26 मई 2023, शुक्रवार, जेष्ठ, शुक्ल पक्ष, सप्तमी, विक्रम संवत 2080
निम्नलिखित परिपत्रक में विस्तारित मार्ग की समयसारणी दी जा रही है। ढहर का बालाजी से तिरुपति साथ ही साईं नगर शिर्डी के बीच शेड्यूल में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है।
09715/16 ढहर का बालाजी से तिरुपति के बीच चलनेवाली साप्ताहिक विशेष का ढहर के बालाजी से आगे रिंगस, सीकर, नवलगढ़, झुंझुनूं, चिड़ावा, लोहारू, सादुलपुर होकर हिसार तक विस्तार किया जा रहा है। यह विस्तार जून के पहले सप्ताह से लागू होगा।
09739/40 ढहर का बालाजी से साईं नगर शिर्डी के बीच चलनेवाली साप्ताहिक विशेष का ढहर के बालाजी से आगे रिंगस, सीकर, लक्ष्मणगढ़, फतेहपुर शेखावटी, चुरू, रतनगढ़, राजलदेसर, श्री डूंगरगढ़ होकर बीकानेर तक विस्तार किया जा रहा है। यह विस्तार जून के पहले सप्ताह से लागू होगा।
इन विस्तार से बीकानेर और हिसार को तिरुपति और साईं नगर शिर्डी के लिए सीधा रेल सम्पर्क मिला है। फ़िलहाल यह विशेष गाडीयाँ है, अतिरिक्त किराया दर से चलाई जा रही है, और सीमित अवधि के लिए चल रही है। यात्रिओंकी बेहतर माँग रहती है, तो प्रशासन इनको नियमित भी कर सकती है।
यह ई-टिकट भारतीय रेल की आरक्षण वेबसाइट IRCTC से निकाली गई है। यात्रा की तिथि 15 सितम्बर 2023 और टिकट निकालने की तिथि 15 मई 2023 है। याने उपभोक्ता ने रेल प्रशासन द्वारा दी गयी 120 दिन पहले आरक्षण करने की सुविधा का पूर्णतयः उपयोग किया है।
देखनेवाली बात यह है, 120 दिन पहले आरक्षण खुलते ही, जो की सुबह 8:00 बजे खुला है, फुल्ली उपलब्धतता के साथ शुरू हुई आरक्षण लेने की प्रक्रिया केवल पौने दो मिनट में टिकट बनते वक्त प्रतिक्षासूची 1221/24 पहुंच गई।
इसका अर्थ यह है, 9 स्लिपर कोच के 720 बर्थ पूरे बुक होकर 1200 प्रतिक्षासूची धारक गाड़ी की आरक्षण सूची में जड़ गए। 😢 यही रेल आरक्षण प्रणाली का भीषण वास्तव, बीभत्सता है। क्या यह 1200 तक की प्रतिक्षासूची कन्फ़र्म में बदलेगी? कोई नासमझ भी बता देगा, कतई चान्स ही नहीं। फिर क्या तुक है, इतनी वेटिंग चलाने की?
हम रेल व्यवस्था को देखते है। बीते वर्षोमें किसी भी मार्ग की यात्री गाड़ियाँ, हद हो गई ज्यादा में ज्यादा दुगुनी हुई होंगी। यह भी हम उस रेल मार्ग की पराकाष्ठा अनुमानित कर बोल रहे है। मगर रेल यात्री कई कई गुना बढ़ गए है। रेलवे के लोकप्रिय मार्ग अपनी क्षमता से 150% अर्थात डेढ़ गुना क्षमतासे कार्य कर रहे है। ऐसे में आरक्षण की हालत यह न होगी तो क्या होगी?
