Uncategorised

नई गाड़ियाँ : वेरावळ – बनारस, वड़ोदरा – दाहोद, रांची – न्यू गिरिडीह,

8 सितम्बर 2023, शुक्रवार, भाद्रपद, कृष्ण पक्ष, नवमी, विक्रम संवत 2080

1: वेरावळ – बनारस – वेरावळ साप्ताहिक एक्सप्रेस

यह गाड़ी 24 ICF कोच से सुसज्जित रहेगी। गाड़ी अहमदाबाद, छायापुरी, रतलाम, नागदा, कोटा, बयाना, आग्रा फोर्ट, टूण्डला, गोविंदपुरी, प्रयागराज, ज्ञानपुर रोड होकर बनारस पहुचेंगी।

यह उद्धाटन विशेष गाड़ी है जो दिनांक 11 सितम्बर को चलेगी और उसका गाड़ी क्रमांक 02945 यह रहेगा।

12945/46 वेरावळ – बनारस – वेरावळ साप्ताहिक के नियमित फेरोंका विवरण

12946 बनारस वेरावळ साप्ताहिक एक्सप्रेस दिनांक 13 सितम्बर से प्रत्येक बुधवार को प्रातः 7:30 को बनारस से रवाना होकर गुरुवार शाम 19:00 को वेरावळ पहुचेंगी। 12945 वेरावळ बनारस साप्ताहिक एक्सप्रेस दिनांक 18 सितम्बर से प्रत्येक सोमवार को वेरावळ से प्रातः 4:15 को रवाना होगी और मंगलवार दोपहर 14:35 को बनारस पहुचेंगी। वापसीमे

2: वड़ोदरा – दाहोद – वड़ोदरा डेली मेमू

वड़ोदरा – दाहोद के बीच एक प्रतिदिन मेमू चलाने की रेल प्रशासन से अनुमति मांगी गई है, और आशा है, जल्द ही प्रस्ताव को स्वीकृति मिल जाएगी।

3: रांची – न्यू गिरिडीह – रांची डेली एक्सप्रेस

18617/18 राँची न्यू गिरिडीह राँची इंटरसिटी एक्सप्रेस का दिनांक 12 सितम्बर को उद्धाटन किया जाएगा और दिनांक 13 सितम्बर से यह गाड़ी निम्नलिखित समयसारणी से चलाई जायेगी।

Uncategorised

यात्रीगण कृपया ध्यान दें, द म रेल SCR के शिरपुर कागज़ नगर स्टेशन पर रेल तिहरीकरण हेतु रेल ब्लॉक रहेगा। 11 से 26 सितंबर के बीच अनेक गाड़ियाँ रद्द/आँशिक रद्द/ मार्ग परिवर्तन और नियंत्रित कर चलाई जाएगी।

7 सितम्बर 2023, गुरुवार, भाद्रपद, कृष्ण पक्ष, अष्टमी, विक्रम संवत 2080

रेल प्रशासन का रेल ब्लॉक अवधि :

1: अपने प्रारम्भिक स्टेशन से सम्पूर्णतः रद्द की गई 34 गाड़ियाँ :

2: आँशिक रूप से रद्द की गई 3 जोड़ी गाड़ियाँ :

17011/12 हैदराबाद शिरपुर कागजनगर हैदराबाद इंटरसिटी एक्सप्रेस बेलमपल्ली से शिरपुर कागजनगर दिनांक 10 से 27 सितंबर के बीच रद्द रहेगी।

17233/34 सिकन्दराबाद शिरपुर कागजनगर सिकन्दराबाद भाग्यनगर एक्सप्रेस बेलमपल्ली से शिरपुर कागजनगर दिनांक 10 से 28 सितंबर के बीच रद्द रहेगी।

12757/58 सिकन्दराबाद शिरपुर कागजनगर सिकन्दराबाद एक्सप्रेस काजीपेट से शिरपुर कागजनगर दिनांक 10 से 27 सितंबर के बीच रद्द रहेगी।

3: मार्ग परिवर्तन : निम्नलिखित 7 गाड़ियाँ निजामाबाद, मुदखेड़, पिम्पलकुट्टी, माजरी, नागपुर होकर चलाई जाएगी।

