पश्चिम रेलवे का नया टाइम टेबल जो एक जुलाई से लागु हो रहा है ।
उसकी हाइलाइट्स यहाँ पर दे रहे है ।
निचे दी गयी लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड करे.
पश्चिम रेलवे का नया टाइम टेबल जो एक जुलाई से लागु हो रहा है ।
उसकी हाइलाइट्स यहाँ पर दे रहे है ।
निचे दी गयी लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड करे.




MST धारक एवं छोटी यात्रा करनेवाले यात्रिओंकी परेशानी नामक लेख में, ( यह उस लेख की लिंक है, http://wp.me/pajx4R-9t) उपरोक्त परेशानियों पर अपने विचार आपके सामने रखे थे। रेल्वेसे भी अनुरोध किया था की वे इन छोटी यात्रा करनेवाले यात्रिओंको किस तरह परेशानियों से मुक्ति दिला सकती है।
इस लेख में हमने छोटी दूरी के लिए इंटरसिटी गाड़ियाँ चलाने की सोच रखी थी, उसी सोच में आगे हम आपको रेलवे की भविष्य में आनेवाली गाड़ियाँ कैसी रहेगी यह बताते है।
रेलवे में तीन प्रकार की गाड़ियाँ रहती है। एक लंबी दूरी की गाड़ियाँ, जिसमे नीले कलर के ICF कोच लगते है या फिर आजकल लाल कलर के LHB कोच लगाए जाते है और एक लोको याने इंजिन आगे से गाड़ी खींचता है। यह बिल्कुल पारंपारिक, हमेशा वाली गाड़ी हो गयी। इसमें गति बढाने के लिए याने नीले डिब्बे वाली ICF गाड़ी जो 110 KM प्रति घंटा चलती थी अब LHB कोचेस की वजह से 130 की स्पीड ले सकती है और उसके भी आगे चलके आगे और पीछे दोनों सिरेपर, एन्ड पर लोको, इंजिन लगाकर 160 KM प्रति घंटा चलाई जाने की को शिशें शुरू हो गयी है।
दूसरा प्रकार है EMU/ DMU याने सीधी भाषामे लोकल ट्रेन। इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट, डीज़ल मल्टीपल यूनिट यह गाड़ियाँ मेट्रो शहरोंमें चलती है। मुम्बई की लोकल तो आपने देखी होगी वहीं। इसमें अलगसे लोको इंजिन नही लगता। दोनों सिरोंपर लोको पायलट गाड़ी चला सकता है। जिस दिशा में चलानी है, उस सिरे पर लोको पायलट कैबिन में जाकर गाड़ी चलता है। इसकी इंजिन की मोटरें अलग अलग डिब्बों में लगी होती है। यह गाड़ी उपनगरीय ट्रैफिक ही सम्भालती है, लम्बी दूरी के लिए उपयोगी नही। इसका दायरा लगभग 100 km के आसपास रहता है और स्पीड 80 से 100 km प्रति घंटा होती है।
तीसरा प्रकार है, जो आधुनिक है।
MEMU मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल युनिट। यह गाड़ी मेनलाइन पर चलाने के लिए तैयार की गई है। इसकी रेंज 200 km तक रहती है, बाकी स्पीड और सभी ऑपरेशन EMU की तरह ही होते है।
आने वाले दिनोंमें इसी MEMU गाड़ी को उन्नत बनाया जा रहा है, बिल्कुल T18 वन्देभारत एक्सप्रेस की तरह। T18 एक तरह से MEMU ट्रेन ही है जो लम्बी दूरी के लिए बनाई गईं है, वातानुकूलित और हर डिब्बे में टॉयलेट, बेसिन तैयार किए गए है। मिनी पेन्ट्री के लिए हीटर, हॉट ड्रिंक डिस्पेंसर आदी व्यवस्था भी विकसित की गई है।
इस गाड़ी की 16 डिब्बों की कुल संरचना रहेगी। जिसमे पारंपरिक MEMU गाडीसे 25 % ज्यादा यात्री यात्रा कर पाएंगे। यात्रिओंको आपाद स्थितियों में गाड़ी के लोको पायलट से सीधे बात करते आएगी। गाड़ी के सभी डिब्बे सीसीटीवी से निगरानी में रहेंगे। गाड़ी की ब्रेकिंग सिस्टम बिजली का पुनरुत्पादन भी करेगी।
आनेवाले दिनोंमें 200 से 300 km के दायरेमे ऐसी इंटरसिटी गाड़ियाँ चलाई जाने वाली है।इससे लम्बी दूरी की गाड़ियोंपर पड़ने वाला दबाव काफी कम हो जायेगा और सबसे ज्यादा राहत हमारे MST पास धारक और छोटी छोटी यात्रा रोजाना करने वाले तात्कालिक यात्रिओंको होगी।
तो बस, थोडासा और इंतज़ार अच्छे दिन आने का।
आजकल मुख्यालय के आदेश का पालन किया जा रहा है, विभाग के आला अधिकारी द्वितीय श्रेणी के डिब्बों में, यात्रिओंके साथ, उनके यात्रा के अनुभवोंसे अपने विभाग को दुरुस्त करने की कवायद करेंगे।
