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महाराष्ट्र मे भी राज्यान्तर्गत रेल गाड़ियाँ शुरू की जाए

संक्रमण के लॉक डाउन के बाद पूरे देश मे अनलॉक प्रकिया शुरू हो चुकी है। दुकानें, व्यापार, व्यवसाय, प्रोड्क्शन यूनिट्स खोले जा रहे है। महाराष्ट्र राज्य शासन ने भी “मिशन बिगिन अगेन” नाम से अनलॉक प्रकिया को शुरू किया है।

जिस तरह संक्रमण काल मे देश की आम जनता ने शांति और संयम से काम लिया है, उसी प्रकार से इस अनलॉक काल मे भी उसे जारी रखना जरूरी है, और रखा भी जा रहा है। महाराष्ट्र के महानगरोंमें उद्योग और व्यापार अब गति पकड़ रहे है। इन संस्थानोंको कर्मचारियोंकी, श्रमिकोंकी जरूरत पड़ने लगी है। व्यापारी प्रतिष्ठान अपने कर्मचारियोंको और औद्योगिक संस्थाए अपने श्रमिकोंको,मज़दूरोंको वापस अपने कामोंपर हाजिर होने के लिए बुला रहे है। विद्यार्थी और परीक्षार्थिभी अपनी कॉम्पिटिशन एग्जाम्स के लिए शहरोंका रुख करने लगे है। शासकीय, ग़ैरशासकीय, निजी दफ़्तरोमे अच्छीखासी चहलपहल रहने लगी है। लेकिन इतने लोगोंके लिए छोटे गांवों, शहरोंसे महानगरोंमें अपने कामपर जाने के लिए सड़क मार्ग के अलावा दूसरे पर्याय खास कर के रेल उपलब्ध नही है।

महाराष्ट्र में इन महानगरों को जोड़नेवाली महत्वपूर्ण रेल गाड़ियाँ अभी भी उनके यार्ड में खड़ी अनुमति का इंतजार कर रही है। इन महानगरोंके लिए अभी जो भी स्पेशल गाड़ियाँ चल रही है वह उत्तरप्रदेश या बिहार, केरल या कर्णाटक से लम्बी दूरी से आनेवाली गाड़ियाँ है, जिसमे प्रदेश के लोगोंको टिकट उपलब्ध नही हो पाता। रेलवे ने नियम कर रखा है बिना आरक्षण के यात्रा नही की जा सकती और लम्बी दूरी की गाड़ियोंमे कम दूरी के यात्रिओंको कन्फर्म आरक्षण खाली नही मिलता। हमारा राज्य शासन से आग्रह है, कामकाज निमित्त प्रदेश की जनता का आवागमन सुचारू होना नितांत जरूरी है और इस हेतु निम्नलिखित गाड़ियाँ शीघ्रता से शुरू किए जाने की जरूरत है।

मुम्बई से पुणे होते हुए सोलापुर के लिए सिध्देश्वर एक्सप्रेस और हुतात्मा एक्सप्रेस।

मुम्बई पुणे के बीच इंद्रायणी, डेक्कन क्वीन और डेक्कन एक्सप्रेस

मुम्बई नागपुर के बीच सेवाग्राम एक्सप्रेस और विदर्भ एक्सप्रेस

मुम्बई नान्देड के बीच तपोवन एक्सप्रेस और देवगिरी एक्सप्रेस और मुम्बई जालना जनशताब्दी एक्सप्रेस

मुम्बई सावंतवाड़ी के बीच तुतारी एक्सप्रेस चलाई गई है, वैसे ही एक गाड़ी दिन में भी चलनी चाहिए, जनशताब्दी या मांडोवी एक्सप्रेस शुरू की जानी चाहिए।

पुणे से नागपुर के बीच चलनेवाली एक्सप्रेस और गरीबरथ एक्सप्रेस, पुणे से काजीपेठ के बीच भुसावल, अकोला वर्धा होकर चलनेवाली आनंदवन एक्सप्रेस और औरंगाबाद, नान्देड होकर चलनेवाली ताडोबा एक्सप्रेस भी शुरू की जानी चाहिए।