चार्ट की रचना इस प्रकार है, अनुक्रमांक, गाड़ी क्रमांक, गाड़ी का नाम, प्रारम्भिक स्टेशन से प्रस्थान करने की तिथि, प्रारम्भिक स्टेशन से प्रस्थान करने का दिन, नियमित मार्ग, परावर्तित मार्ग, परावर्तित मार्ग से चलने पर, स्किप होने वाले नियमित स्टोपेजेस

यात्रीगण से निवेदन है, परावर्तित गाड़ियोंमे बदले हुए मार्ग और नियमित मार्ग का फर्क, स्किप्ड स्टेशन, यात्रा को लगनेवाला अतिरिक्त समय और उस वजह से यात्रा को लगने वाली देरी इत्यादि बातोंको ध्यान में रखते हुए ही नियोजन करे।

निम्नलिखित परावर्तित गाड़ियोंमे केवल 22647 कोरबा कोचुवेली एक्सप्रेस JCO 09/9/23 और 22815 बिलासपुर एर्नाकुलम एक्सप्रेस JCO 25/9/23 यह दो ही गाड़ियाँ है।

मार्ग परिवर्तन : निम्नलिखित 9 गाड़ियाँ विजयवाड़ा, दुव्वाड़ा, सिम्हाचलम, रायागड़ा, टिटलागढ़, रायपुर, गोंदिया, नागपुर होकर चलाई जाएगी।

मार्ग परिवर्तन : निम्नलिखित 7 गाड़ियाँ गुंटकल, वाड़ी, दौंड, मनमाड़, भुसावल, इटारसी होकर चलाई जाएगी।

मार्ग परिवर्तन : निम्नलिखित 10 गाड़ियाँ पेड़ापल्ली, निजामाबाद, पूर्णा, अकोला होकर चलाई जाएगी।

मार्ग परिवर्तन : निम्नलिखित 3 गाड़ियाँ पेड़ापल्ली, निजामाबाद, पूर्णा, अंकाई होकर चलाई जाएगी।

प्रारम्भिक स्टेशन से नियमित प्रस्थान का समय बदलकर चलनेवाली गाड़ियाँ :

चार्ट की रचना इस प्रकार है, अनुक्रमांक, गाड़ी क्रमांक, गाड़ी कहाँ से कहाँ तक चलती है, उसका विवरण, प्रारम्भिक स्टेशन से प्रस्थान करने की तिथि, निर्धारित समय से कितनी देरी से चलेंगी उसका विवरण

निम्नलिखित तिथियोंपर 33 डाउन ट्रेन्स और 14 अप ट्रेन्स शिरपुर कागज़ नगर स्टेशन पर नही आएंगी।

Uncategorised

ZBTT, शून्याधारित समयसारणी : हिचकोले खाती, रेल विभाग की एक अच्छी संकल्पना !

6 सितम्बर 2023, बुधवार, भाद्रपद, कृष्ण पक्ष, सप्तमी, विक्रम संवत 2080

ZBTT ज़ीरो बेस्ड टाइम टेबल अर्थात शून्याधारित समयसारणी इस तरह की संकल्पना भारतीय रेल ने 3-4 वर्ष पहले कार्यान्वित की थी। योजना मुम्बई आई आई टी के सहयोग से बनाई गई थी। ZBTT के तहत भारतीय रेल की प्रमुख संकल्पना यह थी, की सारी यात्री गाड़ियोंको शून्य कर एक एक गाड़ियोंको उनकी प्रमुखता, प्राधन्यता के मूल्य पर समयसारणी में रचा जाए।