साउंड्स गुड़, है न। सुनने में काफ़ी अच्छा लगता है। रेलवे के सबसे नीचेकी श्रेणी के डिब्बे में रेलवे का उच्च श्रेणी का अधिकारी यात्रा कर रहा है, डिब्बे के लाइट्स, पानी, टॉयलेट की सफाई, यात्रिओंकी तकलिफोंके बारे में पूछताछ की जा रही है। कोई अव्यवस्था दिखाई दी तो उसे तुरंत सम्बन्धित कर्मचारियों से व्यवस्थित किया जा रहा है।
जमीनी हक़ीक़त यह है, द्वितीय श्रेणी की बात तो छोड़ दीजिए, उसमे यात्रा क्या आप प्रवेश भी कर नही पाओगे, लेकिन शयनयान स्लिपर की हालत भी बदतर है। आप यकीन नहीं कर सकते 72 आसनोकी क्षमता वाले स्लिपर में 150 लोग बैठे होते है और सौ-सव्वा सौ खड़े खड़े यात्रा करते है। जब एक डिब्बे में क्षमता से 3 गुना लोग यात्रा कर रहे हैं तो कितने लोग अधिकृत यात्री है और कितने अनाधिकृत? इस का ज़वाब कोई साधारण व्यक्ति भी दे देगा।
इतनी बेतहाशा भीड़ में अनाधिकृत विक्रेता, भिखारी, तृतीयपंथी, पैसे लेकर झाड़ू लगानेवाले रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था सम्भालने वालोंके सामने अपना रोज़गार पूरी शिद्दत के साथ करते रहते है।
आप सोचते होंगे, भीख मांगना, झाड़ू लगाकर पैसे मांगना क्या यह व्यवसाय है? जी, जब गाड़ियाँ तय की जाती है, कहाँ से कहाँ तक जाना है यह तय किया जाता है, एरिया बँटता है यानी सब कुछ सिस्टेमेटिक तरीकेसे फ़ाइनल किया जाता है तो व्यवसाय ही तो है।
एक एक अनाधिकृत व्यवसायी, हर दिन सैकड़ों, हजारों इकठ्ठा करता है और फिरसे दूसरे दिन की लाईन लगाने में लग जाता है।
अब आपको क्या बताए? जो पानी की बोतल 20 रुपये में बिकती है, वह विक्रेता को केवल 6-7 रुपए में मिलती है और गर्मी के सीज़न में एक बन्दा कमसे कम 100 बोतले एक गाड़ी में बेचता है। खाने के मुल्योंमे भी यही होता है, IRCTC का रेट 50 रुपए है तो गाड़ी में बिकता है 100, 120, 150 रुपयोंमें। बताइए कहाँ तक जा रहा है आपका गणित?
आते है फिरसे अधिकारियों की सेकण्ड क्लास डब्बोंकी सरप्राइज यात्रा पर, यह यात्रा कितनी सरप्राइज़ होती है इसका आंखों देखा हाल हमे एक कर्मचारी ने बताया। गाड़ी, उसका डिब्बा तय कीया जाता है। सुरक्षा कर्मी पहलेसेही डिब्बे का एक कम्पार्टमेंट वहाँ के यात्रिओंको खदेड़ कर खाली करा देते है। अनाधिकृत विक्रेताओं को और अवांछित लोगोंको पूर्वसूचना अनुसार नियंत्रित कर लिया जाता है। यात्रा नियमानुसार पूर्ण की जाती है और दूसरे दिन क्यो अगले स्टेशन, अगली गाडीसे ही फिर अपने अपने राग अलापने शुरू हो जाते है।
हम कहते है, सरप्राइज विज़िट ठीक है, रेलवे की ट्विटर शिक़ायत निवारण व्यवस्था बढियाँ है। अधिकारीगण अपनी व्यवस्थाएं दुरुस्त करते रहते है। मजबूती सुरक्षा में भी है। फिर कमी कहाँ है?
जरूरत यात्रिओंकी सजगता और रेल्वेके हर स्थानीय कर्मचारियों के तालमेल में है। यात्री यदि केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही सामग्री खरीदें, अतिरिक्त मूल्य न दें, भिखारी, मांगनेवालोंको खड़ा न होने दे, चलता करे और इन सभी गतिविधियों में रेलवे के कर्मचारी, सुरक्षा बल यात्रिओंके साथ सदैव ततपरतासे, मुस्तैदी से खड़े दिखे तो यह परेशानीयां काफ़ी नियंत्रित हो जाएगी।
रेलवे के कर्मचारियों में चाहे वह चतुर्थ श्रेणी का ही क्यों न हो, सुरक्षा बलोंके जवानोंमें और यात्रिओंमें अपने देश की रेलवे, अपने नैशनल करिअर के प्रति सन्मान, अपनत्व और प्रेम की भावना जागना जरूरी है। देश का नागरिक जब सज़ग होता है तो देश साफसुथरा, सुरक्षित और सुंदर बनता है।
आइए अपना देश, अपनी रेल स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित बनाए।