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जरा घर में भी मास्क लगा रहने दे।

एक सुन्दर सन्देश आईआरसीटीसी ने जनहित में जारी किया है। घर से बाहर निकलते हो तो चेहरे पर मास्क चढ़ाना जरूरी है, क्योंकी यह मास्क आपका वायरस के इंफेक्शन से बचाव करेगा। लेकिन आपका यह मास्क आप जरा घर मे भी लगा ही रहने दे। अब आप पूछेंगे, ऐसा क्यों? घर मास्क पहनने की क्या जरूरत है?

जी, जरूरत है। लॉक डाउन में चौबीसों घंटे घरोंमें रह रहकर इन्सान का मुँह किसी चक्की की तरह चलता ही रहता है या यूँ कहिए की चरखे की तरह चलता है। चप्पा चप्पा चरखा चले। मतलब तो आप समझ गए ही होंगे। भाई, यह आपके दिनभर खाते रहने से सम्बंधित है। एक तो कोई काम नही रहता, न कोई टारगेट। घूम घूम कर मन मे यही विचार क्या खाना है, नाश्ता में क्या बनवाए, लंच और डिनर और बीच बीच मे ऐसे ही कुछ न कुछ। बस, चलते ही रहता है।

जरा गृहिणी से पूछिए, इस महीने राशन की क्या स्थिति है? वहीं जानती है, दिनभर रसोई घर से निकलने की फुरसत ही नही। लॉक डाउन नही हुवा जैसे गर्मियोंकी छुट्टियाँ चल रही हो। आज यह व्यंजन तो कल वो। आज इनकी पसंद का मीनू तो कल कुछ और। इन चक्कर मे न सिर्फ ओवर ईटिंग हो रही बल्की ओवर वेस्टेज भी हो रही है।

एक तरफ ऐसी भीषण स्थिति है, कई लोगोंको एक वक्त का खाना तक नसीब नही हो पा रहा। अलग अलग समस्याएं है। कोई मज़दूरोंके घर राशन खत्म हो गया है, और रोजगार बन्द होने से खरीदने के लिए पैसा भी नही है। तो किसी के पास पैसा है, राशन भी है मगर बनाने वाला कोई नही, बाहर होटल, रेस्टोरेंट सब बन्द, यहाँ तक की कई बन्दे ऐसे है, अब चाय भी बनाना सीख रहे है यु ट्यूब के चैनलोंपर जा जा कर। चावल, खिचड़ी के साथ साथ अब दाल कैसे गलती है या जलती है इसका अनुभव भी लिया जा रहा है।

कुल मिलाकर यह है, की जितना जरूरत है, उतना ही पकाए, उतना ही खाए। यह आपकी सेहत भी दुरुस्त रखेगा और किसी के जरूरतमंद की जरूरत भी पूरी होगी। अपने राशन का दुरुपयोग न करें। जरा सोचिए, आप ही की गली के नुक्कड़ पर आज फिर कोई भूखा सोया होगा।

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नादानी, नासमझी या दुर्भाग्य!

आज सुबह महाराष्ट्र के औरंगाबाद – जालना शहरोंके बीच दक्षिण पूर्व रेलवे के नान्देड विभाग में रेल लाइन पर एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हुवा। रेल की पटरी पर 16 जिन्दगी धराशायी हो गयी, इन सोलह लोगोंका काल बनी परभणी से मनमाड़ की ओर जानेवाली मालगाड़ी।

क्या कहना चाहिए इसे? रेल की पटरी, बसों ट्रकों से बहता रास्ता यह कोई सोने की, बैठने की जगह कतई नही है। रात भर चलते जा रहे श्रमिक मजदूर थक कर लेट गए पर कहाँ रेल की पटरी पर? कैसी नादानी, नासमझी कर बैठे? उन्हीं के जत्थे में से चार लोग रेल पटरी से दूर खेत मे जाकर सोए थे वह बच गए। बताइए वे लोग क्यों बच गए? वह चार लोग जिस जगह लेटे थे वहाँपर रेल गाड़ी नही जा सकती थी। जब यह लोग सुरक्षित स्थान पर जाकर सो सकते है तो बाकी लोग क्यों पटरी पर लेट गए?

