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सावधान : आपकी रेल यात्रा में ब्लॉक है।

भाईसाहब, रेल सफर के दौरान खानेपीने का सामान का समुचित प्रबंध कर लीजिएगा, पता नही कब रेलवे ब्लॉक की घोषणा कर दे। फलां गाड़ी रद्द, फलाँ गाड़ी डाइवर्ट, या फिर रेग्युलेट। मित्रों आजकल रेलवे में ऐसे शब्द अक्सर सुनाई दे रहे है। हम आपको डरा नही न रहे है, बस सचेत कर रहे है।

बेचारे यात्री 4, 4 महीने पहले अपनी यात्रा का नियोजन कर के, बड़ी मुश्किलतोंका सामना कर के अपना आरक्षण बनवाते है। हसरतोंके साथ अपनी रेल यात्रा शुरू होने का इंतजार करते रहते है। किसी को अपने रिश्तेदारों को मिलने की आस रहती है तो किसी को अपने आराध्य के दरस की। कोई अपने शैक्षणिक योग्यता की कसौटी को पार करने जा रहा है तो कोई अपने ज्ञान से अर्जित अपने कर्तव्य पर हाज़िर होने जा रहा है। हर व्यक्ति अपने घरौंदे से किसी न किसी मक़सद को हासिल करने निकलता है, यात्रा का ज़रिया होता है रेल।

लेकिन होता क्या है, ऐन समय रेल प्रशासन की घोषणा आ जाती है, के भाई, आपकी ट्रेन रद्द है। ये स्टेशन से, इस मार्ग पर ट्रैफिक ब्लॉक लिया जा रहा है। गाड़ियाँ रेग्युलेट होकर चलेगी या आपके गन्तव्य स्टेशन से होकर नही जाएगी। अब रेलवे वाले क्या जाने, क्या बीतती है ऐसे दुविधामे फंसे यात्री पर। न तो रहे घर के और ना ही घाट के।

रेल प्रशासन की सारी बात मंजूर है, रेल ट्रैक और साजोंसामान का मेंटेनेन्स तो करना होता है। जब कोई दुर्घटना हो जाती है तो आकस्मिक, इमीजीएट ब्लॉक लेने पड़ते है यह तो ठीक है लेकिन रेग्युलर मेंटेनेन्स से लिए, बिना उचित पूर्वसूचना दिए किस तरह ब्लॉक लिया जा सकता है? क्या रेल प्रशासन मेंटेनेंस के लिए कमसे कम 30 दिन पहले सूचना जारी नही कर पाती? और इसके बावजूद रेल प्रशासन का लचर नियोजन।

आइए आज आपको हकीकत बताही देते है। 3 दिन पहले सूचना मिलती है, दौंड स्टेशन पर नॉन इंटरलॉकिंग के कार्य हेतु 13 तारीख को ब्लॉक है। 3 लम्बी दूरी की एक्सप्रेस गाड़ियाँ, 12129 आजाद हिंद, 11077 झेलम और 12850 बिलासपुर एक्सप्रेस रद्द रहेगी। मार्ग की 4, 6 शटल गाड़ियाँ भी रद्द की घोषणा थी। कुछ ही घंटोंके पश्चात एक ट्वीट आता है, तीनों एक्सप्रेस का रद्दीकरण टाल दिया गया है उसके बजाए झेलम एक्सप्रेस डाइवर्ट होकर चलेगी, आज़ाद हिन्द, दानापुर एक्सप्रेस, काज़िपेट एक्सप्रेस और बिलासपुर एक्सप्रेस रेग्युलेट की जाएगी।
अब हकीकत सुनिए, यह सभी गाड़ियाँ कई घंटों लेट चली, जिनकी कोई उचित सूचना यात्रिओंको नही मिल पा रही थी। झेलम एक्सप्रेस डायवर्ट की गईं थी वह तो बराबर छूट गई लेकिन आज़ाद हिन्द एक्सप्रेस आखिरकार रद्द की गई। काज़िपेट एक्सप्रेस अभी भी 10 घंटे देरी से चल रही है जो की केवल 1 घंटा रेग्युलेट की गई थी। मार्ग की सभी गाड़ियोंके यात्री बेहाल हो रहे है। क्या पूर्व नियोजन की कमी थी? क्या झेलम के जैसे बाकी गाड़ियाँ भी डाइवर्ट नही की जा सकती थी या फिर पहले से ही ज्यादा समय का अंतर नही रखा जा सकता था?

सबसे महत्वपूर्ण, क्या इस तरह का ब्लॉक 1 माह पहले तय करके, गाड़ियोंका सही आकलन करके उन्हें फिक्स रद्द या रिशेड्यूल या फिर डाइवर्ट नही किया जा सकता था?

रेल प्रशासन को चाहिए, की यात्री की मज़बूरियोंको समझे, उंन्हे अपनी यात्रा निर्धारण के लिए उचित समय दे ताकी वह अपनी यथायोग्य व्यवस्था लगा सके। सभी गाड़ियोंका पूर्व आरक्षण का समय 4 महीने याने 120 दिनोंसे घटाकर 60 दिन पर ले आए। मेंटेनेन्स हेतु ब्लॉक की पूर्व सूचना कमसे कम 30 दिन पहले दी जाए और पूर्वसूचनानुसार ही काम किया जाए।

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हमसफ़र एक्सप्रेस बनेगी सही मायनेमे हमसफर।

भारतीय रेलवे की कई प्रिमियम गाड़ियाँ है, उन्हीं में से एक है हमसफ़र एक्सप्रेस ट्रेन। फिलहाल 35 जोड़ी हमसफ़र गाड़ियाँ चलाई जा रही है और अब तक यह केवल 3AC यानोंसे सुसज्जित थी।