इस शून्याधारित समयसारणी की आवश्यकता क्यों आन पड़ी थी, इसके लिए हमे और थोड़ा पीछे की ओर जाना पड़ेगा। हमारे देश मे रेल, ब्रिटिश राज की देन है। ब्रिटिशों ने देशभर से कच्चा माल, अयस्क, कृषि उत्पाद की यातायात करने और सेना की आवाजाही के लिए रेल बिछाने की पहल की थी। उद्देश्य सरल था, माल यातायात! और रेल लाइनोंकी सीधी संकल्पना थी, मेन लाइन और ब्रांच लाइन। मुख्य मार्ग की गाड़ियाँ लम्बी दूरी की सीधी चलने वाली गाड़ियाँ होती थी जो केवल जंक्शन स्टेशन, जिला मुख्यालय या छावनी स्टेशन्स पर रुकती थी। ब्रांच लाइन याने उप रेल मार्ग, जो दो अलग अलग मेन लाइन के जंक्शनों को जोड़नेवाली लाइन होती थी, और यहॉं की गाड़ियाँ उक्त जंक्शन स्टेशन के बीच चलती थी, जो अक्सर मेन लाइन्स अर्थात मुख्य मार्ग पर यात्रा नही करती थी। इस तरह के संकल्पना के साथ रेल परिचालन एक परिधी में चल रहा था। भारतीय रेल बनने के बाद याने स्वतंत्रता के बाद भी यही दौर चलता रहा।

देश की राजनीति भी एकल निर्धारण में ही चल रही थी अतः फेरफार, दखलंदाजी विशेषतः नही होती थी। फिर आया छोटे छोटे प्रान्त स्तर की पार्टियोंका दौर। 8, 10, 15 राजनीतिक पार्टियाँ मिलकर देश की बागडोर संभालने लगी। तुष्टिकरण का दौर चल निकला। जिस प्रदेश के रेल मन्त्री, उस प्रदेश को भर भरा कर यात्री गाड़ियाँ। और तो और, जो रेल गाड़ियोंकी मेन/ब्रांच लाइन की संकल्पना थी उसे दरकिनार कर दिया गया। यात्री गाड़ियाँ ब्रांच लाइन के स्टेशनोंसे निकल मेन लाइन पर आती, फिर किसी ब्रांच लाइन के स्टेशन पर जाकर खत्म होती। जंक्शन स्टेशनोंका कोई औचित्य ही नही रहा। इस तरह की यात्री गाड़ियाँ चलना बिल्कुल आम बात हो गयी। इससे मेन लाइन/ ब्रांच लाइन और उसकी गाड़ियाँ, उनकी प्राथमिकता यह सब का भी कोई महत्व न रहा।

वर्षों तक केवल एक रेल कोच फैक्ट्री इंटेग्रल कोच फैक्ट्री पेरंबूर चेन्नई में ही रेल यात्री कोच का उत्पादन होते रहा। वहीं लोको निर्मितीके लिए चित्तरंजन और बनारस यही कारखाने थे। वर्षोँसे बना उतना ही रेल नेटवर्क, उतनी ही रेल पटरियां, उतने ही रेल्वे स्टेशन, वही सिग्नल प्रणाली और उसी पर प्रत्येक रेल बजट में अलग अलग प्रांतोको संतुष्ट करने के लिए चलाई जानेवाली नई गाड़ियों फेहरिस्त, विस्तारो और स्टोपेजेसकी घोषणाएं, रैक और स्लॉट्स उपलब्ध नही है तो साप्ताहिक गाड़ियाँ चलवा दी जाती। ब्रांच से मेन और मेन से ब्रांच लाइनोंपर गाड़ियाँ कुदाई जा रही थी। नई गाड़ियाँ, सीमित स्लॉट्स में मालगाड़ियोंके यातायात पर अतिक्रमण कर चलाना मजबूरी हो गयी थी। जबकी सारे अर्थशास्त्री तक, यह बात भलीभाँति जानते थे, मालगाड़ियोंके बलबूते ही रेल यातायात खड़ी है, चल रही है।