हमारा यह ब्लॉग किसी भी राजनीति से प्रेरित नहीं है, हम केवल और केवल ‘रेल’ यही दृष्टिकोण मद्देनजर रखते हुए हमारे ब्लॉग में रचना करते रहते है। रेल विभाग बीते 7-8 वर्षोंमें अपने बुनियादी ढांचे के विस्तार में लगा है। विद्यमान सरकार इस दिशा में दूरदृष्टि रख, व्यापक कार्य कर रही है। अनेकों मार्ग पर सिंगल लाइन को दोहरीकरण, दोहरी लाइन को तीन और चार लाइन रेल नेटवर्क में युद्ध स्तर पर बदला जा रहा है। “DFC डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर” यह भारतीय रेल का सुवर्ण अंक है, जो बहुतांश मार्ग पर काम करने लग गया है, पुर्णत्व की ओर अग्रेसर है। रेल ऑटो-सिग्नलिंग का काम जगह जगह चल रहा है। इससे रेल ब्लॉक में ज्यादा गाड़ियाँ परिचालित की जा सकेंगी। स्टैंडर्ड कोच संरचना किये जाने से, प्रस्थान स्टेशन पर रैक की अनुलूब्धतता के कारण होने वाली देरी को टाला जा रहा है। तेज गति क्षमता सज्जित और कम रखरखाव वाली LHB गाड़ियोंके रैक के कारण गाड़ियाँ लम्बी दूरी के लिए उपलब्ध रहती है। सम्पूर्ण विद्युतीकरण और ‘नो शंटिंग पॉलिसी’ से भी गाड़ियोंके परिचालन में काफी फर्क आया है। यह तो बात हुई रेल यातायात के सुधारोंकी, अब आरक्षण प्रणाली पर विचार करते है।
जब आरक्षण खुलता है, फिर वह 120 दिनोंवाला अग्रिम हो या एक दिन पहले वाला तत्काल मिनटों नहीं सैकंडोंमे फुल्ल हो जाता है। रेल विभाग को चाहिए की 720 बर्थस पर ज्यादा से ज्यादा 25% प्रतिक्षासूची टिकट जारी करें। इसके बाद वह गाड़ी आरक्षण प्रणाली में “नो रूम” करार की जाए। यहाँसे परिचालन विभाग का काम शुरू होगा। वे मार्ग पर यदि सम्भव हो, विशेष गाड़ियोंकी घोषणा जल्द ही कर दे, सम्भवतः 90 दिन पहले। गौरतलब यह होता है, वाणिज्य विभाग के पास 120 पहले फुल हुई गाड़ियोंका लेखाजोखा होने के बावजूद परिचालन विभाग मात्र 2-4 पहले विशेष गाड़ियोंकी घोषणा करता है। इतना सब्र किसी भी यात्री के पास नही रहता और वह मजबूरन 8-15 पहले अपनी व्यवस्था किसी और साधन से कर लेता है।
दूसरा रेल जानकार अनेकोंबार रेल्वेकी PRS काऊंटर्स पर प्रतिक्षासूचीवाले टिकटधारी यात्रिओंकी, आरक्षित कोच में घूसखोरी के बारे में आपत्ति ले चुके है। यह रेल आरक्षण प्रणाली का बेहद खराब पहलू है। रेल PRS आरक्षण में बेतहाशा आबंटित प्रतिक्षासूची टिकट और आगे गाड़ी में चलनेवाले टिकट जाँच दल की उन प्रतिक्षासूची धारकोंपर कार्रवाई करने की असमर्थतता को उजागर करती है। यह रद्द हुए टिकटों पर यात्री अपनी धनवापसी करे बगैर आरक्षित कोचों में घुसकर यात्रा करते रहता है और रेल टिकट जाँच दल उनपर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करते। 4 माह पहले आरक्षण कर चुके यात्रिओंके प्रति रेल विभाग की यह घनघोर अनास्था है। PRS टिकट पर प्रतिक्षासूची का आबंटन तुरन्त बन्द किया जाना चाहिए इसके सिवा दूसरा कोई विकल्प सामने नजर नहीं आता तब ही ऐसे यात्रिओंपर अंकुश लग पायेगा।
चलिए, आज बहुत बातें हो गयी। बस आशा है, रेल विभाग अपने ऐसे 1200 वेटिंग वाले टिकट देखें और शर्मिंदगी से ही सही, अपनी यात्री यातायात व्यवस्थाओं में कुछ ठोस सुधार करने का प्रयास करें।
24 मई 2023, बुधवार, जेष्ठ, शुक्ल पक्ष, पंचमी, विक्रम संवत 2080