लॉक डाउन के चलते रेलवे की आवाजाही हर मार्ग पर बहोत कम है, लेकिन शुरू है। किसी जीवित याने लाईव ऑपरेटिंग में रेल लाइन पर आवाजाही करना न सिर्फ खतरनाक है बल्कि कानूनन जुर्म भी है। यह लोग किस तरह की नासमझी के कारण इस भयावह दुर्घटना के शिकार हुए है यह समझना अब नामुमकिन है, क्योंकी वह सारे जिंदगी से हात धो बैठे है।

ऐसे हादसों मे दुर्घटना की जाँच की जाती है। रेल गाड़ी किस गति से आ रही थी, दृष्यमानता कितनी थी, लोको पायलट ने हॉर्न बजाया था या नही, गाड़ी रोकने की कोशिशें किस तरह की गई, इमरजेंसी ब्रेकिंग में क्या रेल गाड़ी भी हादसे की शिकार हो सकती थी? इत्यादि कई सारे सवाल और लम्बी तहकीकात। लेकिन इस बीच दुर्घटनाग्रस्त पीडितोंकी लापरवाही, नासमझी, गैरजिम्मेदाराना हरकत को कोई शायद ही नकार पाएगा। ज़िन्दगियाँ जब मौतों में बदल जाए तो दुर्घटना में किसका दोष था यह ढूंढना बेमानी हो जाता है।

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भुसावल – प्रयागराज रेल मार्ग का विद्युतीकरण पूरा।

भुसावल से इटारसी, इटारसी से कटनी और प्रयागराज से सतना विद्युतीकरण पूरा हो गया था केवल बीच का कटनी से सतना मार्ग का विद्युतीकरण बाकी था। हालाँकि इलेक्ट्रिक लोको से गाड़ियाँ चलाई जा रही थी। कटनी में एक डीजल लोको और लगाकर गाड़ी सतना तक जाती थी, वहाँ पर डीज़ल लोको निकल जाता था और गाड़ी इलेक्ट्रिक लोको से आगे बढ़ जाती थी। इस लॉकडौन के काल मे रेल प्रशासन ने वह बचा हुआ विद्युतीकरण का काम भी पूरा कर लिया है। इससे प्रयागराज की ओर जाने वाली सारी गाड़ियाँ शंटिंग के लिए बिना रुके सीधी चलेगी।

साभार : सतना भास्कर

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माफ़ कीजिए पर हम में बिल्कुल भी गम्भीरता नही है।

लॉक डाउन में अलग अलग छूट दी गयी, तो शराब के ठेकोंपर मेले लग गए, श्रमिकोंके लिए विशेष गाड़ियोंका आयोजन क्या किया गया, वहाँ और अलग खेल हो रहे। जगह जगह पर अटके श्रमिक भाईयोंको अपने घरों को जाने की अदम्य इच्छा को गृह मन्त्रालय ने रेल प्रशासन को साथ लेकर मूर्त स्वरूप दिया।

जो स्टेशन कई दिनोंसे खुले नही थे, रेलवे संक्रमण के चलते, अपने कई कर्मचारियोंको घर बैठे तनख्वाह दे रही थी, ऐसी स्थिति में, इन श्रमिकोंको घर पहुंचाने के लिए रेलवे का पूरा महक़मा काम पे लग गया, रेलवे के अफसर राज्य सरकारोंसे सम्पर्क कर रहे है, तो सुरक्षा कर्मी अपनी जान जोख़िम में डाल इन लोगोंकी सुरक्षा के लिए तैनात है, गाड़ियोंमे भी इनके साथ जा रहे। खाने के लिए व्यवस्थाएं की जा रही है। पानी की बोतलें दी जा रही है।

लेकिन निम्नलिखित व्हिडियो में देखिए, क्या यही अनुशासन है? क्या इस तरह का व्यवहार शोभा देता है? एक तरफ इन श्रमिकोंसे किराया न लेने पर अलग अलग चर्चाएं हो रही है और दुसरी तरफ मुफ्त में परोसा गया खाना, पानी की बोतलें यह लोग प्लेटफार्म पर फेंक रहे है। रेल्वेके स्टाफ़ को गालियां देते है। बताइए लॉक डाउन हटने के बाद भी क्या रेलवे सुचारू रूप से चलाई जा सकेगी?

कोई कार्य सेवा भाव से किया जाता है, पर उसका सिला इस तरह मिलेगा तो मन खट्टा हो जाता है। यह ठीक उसी तरह की प्रताड़ना है, जिस तरह करोंना वॉरियर्स, डॉक्टरों को पीटा जा रहा है। यहाँ गालियाँ है, खाना, पानी फेंकना है।

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इम्युनिटी याने रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बेहद आसान उपाय

हम मानते है, यह हमारा क्षेत्र नही और ना ही विषय है, लेकिन माहौल ऐसा ही चल रहा है की जरूरी है उपचार कराने की जरूरत पडने से पहले ही हम उपाय कर ले।

यह व्हिडियो एक प्रशिक्षित द्वारा, आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर, बेंगलुरु ने बनाया गया है। वीडियो आसान सी अंग्रेजी में है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सके इस लिए व्यायाम बताए गए है।

आप भी किसी तज्ञ की सलाह / जानकारी लेकर इन छोटे छोटे व्यायाम कर के लाभ ले।