इन सारी हेराफेरी और गाड़ियोंको स्लॉट्स में जबरन घुसाकर चलाने की वजह से न ही माल यातायात ढंग से चल रही थी, न ही प्रमुख गाड़ियोंका व्यवस्थित नियोजन हो पा रहा था और ना ही रेल अनुरक्षण के लिए स्थायी समय मिल रहा था। इधर रेल विभाग लगातार अपनी व्यवस्था, चल स्टॉक को मजबूत करने के लिए आक्रोशित था। कोच और लोको उत्पाद के लिए और इकाइयाँ शुरू करवाई गई। नए अत्याधुनिक तेज गति से चलने में सक्षम LHB कोच का उत्पादन देश मे शुरू हो गया। सिग्नल प्रणाली में आधुनिकता लाई गई। उधर ब्रांच लाइनों में यूनिगेज अर्थात छोटे मीटर गेज, नैरो गेज का रूपांतरण BG बड़ी लाइन में करने का कार्य शुरू किया गया। मगर इससे यात्री गाड़ियोंकी समयसारणी और भी ज्यादा तकलीफ़देह होती जा रही थी। इसका केवल अब एक ही उपाय था, यात्री गाड़ियोंकी समयसारणी की पुनर्रचना और यही है ZBTT या शून्याधारित समयसारणी कार्यक्रम।

अलग अलग क्षेत्रीय रेल्वेज़ को अपने क्षेत्र में रेल अनुरक्षण समय निर्धारित करने कहा गया। उन्हें, उस समय के स्लॉट्स के बीच में आने वाली गाड़ियाँ रद्द करने के लिए नामित करना था। गाड़ियोंकी औसत गति बढ़े इसके लिए छोटे स्टेशन के स्टोपेजेस रद्द किए जाने थे। उसके लिए प्रत्येक स्टोपेजेस के लिए रेल विभाग का अपेक्षित व्यय और उसके ऐवज में उक्त स्टेशन से मिलनेवाली आय इसके आँकड़े जांच कर उनपर स्टोपेजेस रद्द या जारी रखना, इस बात की मुहर लगनी थी। यह एक बहुत बड़ी और देशव्यापी कवायद होनेवाली थी। संक्रमण काल की आपत्ति को इस कवायद के लिए अवसर में बदला जा सकता था। सारी यात्री गाड़ियाँ लगभग 2 महीने बन्द थी और उसके बाद वर्ष भर तक भी गाड़ियोंके फेरे सीमित मात्रा में ही चल रहे थे।

मगर…

मगर हुवा वही जो नही होना चाहिए था। रेल विभाग के पास यह नियोजन तो था, की फलाँ गाड़ी बन्द करनी है, फलाँ स्टोपेजेस रद्द करने है, गाड़ियोंकी समयसारणी आमूलचूल बदलनी है, मगर उसके ऐवज में जो स्लॉट्स खाली हुए थे, उनको अस्थायी रूप से ही क्यों न हो, कुछ इंटरसिटी या कम दूरी की डेमू, मेमू गाड़ियाँ चलवा देते तो जो असंतोष स्थानीय यात्रिओंके मन मे पनपा वह न होता। कम दूरी के रोजाना जानाआना करनेवाले यात्री, इन स्टोपेजेस, गाड़ियाँ रद्दीकरण और नियमित मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंके अप्रत्याशित बदलाव पहले तो परेशान हुए और बाद में नाराज़।

इस नाराजगी की वजहें एकदम जायज़ थी। सवारी गाड़ियोंको रद्द करना, उसके बदले कुछ गाड़ियोंको डेमू/मेमू एक्सप्रेस में बदल कर अपर्याप्त संख्या में चलाना। रेल विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में डेमू/मेमू रैक नही थे अतः आठ कार की ट्रेन सेट बनाकर हरेक क्षेत्रीय रेल विभाग को कुछ गाड़ियाँ दी गयी और उन्हें सवारी गाड़ियोंके ऐवज में चलवाया गया।सवारी गाड़ी के पुराने कोच की आसन क्षमता इन डेमू/ममुओंसे कहीं अधिक थी। नई आधुनिक, सुसज्जित डेमू/मेमू गाड़ियोंको देख यात्री जितने खुश हुए, उससे कहीं जल्द उनकी यह खुशी काफूर हो गयी और नाराजगी में बदल गयी।

रेल विभाग ZBTT को नियोजनबद्ध तरीके से लागू नहीं कर पा रहा था और इधर स्थानीय यात्रिओंकी विविध माँगोका दबाव, लोकप्रतिनिधियोंके जरिए रेल प्रशासन तक टकराने लगा। आखिर जो नियोजन था, उसमें फिसलन शुरू हुई। एक एक करके अमूमन सारे स्टोपेजेस लौटाए गए और अभी भी लौटाना जारी है।

