की है, और एकदम ताज़ा इन्दौर – भोपाल की भी बन सकती है।

देखिए, राजनीति को परे रख हकीकत समझते है। मैसूरु – चेन्नई वन्देभारत चलती है, जिसके मैसूरु – बेंगलुरु खण्ड पर गाड़ी बिल्कुल निम्नतम यात्री भार में चल रही है। क्षेत्र के यातायात जानकारोंने इसका पूरा लेखाजोखा सामने रखा,

मैसूरु – बेंगलुरु वन्देभारत का किराया एवं यात्रा अवधि, एक तुलनात्मक अभ्यास। यहाँपर आम यात्री और निम्नतम श्रेणी की यात्रा को मद्देनजर रख तथ्य रखने का प्रयास है।

वन्देभारत एक्सप्रेस AC CC- ₹515/-
(2 Hrs), शताब्दी एक्सप्रेस AC CC- ₹315/- (2.10 Hrs), राज्य रानी एक्सप्रेस 2S- ₹95/-
(2.30 Hrs)

कर्नाटक में विद्यमान प्रशासन ने महिला यात्री की बस यात्रा मुफ़्त की है, अतः परिवार की औसत यात्रा खर्च यदि सड़क मार्ग से हो तो खर्च और भी कम लगेगा।

अब इन्दौर भोपाल के बीच तथ्य समझते है,

वन्देभारत एक्सप्रेस AC CC- ₹810/- (इसमे खानपान के ₹142/- ऐच्छिक* सम्मिलित है)
(3.05 Hrs), इन्टरसिटी एक्सप्रेस AC CC- ₹365/- (4.20 Hrs), इन्टरसिटी एक्सप्रेस 2S- ₹100/-

और सड़क परिवहन की सोचें तो ₹330/- प्रति सीट और यात्रा अवधि 3 घण्टे 20 मिनट

अब आम आदमी, लाख सोच लें, वन्देभारत में यात्रा करने का, किस तरह कर पायेगा?

एक अभ्यास यह भी कहता है,
वन्देभारत एक्सप्रेस इन्ही प्रीमियम किरायों में चलती रही और केवल 30% यात्री भार से ही चली तो भी घाटे में नहीं रहती। आगे रेल तकनीशियन का मानना है, 16 कोच से 8 कोच की वन्देभारत करना यह रेल परिचालन विभाग की अवहेलना करने जैसा है। चूँकि रेल प्रशासन एक कोच चलाये या पूर्ण रैक मार्ग को तो अवरुद्ध होना ही है, फिर संरचना में कमी क्यों?

इस तरह अलग अलग विचार फिलहाल वन्देभारत एक्सप्रेस पर आ रहे है। गौरतलब यह है, देशभर में 400 वन्देभारत एक्सप्रेस चलाने की तैयारी है। (एक सांख्यिकी विचार, 200 फेरों का भी हो सकती है) वन्देभारत एक्सप्रेस को देश के भविष्य की रेल इस नज़रिए से भी देखा जा रहा है। जब वन्दे मिनी, वन्दे मेट्रो, वन्दे स्लिपर इस तरह के अलग अलग संस्करण पटरियोंपर उतरेंगे तब आम यात्रिओंके रुझान वन्देभारत के लिए किस तरह होंगे यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा मगर फिलहाल तो अंगूर खट्टे लग रहे है।

4 thoughts on “वन्देभारत एक्सप्रेस लुभाती तो है, मगर कमबख़्त जेब है की बैठने नही देती।”

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