अभी हालात तो ऐसे है, की भारतीय रेलवे और राज्य शासन सवारी गाड़ियोंसहित सभी गाड़ियाँ चला ढें तो सोने पे सुहागा हो जाए, लेकिन यदि संक्रमण की वजह से शासन, प्रशासन की कोई मजबूरी है तो भी कुछ राज्यान्तर्गत गाड़ियाँ चला कर राज्य की मजबूर जनता की सहायता अवश्य ही कर सकते है। अब तक कई राज्योने अपने राज्यान्तर्गत गाड़ियाँ शुरू कर दी है और उस वजह से उनके राज्योंमें रोजगार भी गति ले चुका है। आशा है महाराष्ट्र राज्य शासन भी इस बात पर गौर करेगा और उचित निर्णय ले कर जनता की आवश्यकता की पुर्तता की जाएगी।

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नई दिल्ली तिरुवनंतपुरम नई दिल्ली केरल स्पेशल 30 सितम्बर से शुरू होगी।

वाह जी वाह, बड़ी अच्छी खबरें आ रही है। 02625 तिरुवनंतपुरम नई दिल्ली केरल डेली, पूर्णतयः आरक्षित स्पेशल गाड़ी दिनांक 30 सितम्बर से चल पड़ेगी और वापसी वाली 02626 नई दिल्ली तिरुवनंतपुरम केरल डेली पूर्णतयः आरक्षित स्पेशल दिनांक 03 अक्तूबर से चलने लगेगी। आप समयसारणी देख लीजिएगा।

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राजस्थानवासीयोंके लिए बड़ी खुशखबर, 4 जोड़ी गाड़ियाँ शुरू हो रही है।

1 अक्तूबर से पश्चिम रेलवे की 02991/92 उदयपुर जयपुर उदयपुर डेली स्पेशल, 09609/10 उदयपुर हरिद्वार उदयपुर त्रिसाप्ताहिक स्पेशल, 02995/96 बांद्रा टर्मिनस अजमेर बांद्रा टर्मिनस त्रिसाप्ताहिक स्पेशल, 02901/02 बांद्रा टर्मिनस उदयपुर बांद्रा टर्मिनस त्रिसाप्ताहिक स्पेशल। आप समयसारणी देखिए

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आंध्रप्रदेश में चलनेवाली स्पेशल गाड़ियोंके स्टापेजेस 01 अक्तूबर से पुनर्स्थापित किए जाएंगे

आंध्रप्रदेश राज्य शासन ने रेलवे से गुज़ारिश की है की वह अपनी निम्नलिखित गाड़ियोंके स्टापेजेस को रीस्टोअर याने पुनर्स्थापित कर दे, ताकि मार्ग के यात्रिओंको रेल गाड़ियोंकी व्यवस्था मिल सके। यह सभी स्पेशल गाड़ियोंके स्टापेजेस आंध्र शासन ने ही रद्द करवाए थे। अब यह सारी स्पेशल गाड़ियाँ, अपने नियमित क्रमांक से चलनेवाली गाड़ियोंके भांति स्टापेजेस लेंगी। कृपया निम्नलिखित परीपत्रक देख ले।

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रेल गाड़ियोंका राशनिंग किसलीये?

12 मई को 30 राजधानी गाड़ियाँ शुरू की गई, उसके बाद नियमित अन्तरालपर गाड़ियाँ खुलते चली जा रही है। कभी 100, कभी 80 तो आगे छिटपुट 2-4-6 ऐसी।

ऐसे सुनने में है, रेल प्रशासन को गाड़ियाँ खोलने में कोई आपत्ति नही है बस राज्य प्रशासन अपने राज्योंकी स्थितियां देख कर अनुमति दें, और रेल प्रशासन गाड़ियोंके चलने की घोषणा करें। जब इस तरह के हालात है तो राज्यों और रेल दोनोंही मिलकर अब निर्णय लेने का वक्त आ गया है, की गाड़ियोंका राशनिंग बन्द कर सभी गाड़ियाँ खोल दी जानी चाहिए।