हालाँकि, अभी यह एकदम से कहना, की ZBTT कार्यक्रम पूर्णतः असफल हो गया, या उसे अब बन्द कर दिया है, उचित नही होगा। यह बात है, की उचित ढंग समयसारणी की पुनर्रचना की गई, जैसा कुछ लग नही रहा है। रेल विभाग ने इस कार्यक्रम के अंतर्गत सवारी गाड़ियोंकी जगह मेमू ट्रेनसेट लाए। बहुत से रेल मार्ग पर LHB रैक वाली गाड़ियोंको 130 किलोमीटर प्रति घंटे से दौड़ाने की अनुमति प्रदान की। वन्देभारत जैसे ट्रेन सेट वाली प्रीमियम गाड़ियोंका अवतरण साध्य किया। गौरतलब यह है, सभी सीधी चलनेवाली गाड़ियोंमे बीच जंक्शन स्टेशन्स पर होनेवाली शंटिंग लगभग बन्द कर दी गयी है। रेल विद्युतीकरण के व्यापक कार्यक्रम के कारण लोको भी प्रारम्भिक स्टेशन से गन्तव्य स्टेशन तक बिना बदले चल रहे है। लेकिन शून्याधारित समयसारणी के मूल उद्देश्य, समयसारणी की पुनर्रचना से यह कार्यक्रम अब भी दूर ही है, सार्थक नही हो पाया है, ऐसा लगता है।

Uncategorised

उज्जयनी एवं इन्दौर – देहरादून द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस के टर्मिनल स्टेशन, समयसारणी में जनवरी 2024 से बदलाव।

5 सितम्बर 2023, मंगलवार, भाद्रपद, कृष्ण पक्ष, षष्टी, विक्रम संवत 2080

उज्जैन से इन्दौर के लक्ष्मीबाईनगर, नवविस्तारित उज्जैन – देहरादून द्विसाप्ताहिक उज्जयनी एक्सप्रेस एवं इन्दौर देहरादून द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस के टर्मिनलों और समयसारणी में जनवरी 2024 के प्रथम सप्ताह से बदलाव किया जा रहा है।

14317/18 इन्दौर देहरादून इन्दौर एक्सप्रेस अब लक्ष्मीबाई नगर से योगनगरी ऋषिकेश के बीच ही चलाई जाएगी। यह बदलाव 14318 योगनगरी ऋषिकेश – लक्ष्मीबाई नगर द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस में दिनांक 05 जनवरी 2024 से और 14317 लक्ष्मीबाई नगर योगनगरी ऋषिकेश द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस में दिनांक 06 जनवरी से लागू होगा।

इसी तरह हाल ही में उज्जैन से इंदौर के लक्ष्मीबाई नगर, विस्तारीत की गई 14309/10 लक्ष्मीबाई नगर देहरादून लक्ष्मीबाई नगर द्विसाप्ताहिक उज्जयनी एक्सप्रेस अब लक्ष्मीबाई नगर से योगनगरी ऋषिकेश तक ही चलाई जाएगी। यह बदलाव 14310 योगनगरी ऋषिकेश – लक्ष्मीबाई नगर द्विसाप्ताहिक उज्जयनी एक्सप्रेस में दिनांक 02 जनवरी 2024 से और 14309 लक्ष्मीबाई नगर योगनगरी ऋषिकेश द्विसाप्ताहिक उज्जयनी एक्सप्रेस में दिनांक 03 जनवरी से लागू होगा।

यात्रीगण कृपया तिथियोंपर ध्यान देकर, अपनी रेल यात्रा का नियोजन करें।

Uncategorised

धरतीपर गर ज़न्नत है, तो यहीं है, यहीं है और यही है! भारत के दूरदराज़ से, रेल से जुड़ने जा रहा है कश्मीर

