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मुम्बई : रेल गाड़ियोंपर बाढ़ का प्रकोप जारी

ये दृश्य कल रात इगतपुरी – कसारा के बीच उम्बरामाळी स्टेशन का है
यह मुम्बई पुणे के बीच बदलापुर के हालात है।
फोटो: उदय जोशी

फोटो, व्हिडिओ साभार : विजय अर्वामुधन

मुम्बई की ओर जानेवाले यात्रिओंसे निवेदन है, गाड़ियोंकी ताजा स्थिति जानकर रेल यात्रा का नियोजन करें।

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अवैध विक्रेता और रेल प्रशासन की मुस्तैद सुरक्षा

हाल ही मे मध्य रेल्वे के भुसावल मण्डल के खंडवा स्टेशन पर एक हादसा हुवा। कुछ अवैध विक्रेताओने रेल के वातानुकूलित कर्मचारी को बेरहमीसे चाकू मार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया वजह थी की उस कर्मचारी ने अपना फर्ज निभाया, उसने उन विक्रेताओं को अपने वातानुकूलित कोच मे आने से, सामान बेचने से मना कर दिया। क्या आप इस विषय की गंभीरता समझ रहे है? यह समस्या केवल भुसावल मण्डल या मध्य रेलवे इतनी सीमित नही, पूरे भारतीय रेलवे में फैली है।

एक तरफ सामान्य यात्री को संसर्ग का फैलाव न हो इस लिए स्टेशन के प्रवेश द्वार पर ही रोक लगाकर, उसकी टिकट जाँच कर आगे प्लेटफ़ॉर्म पर जाने की अनुमति है। जगह जगह पर बैरिकेट्स लगाए गए है। रेल्वे सुरक्षा बल के जवान मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी कर रहे है। वाणिज्यिक कर्मी, टिकट चेकिंग स्टाफ स्टेशनों के प्रवेश द्वार से ही अनाधिकृत प्रवेश को रोके खड़े है। ऐसे मे यह अवैध विक्रेता क्या इतने अव्वल दर्जे के घुसपैठिए है की इतनी चाकचौबन्द सुरक्षा व्यवस्थाओं को धता बताकर, अपने तमाम खाद्य सामग्री के बड़े बड़े टोकरियों, चाय की केतलियों और चूल्हों के साथ प्लेटफॉर्मों पर और वहाँसे गाड़ियों मे पहुँच जाते है? यदि रेल्वे प्रशासन का यह कहना है की यह लोग प्लेटफ़ॉर्म से नहीं कहीं ओर से गाड़ियों मे चढ़ते उतरते है तो यह बात यात्रियों के जान माल की सुरक्षा के प्रति और भी गंभीर हो जाती है।

अवैध विक्रेता गुट मे अपना व्यवसाय करते है। अपनी सामग्री के लिए यात्रियों से मनमाना पैसा वसूलते है, हल्के दर्जे की अस्वास्थ्यकर खाद्य सामग्री बेचते है। यात्री ना तो इनसे बहस कर पाते है ना ही मना, खरीद लिए तो खा लीजिए, ना पसंद हो तो फैंक दीजिए। बहस करोगे, शिकायत करोगे तो झगड़ा या मारपीट तक हो सकती है। द्वितीय श्रेणी और स्लीपर क्लास के कोच मे तो यह लोग बड़ी आसानी से विचरते है, मगर इनकी हिम्मत इतनी बढ़ गई है की जहां आम आदमी बेचारा पैर धरने से डरता है वैसे वातानुकूलित उच्च श्रेणियों के कोचेस मे भी यह लोग जबरन अपनी दुकानदारी कर लेते है।

इन परिस्थितियों के लिए जितनी रेल प्रशासन जिम्मेदार है, उतने ही रेल के यात्री भी जबाबदार है। यदि यात्री इन अवैध विक्रेताओं से सामान खरीदना छोड़ दें तो धीरे धीरे यह लोग गाड़ियों मे व्यवसाय नहीं मिलने से आना छोड़ सकते है। एक तरफ रेल प्रशासन अपने यात्रीओं के लिए ज्यादा से ज्यादा स्वास्थ्य पूरक सील बंद खाद्य सामग्री, पेय जल पर आग्रही है, साफ़सफ़ाई के लिए कर्मियों की फौज तैनात रखे हुए है और ऐसे मे यात्री ही अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह हो तो कैसे चलेगा? रेल्वे बार बार यात्रीओं को अनाधिकृत वेंडर्स के प्रति सजग करने का प्रयास करते रहता है। इसके बावजूद यात्री इनसे चाय और अन्य सामग्री खरीदते ही रहते है।