हाल ही में घोषित बीकानेर – पुणे के बीच नई सुपरफास्ट एक्सप्रेस के उद्धाटन विशेष और आगे नियमित दौड़ की विस्तृत जानकारी पुणे मण्डल द्वारा जारी हो गयी है।
20475 बीकानेर पुणे साप्ताहिक सुपरफास्ट दिनांक 05 जून 2023 से प्रत्येक सोमवार को और वापसीमे 20476 पुणे बीकानेर साप्ताहिक सुपरफास्ट दिनांक 06 जून 2023 से प्रत्येक मंगलवार को शुरू हो जाएगी।
नियमित दौड़ शुरू होने से पहले 30 मई 2023 को उद्धाटन विशेष के तौर पर 01147 पुणे से बीकानेर के लिए यह गाड़ी चलेगी। जिसकी समयसारणी निम्नलिखित है,
23 मई 2023, मंगलवार, जेष्ठ, शुक्ल पक्ष, चतुर्थी, विक्रम संवत 2080
देशभर में रेल विद्युतीकरण की कार्रवाई बड़ी धूमधाम से चल रही है। आये दिन रेल विभाग अपने सूचनापत्रकों के जरिये, फलाँ राज्य, फलाँ क्षेत्र के रेल मार्ग सम्पूर्णतः विद्युतीकृत हो गए। बिल्कुल साहब, उपलब्धि है! क्यों नहीं गिनाएंगे? मगर… मगर .. इस अगर मगर में दिक्कत यह आ रही है, रेल लाइनोंपर OHE बिजली के तार तो डल गए मगर इलेक्ट्रिक लोको का स्टॉक कम जा रहा रहा है। यात्रिओंकी जबरदस्त माँग के चलते प्रत्येक क्षेत्रीय रेलवे अपने चल स्टॉक के खाली पड़े समय का सदुपयोग कर विशेष गाड़ियाँ चला रही है। यात्री कोच तो खाली समय मे से निकाल कर गाड़ियाँ चलवा देंगे मगर उनके लिए लोको? लोको कहाँसे लाएंगे? फिर खींच तान कर WAG-9, WAG-5, WAG-7 को मालगाड़ियोंसे परे कर यात्री गाड़ियोंमे जोड़ा जा रहा है। फिर मालगाड़ियोंको खींचने यही लोको, मालगाड़ियोंकी सेवा में कम पड़ने लगे। आखिर कार रेल प्रशासन ने निर्णय लिया, भई मालगाड़ियोंको उनके अपने लोको से चलने दीजिए और कम अन्तर की जो मेल/एक्सप्रेस गाड़ियाँ है उन्हें डीज़ल लोको से खींच लिया जाए। चूँकि विशेष गाडीयाँ लम्बी दूरी के लिए चलनेवाली होती है, अपने गन्तव्य से 2-4 घण्टों में वापसी यात्रा शुरू कर देती है अतः उन्हें इलेक्ट्रिक लोको बराबर उपलब्ध कराया जाए। तो यह कथा है, बिजली के तारोंके नीचे दौड़ने वाले डीज़ल लोको की।
अब चलिए आप को बताते है, कौनसी 5 जोड़ी गाड़ियाँ डीज़ल लोको से खींची जानी है। अर्थात यह सारी व्यवस्था अस्थायी है। जल्द ही विशेष गाड़ियोंका दौर खत्म होगा और इलेक्ट्रिक लोको फिर अपनी गाड़ियोंको खींचने उपलब्ध हो जाएंगे।
पुणे लोको शेड से लोकोआपूर्ति वाली गाड़ियाँ – 12157/58 पुणे सोलापुर पुणे हुतात्मा प्रतिदिन, 22149/50 पुणे एर्नाकुलम पुणे द्विसाप्ताहिक, 11039/40 कोल्हापुर गोंदिया कोल्हापुर महाराष्ट्र प्रतिदिन, कल्याण लोको शेड से लोकोआपूर्ति वाली गाड़ियाँ – 12115/16 मुम्बई सोलापुर मुम्बई सिध्देश्वर प्रतिदिन, 17411/12 मुम्बई कोल्हापुर मुम्बई महालक्ष्मी प्रतिदिन
23 मई 2023, मंगलवार, जेष्ठ, शुक्ल पक्ष, चतुर्थी, विक्रम संवत 2080
अब क्या बताए, थोड़ी देर पहले हम इसी गाड़ी की प्रस्तावित समयसारणी की पोस्ट दिए और अब बदले हुए मार्ग के साथ नई पोस्ट लेकर आ गए। खैर, यह अब निश्चित किया गया शेड्यूल है।
22458 देहरादून आनन्द विहार टर्मिनल वन्देभारत और 22457 आनन्द विहार टर्मिनल देहरादून वन्देभारत एक्सप्रेस सप्ताह में छह दिन, प्रत्येक बुधवार छोड़कर दिनांक 25 मई से देहरादून से चल पड़ेगी।
प्रस्तावित समयसारणी में गाड़ी सहारनपुर के बजाय टपरी से निकल रही थी। सहारनपुर के साथ ही रुड़की, मुजफ्फरनगर स्टेशन को भी वन्देभारत एक्सप्रेस का लाभ मिल रहा है।😊