अब तक कहने का मतलब है की आज के बाद हमसफ़र एक्सप्रेस सही मायनोंमें रेल यात्रिओंकी हमसफ़र बनने जा रही है।

माननीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने आज ही घोषणा की है की, सभी हमसफ़र एक्सप्रेस में स्लिपर क्लास के डिब्बे लगाए जा सकते है और हमसफ़र एक्सप्रेस के किरायोंमे भी कटौती की जा रही है। सबसे विशेष बात यह है की इस गाड़ी को फ्लेक्सी फेयर याने माँग के साथ साथ बढ़ने वाले किरायोंसे हटाया जा रहा है। अब यह गाड़ी फिक्स समान किरायोपर चलाई जाएगी।
साथ मे सर्क्युलर जोड़ रहे है-

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पुणे मनमाड ट्रेनें चलेगी दौंड बाईपास होकर।

दौंड स्टेशन बाईपास लाइन का इंटरलॉकिंग का काम शुरू।

मनमाड दौंड मेन लाइन और दौंड पुणे मेन लाइन को जोड़ने वाली एक कॉर्ड लाइन डाली जा चुकी है, जिसका इंटरलॉकिंग का काम आज दौंड में शुरू है। इसीकी वजह से आज पुणे से मनमाड के बीच चलनेवाली कई गाड़ियाँ देरीसे चल रही है, कुछ रद्द है तो कुछ डाइवर्ट है।

दौंड बाईपास कार्यान्वित होनेपर जो भी गाड़ियाँ मनमाड पुणे मनमाड चलती है उनके समयसारिणी में कमसे कम 40 मिनट रनिंग टाइम की कमी आएगी।
पुणे मनमाड के बीच चलनेवाली गाड़ियोंको दौंड स्टेशनपर लानेपर गाड़ी का लोको आगे से पीछे पलटाना पड़ता था याने ट्रेन की डाईरेक्शन बदलती थी, शंटिंग होता था, दो लाइनोंपर ब्लॉक लगता था।
कॉर्ड लाइन के वजह से यह सब इतिहास होने जा रहा है।

हमारे पास इस लाइन का vdo भी है, जो काम चल रहा तब का है।

https://wp.me/Pajx4R-9P

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राजधानी का भुसावल हॉल्ट, कितना जरूरी।

आखिरकार मध्य रेल पर मुम्बई दिल्ली के बीच राजधानी एक्सप्रेस चल पड़ी और यशस्वी भी हुई के अब सप्ताह में दो दिन के जगह चार दिन चलाई जाएगी।

वैसे तो रेलवे की भारत मे शुरवात मुम्बई से ही हुई है, लेकिन सबसे प्रिमियम ट्रेन राजधानी इस मार्ग को अब मिली है। ज़ाहिरसी बात है, जब 150 km कम अंतर से दूसरा पश्चिम रेलवे का मार्ग उपलब्ध था तो इस मार्ग का राजधानी के कोई विचार क्यों करे? नासिक, जलगाव आदी जिलोके लिए राजधानी के जरिए दिल्ली की फ़ास्ट कनेक्टिविटी एक सपना ही था। खैर! वह तो पूरा हुवा, मगर…. जरूरतें और भी है।
इसी मार्ग पर भुसावल एक बहोत बड़ा और मध्य रेल का महत्वपूर्ण जंक्शन स्टेशन है। यहांपर गाड़ियोंके लोको पायलट, गार्ड बदले जाते है। गाडीका रखरखाव, तकनीकी जांचपड़ताल, डिब्बोमे पानी भरने, इलेकट्रिक मेंटेनेन्स जैसे काम किए जाते है। बुलढाणा, अकोला, अमरावती जैसे ज़िलोंसे आके यात्री दिल्ली के लिए यहांसे गाड़ी बदलते है। जब की यह मध्य रेल का गौरव, राजधानी एक्सप्रेस, मध्य रेल के महत्वपूर्ण स्टेशन भुसावल में रुकती ही नही।

राजधानी एक्सप्रेस का भुसावल स्टॉपेज नही होने से, भुसावल से लोको पायलट, गार्ड अपनी ड्यूटी निभाने के लिए जलगांव बाय रोड़ जाते है और जलगाव से इस राजधानी एक्सप्रेस में डयूटी शुरू करते है। गाड़ी की जो प्राथमिक रखरखाव भी मुंबई से छूटने के बाद सीधे भोपाल में ही हो पाता है, जो की मुम्बई से 840 km के बाद पड़ता है।

मुम्बई से जलगाव तक लगभग 50 प्रतिशत सीटे खाली रहती है, यदि राजधानी को भुसावल हॉल्ट मिलता है तो भुसावल जंक्शन होने से स्टाफ़ चेंजिंग की कई सारी समस्या हल हो जाएगी और गाड़ी में ट्रैफिक भी बढ़ जाएगा।

हमारा माननीय रेल मंत्रीजी से आग्रह है, की राजधानी के भुसावल हॉल्ट के लिए सहानुभुतिपूर्वक विचार करे।

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अकोला – खंडवा रेल लाइन

अकोला – खंडवा रेल सेक्शन के आकोट स्टेशन के कुछ दृश्य।

पहले यह सेक्शन मीटर गेज रेल लाइन पर था, यहांपर ब्रॉड गेज लाइन का काम शुरू हो गया है। निम्नलिखित तस्वीरें दक्षिण मध्य रेल के जनरल मैनेजर के इंस्पेक्शन की है। जो उनके ट्विटर हैंडल से साभार उत्धृत की गई है।

आशा है, अकोला आकोट सेक्शन जल्द ही यात्रिओंकी सेवा में शुरू कर दिया जाएगा।