3 सितम्बर 2023, रविवार, भाद्रपद, कृष्ण पक्ष, चतुर्थी, विक्रम संवत 2080

‘गर फिरदौस बर रुए ज़मीं अस्त, हमीं अस्तो, हमीं अस्तो, हमीं अस्त’ अर्थात अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है तो यहीं है, यहीं पर है और सिर्फ यहीं पर है। जहांगीर ने फारसी मे कश्मीर के लिए यह कहा था। कश्मीर की वादियों में यूँ तो रेल की सिटी वर्षों से गूंज रही है, मगर भारतीय रेल अब कश्मीर में देशभर की सुदूरवर्ती इलाके से आनेवाली रेल गाड़ियोंको ले जाने की तैयारी कर रहा है। उत्तर रेलवे के फिरोजपुर मण्डल ने 16 जोड़ी गाड़ियोंको कश्मीर के बडगाम तक विस्तार करने के लिए नामित किया है। एक खांका खींचा जा रहा है और जल्द ही रेल प्रशासन इस पर निर्णय कर इसे अंजाम तक पहुचायेगी।

श्रीनगर रेलवे स्टेशन के दृश्य
कश्मीर क्षेत्र का रेल मैप

निम्नलिखित 16 जोड़ी गाड़ियाँ जम्मूतवी, उधमपुर, श्री माता वैष्णो देवी कटरा, बनिहाल, अनंतनाग, अवंतीपुरा, श्रीनगर होते हुए बड़गाम तक विस्तारित करने का प्रस्ताव है।

1: 12425/26 नई दिल्ली जम्मूतवी नई दिल्ली प्रतिदिन राजधानी एक्सप्रेस

2: 12445/46 नई दिल्ली श्री माता वैष्णो देवी कटरा नई दिल्ली प्रतिदिन उत्तर सम्पर्क क्रांति एक्सप्रेस

3: 16031/32 डॉ एम जी रामचन्द्रन चेन्नई सेंट्रल श्री माता वैष्णो देवी कटरा डॉ एम जी रामचन्द्रन चेन्नई सेंट्रल त्रिसाप्ताहिक अंडमान एक्सप्रेस

4: 11449/50 जबलपुर श्री माता वैष्णो देवी कटरा जबलपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस

5: 16787/88 तिरुनेलवेली श्री माता वैष्णो देवी कटरा तिरुनेलवेली साप्ताहिक एक्सप्रेस

6: 16317/18 कन्याकुमारी श्री माता वैष्णो देवी कटरा कन्याकुमारी साप्ताहिक हिमसागर एक्सप्रेस

7: 19803/04 कोटा श्री माता वैष्णो देवी कटरा कोटा साप्ताहिक एक्सप्रेस

8: 12331/32 हावडा जम्मूतवी हावडा त्रिसाप्ताहिक हिमगिरी एक्सप्रेस

9: 15653/54 गौहाटी जम्मूतवी गौहाटी साप्ताहिक अमरनाथ एक्सप्रेस

10: 15651/52 गौहाटी जम्मूतवी गौहाटी साप्ताहिक लोहित एक्सप्रेस

11: 12587/88 गोरखपुर जम्मूतवी गोरखपुर साप्ताहिक अमरनाथ एक्सप्रेस

12: 15097/98 भागलपुर जम्मूतवी भागलपुर साप्ताहिक अमरनाथ एक्सप्रेस

13: 12471/72 बान्द्रा टर्मिनस श्री माता वैष्णो देवी कटरा बान्द्रा टर्मिनस सप्ताह में चार दिवसीय स्वराज एक्सप्रेस

14: 12473/74 गांधीधाम श्री माता वैष्णो देवी कटरा गांधीधाम साप्ताहिक सर्वोदय एक्सप्रेस

15: 12475/76 हापा श्री माता वैष्णो देवी कटरा हापा साप्ताहिक एक्सप्रेस

16: 12475/76 जामनगर श्री माता वैष्णो देवी कटरा जामनगर साप्ताहिक एक्सप्रेस

इस लेख के लिए सहयोग: ईशान बोथरा (मालवा ग्रुप, रतलाम), तस्वीरों, मैप के लिए नीरज जाट एवं indiarailinfo.com के हम आभारी है।