आज ऐसी स्थितियाँ है की श्रमिक लोग अपने कामोंपर लौटने को बेताब है। हजारों, लाखों कर्मचारी जो रोजाना 25 से लेकर 100,150 किलोमीटर तक अप डाउन करते थे, अपने टू व्हीलर या कारोंसे जाना आना कर रहे है। जितने भी महानगर है, वहाँपर आजूबाजू के छोटे शहरों, गाँवोंसे यह कर्मचारी वर्ग के लोग आ जा कर अपनी ड्यूटी पर हाजिर होते है। नागपुर, अमरावती, अकोला, जलगाँव, नासिक, मुम्बई, पुणे, सोलापुर, औरंगाबाद ऐसे महानगरोंमें किराए का घर इन लोगोंके बजट में नही बैठ पाता, अतः पासपड़ोस के गांवों या शहरोंसे ये लोग काम करने शहरोंमें पोहोंचते है। रेलवे से MST/QST पास बना ली तो 400/500 रुपए महीने में काम चल जाता है वही अब बाइक, रोड़ यातायात या कार से 5 से 7 हजार रुपए महीने का खर्च हो रहा है।

महीने का वेतन 15 से 20 हजार और नौकरी पर पोहोंचने का खर्च 5,7 हजार? केवल अपनी नौकरी बचाए रखने की मजबूरी इन को सड़क मार्ग से जाने के लिए मजबूर कर रही है। उपरोक्त शहरोंके नाम हमने केवल महाराष्ट्र के लिये लेकिन अमूमन पूरे देश भर की हालत यही है। तमाम नौकरीपेशा वेतनभोगी कामगार वर्ग में त्राहिमाम मचा है। एक तो सड़क मार्ग से जाना 10 से 15 गुना ज्यादा खर्चीला है, दूसरा सड़क मार्ग की हालत इतनी बदतर है की रोज इन मार्गोंपर जाना आना करना याने खुद की जान जोखिम में डालना है।

उपनगरीय गाड़ियोंमे एक अलग ही किस्सा है। एक तो उपनगरीय गाड़ियाँ जरूरत से काफी कम फेरे कर रही है, दूसरे आम यात्रिओंको इसमें यात्रा करने की अनुमति भी नही है। जो लम्बी दूरी की गाड़ियां चल रही है, उनमें आरक्षण किए बगैर जा नही सकते। जहाँ सीमित गाड़ियोंके चलते, लम्बे दूरी के यात्रिओंको ही जगह उपलब्ध नही हो पाती तो यह शार्ट डिस्टेन्स ट्रैवलर्स को बेचारे, कहाँ जगह बुक करा पाएंगे?

रेल प्रशासन, राज्य प्रशासन हो या केंद्र शासन जिनके भी दायरेंमे रेल गाड़ियाँ चलवाने का अधिकार हो, हम आग्रहपूर्वक विनंती करते है, आप लोग यह रेल गाड़ियोंका राशनिंग बन्द कर दीजिए। अब सारी गाड़ियाँ, सवारी गाड़ियोंसहित शुरू करवा दीजिए, नहीं तो कर्मचारी वर्ग जो की देश का मिडल क्लास भी है, हमेशासे ही चुपचाप हर पीड़ा सहन करने का काम करते रहता है, बरबाद होता जा रहा है। यह कोई श्रमिक नही जिनकी हालत पर सरकारों और समाजसेवियोंको तरस आता है और न ही धनिक व्यापारी या व्यवसायिक वर्ग है जो अपना धन, कमाई कई महीनोंतक न भी रहे तो भी जीवित रह सकता है। यह लोग हर महीने की आय पर अपना घर चलाते है। आज अपनी नौकरियाँ बचाने हड्डितोड़ और जेबकाटू सड़क मार्गोंसे जाना आना करने के लिए मजबूर है।

रेल प्रशासन और इसके जिम्मेदारोंको यह सोचना चाहिए की रेल यातायात पूर्ण क्षमता से शुरू करना कितना जरूरी है। यदि रोजगारोंपर कर्मचारियोंको लौटना है, देश की अर्थव्यवस्था को फिर से कार्यान्वित करना है, तो सभी रेल गाड़ियोंको उनके यार्डस में से निकाल कर पटरियोंपर दौड़ाना नितांत आवश्यक है।