रेल गाड़ियों मे सिर्फ अवैध विक्रेता ही नहीं बल्कि तृतीय पंथियों का भी अलग जलवा है। यह लोग यात्रियों से दादागिरी कर जबरन मनचाही वसूली करते है, और यात्री भी बेबस हो कर कुछ पैसे देकर अपना पिंड छुड़ाता है। अवैध विक्रेता या यह तृतीय पंथी किस तरह रेल्वे की सुरक्षा के नाक के नीचे से निकल गाड़ियों मे पहुँच जाते है, क्या इनके पास आरक्षित टिकटें रहती है या कुछ और माजरा है? रोजाना रेल परिसर मे, रेल गाड़ियों मे घूम घूम कर इन लोगों को रेल्वे के छुपे रास्तों की, रेल कर्मियों के सुरक्षा चौकियों की बराबर जानकारी रहती है। यहांतक की “सरप्राइज चेक” या किसी बड़े अफसर की “सरप्राइज विजिट” की भी जानकारी की सूचना इन्हे मिल जाती है, उस दिन विविक्षित जगहों, मार्गों पर यह लोग नहीं मिलेंगे, है न मजे की बात, की आम आदमी के लिए जो सरप्राइज चेक होता है वह इन लोगों के लिए उस दिन नाकाबंदी वाला इलाका रहता है।

रेल प्रशासन ने यात्रियों के हेल्पलाइन, ट्वीट और मेसेज के माध्यम से शिकायत करने और सुरक्षा हेतु मदत मांगने की व्यवस्था कर रखी है। यात्री की शिकायत पर रेल सुरक्षा बल के जवान तुरंत ही सक्रिय हो जाते है। बस जरूरत यात्रीओं के सहयोग की ही रह जाती है। यात्रियों से ही नम्र निवेदन है, अवैध विक्रेताओं से किसी भी तरह की सामग्री ना खरीदे। आपके कोच मे यदि कोई अवैध व्यक्ति नजर आता है तो उसकी शिकायत रेल सुरक्षा कर्मीयों से 182 या 139 नंबर पर तुरंत कर सकते है। ट्वीट, मैसेज वगैरा माध्यम या ऑनबोर्ड रेल कर्मचारियों से भी यात्री शिकायत कर सकते है। रेल प्रशासन भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था अद्ययावत रखती है, यात्रियों को भी जरूरी है की वे भी सजग रहें, सचेत रहें।

फोटो साभार: इंटरनेट

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06237/38 मैसूरु साईंनगर शिर्डी मैसूरु साप्ताहिक विशेष शुरू होने जा रही है।

06237 मैसूरु साईं नगर शिर्डी साप्ताहिक विशेष दिनांक 26 जुलाई से प्रत्येक सोमवार को चल पड़ेगी वापसीमे 06238 साईं नगर शिर्डी मैसूरु साप्ताहिक विशेष दिनांक 27 जुलाई से प्रत्येक मंगलवार को निकलेगी। यह गाड़ी सम्पूर्ण आरक्षित रहेगी, आगे इसकी समयसारणी दे रहे है।

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“तेजस” राजधानी

मुम्बई नई दिल्ली के बीच प्रतिदिन चलनेवाली पश्चिम रेलवे की 02951/52 राजधानी अब भारतीय रेल के सबसे आधुनिक “तेजस” रैक से चलाई जाने वाली है। यूँ तो पूर्वोत्तर रेलवे में अगरतला राजधानी इन तेजस कोचेस के साथ चलाई जा रही है, मगर मुम्बई राजधानी के लिए यह पहली बार उपयोग में लाए जा रहे है। अब आप सोच रहे होंगे, इसमें क्या विशेषता है, की बड़ा नाम लिया जा रहा है? चलिए बताते है।

स्वचालित दरवाजे: तेजस राजधानी में खतरनाक तरीके से नहीं चढ़ना उतरना बिल्कुल मना है क्योंकी नए रेक में स्वचालित दरवाजे होंगे जो ट्रेन के चलने से स्वचालित तरीकेसे बंद किए जायेंगे।

बेहतर इंटीरियर: आग प्रतिरोधी सिलिकॉन फोम वाली सीटें और बर्थ यात्रियों को बेहतर आराम और सुरक्षा प्रदान करते हैं।

खिड़की पर रोलर ब्लाइंड:  पर्दों के बजाय आसान सैनिटाइजेशन के लिए रोलर ब्लाइंड्स दिए गए हैं।

मोबाइल चार्जिंग पॉइंट: प्रत्येक यात्री के लिए प्रदान किया गया।

बर्थ रीडिंग लाइट: प्रत्येक यात्री के लिए प्रदान किया गया।

ऊपरी बर्थ पर चढ़ने की व्यवस्था: नई सीढ़ी की डिज़ाइन ऊंची बर्थ तक चढ़ने को अधिक सुविधाजनक बनाती है।

यात्री घोषणा और यात्री सूचना प्रणाली: तेजस के प्रत्येक कोच में दो एलसीडी डिस्प्ले होते हैं जो अगले स्टेशन, शेष दूरी, आगमन के अपेक्षित समय, देरी और सुरक्षा संबंधी संदेशों के बारे में अधिक जानकारी प्रदान करते हैं।

डिजिटल डेस्टिनेशन बोर्ड: प्रत्येक कोच पर एलईडी डेस्टिनेशन बोर्ड लगाए गए हैं।  डेटा दो पंक्तियों में प्रदर्शित किया जाएगा।  पहली पंक्ति ट्रेन संख्या और कोच प्रकार प्रदर्शित करेगी जबकि दूसरी पंक्ति गंतव्य और मध्यवर्ती स्टेशन को कई भाषाओं में प्रदर्शित करेगी।

ऑक्यूपेंसी सेंसर के साथ बेहतर शौचालय : नए बायो-वैक्यूम शौचालय में एंटी-ग्रैफिटी कोटिंग्स, जेल कोटेड शेल्फ और एक नया डिज़ाइन का डस्टबिन, डोर लैच जो कि आधुनिक तकनीक के एक्टिवेटेड लाइट और एंगेजमेंट डिस्प्ले के साथ हैं। आपात स्थिति के मामले में शौचालयों में अब पैनिक बटन भी लगाया है।  शौचालय व्यस्तता की स्थिति का सेंसर प्रत्येक कोच में लगाया गया हैं।

सुरक्षा और निगरानी निगरानी: प्रत्येक कोच में कम रोशनी की स्थिति में भी नाइट विजन क्षमता और चेहरे की पहचान के साथ छह कैमरे लगाए गए हैं।

स्टेनलेस स्टील अंडर-फ्रेम:  कोच अंडर-फ्रेम जंग को कम करने और कोच के जीवन को बढ़ाने के लिए ऑस्टेनिटिक स्टेनलेस स्टील (एसएस 201 एलएन) से बना है।

एयर सस्पेंशन बोगियां: सभी कोचों में यात्री आराम और इन कोचों की सवारी की गुणवत्ता के लिए एयर सस्पेंशन है।

इन सुविधाओंके अलावा सुरक्षा में सुधार के लिए बेयरिंग, पहियों के लिए ऑन बोर्ड कंडीशन मॉनिटरिंग सिस्टम, एचवीएसी – एयर कंडीशनिंग सिस्टम के लिए वायु गुणवत्ता माप, वास्तविक समय के आधार पर पानी की उपलब्धता की जानकारी के लिए जल स्तर सेंसर, कोचों की बाहरी बनावट पीवीसी फिल्म के साथ प्रदान की जाती है।

पहला: यात्री सूचना और कोच कंप्यूटिंग यूनिट

दो नए रेकों में से एक कोच के लिए यात्री सूचना और कोच कंप्यूटिंग यूनिट (पीआईसीसीयू) को सपोर्ट करता है।  यह इकाई प्रत्येक कोच के लिए विभिन्न मापदंडों की निगरानी करेगी।  पश्चिम रेलवे के सीपीआरओ सुमित ठाकुर का कहना है कि विभिन्न सुविधाओं के प्रदर्शन की बारीकी से निगरानी के लिए डेटा एक मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से एक केंद्रीय सर्वर को भेजा जाएगा।

PICCU यूनिट बिजली की खपत के अलावा सीसीटीवी वीडियो, टॉयलेट गंध सेंसर, पैनिक स्विच, वायु गुणवत्ता, आग का पता लगाने और अलार्म सिस्टम का रिकॉर्डिंग करेगा। 

यह लेख, तस्वीरें railpost.in से साभार, साथ ही तसवीरोंके लिए, रेल पोस्ट टेलीग्राम से श्री उदित मेहता और स्वरूप मुखर्जी इनके भी आभार।