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दो नई गाड़ियाँ उद्धाटन की राह पर! उदयपुर – जयपुर वन्देभारत और नागपुर – जबलपुर, शहडोल एक्सप्रेस

12 अगस्त 2023, शनिवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, एकादशी, विक्रम संवत 2080

उदयपुर पहुंचा वन्देभारत का रैक

एक और वन्देभारत एक्सप्रेस चलने के लिए तैयार हो रही है। उदयपुर सिटी – जयपुर – उदयपुर सिटी। 8 कोच का रैक उदयपुर सिटी पहुंच चुका है और इसके ट्रायल रन्स का शेड्यूल भी सामने आ गया है। उदयपुर जयपुर के बीच परिपत्रक में ट्रायल्स, उदयपुर, मावली जंक्शन, चंदेरिया, भीलवाड़ा, अजमेर, किशनगढ़, जयपुर इस मार्ग से बताई गई है मगर खींचतान में कोटा, बूँदी मार्ग भी अपना जोर लगा रहा है।☺️ देखते है, अन्ततः परिचालन की घोषणा किस के पाले में जाएगी। गौरतलब चर्चा यह भी है, इस गाड़ी को भी इन्दौर – भोपाल वन्देभारत की तरह सड़क परिवहन की कड़ी चुनौती रहनेवाली है। वन्देभारत गाड़ियोंके तगड़े किराए और प्रीमियम स्टेटस, देश मे सभी क्षेत्रोंमें समान रूप में पचाये नही जा रहे। जहाँ उद्योग, व्यापार व्यवसाय निमित्त यात्राएं होती है, जैसे मुम्बई, अहमदाबाद, चेन्नई, बेंगलुरु वन्देभारत या पर्यटन यह प्रमुख कारण है जैसे वाराणसी, दिल्ली, कटरा, केरल की वन्देभारत गाड़ियोंको अच्छा यात्री भार मिला है। वहीं इन्दौर, भोपाल, जबलपुर, नागपुर, बिलासपुर जैसे शहरोंके बीच वन्देभारत को यात्री भार की कमी से गुजरना पड़ रहा है।

यह एक मेल/एक्सप्रेस श्रेणी की नई साप्ताहिक गाड़ी घोषित की गई है। नागपुर – जबलपुर, शहडोल के बीच। जिस तरह नागपुर से जबलपुर के बीच नियमित मार्ग इटारसी होकर ढेर गाड़ियाँ चल रही है, यह बिल्कुल आशा के अनुरूप अलग नए मार्ग सौंसर, छिंदवाड़ा, सेवनी, नैनपुर, जबलपुर होकर आगे कटनी होते हुए शहडोल ले जाई जा रही है। इसमे भी नागपुर, गोंदिया, बालाघाट होकर जबलपुर ले जाने की चर्चाए थी। मगर छिंदवाड़ा होकर चलना इस क्षेत्र की सम्पर्कता, रेल कनेक्टिविटी के लिए आवश्यक ही था। यह गाड़ी के फेरे साप्ताहिक से बढ़ते चले यह आशा है।

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वन्देभारत vs गरीबों की रेल

09 अगस्त 2023, बुधवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, नवमी, विक्रम संवत 2080

मित्रों, वैसे हम विशुद्ध रूप से, सिर्फ और सिर्फ रेल सम्बन्धी ख़बरोंसे जुड़े हुए है, हमारे ब्लॉग को किसी राजनीति से कोई लेनादेना नही। मगर दिनोंदिन एक बात हमारे मन मे कौंध रही है, नई और बहुचर्चित वन्देभारत एक्सप्रेस पर मीडिया, सोशल मीडिया में दी गयी विशेष तवज्जों और वह भी अलग नज़रिए वाली। जैसे की वन्देभारत एक्सप्रेस से मवेशी कटे, वन्देभारत लोको का चेहरा बिगड़ा, वन्देभारत एक्सप्रेस पर पत्थरबाजी, वन्देभारत एक्सप्रेस का फलाना नुकसान हुवा इत्यादि।

क्या यह, वन्देभारत vs गरीबों की रेल ऐसे नैरेटिव, रिवायत बनाने का एजेन्डा चलाया जा रहा है? क्या आज से पहले देश मे कभी कोई वातानुकूलित या प्रीमियम गाड़ी नही चलाई गई है? देश की पहली सम्पूर्ण वातानुकूलित नई दिल्ली हावडा राजधानी सन 1969 में चली थी और आज भारतीय रेल का गौरव है। वातानुकूलित कुर्सी यान वाली शताब्दी एक्सप्रेस 1988 से चलाई जा रही है। हालांकि यह गाड़ियाँ सर्वप्रथम चली तब भी देश में इनको कड़ी आलोचना का शिकार होना पड़ा। देश को ऐसी विलासपूर्ण, लग्जरी गाड़ियोंकी क्या जरूरत है, यह बोला जाता था मगर आज इन्ही गाड़ियोंका, देश की गतिमान, लोकप्रिय और भारतीय रेलवे की लाभदायक गाड़ियोंमे शुमार होता है।

वन्देभारत एक्सप्रेस ऐसी ही एक प्रीमियम, आधुनिक साजसज्जा, तकनीक वाली, देश को गौरवान्वित करनेवाली गाड़ी है। इसकी खूबियों के बारे में आप लोग इतनी बार पढ़ चुके होंगे के दोबारा से यहॉं गिनाने की कोई आवश्यकता हमें नही लगती। आज हम सिर्फ उस के लिए जो अलग व्यवहार, खबरें मीडिया में अग्रता से लाई जाती रही है, उस पर बात करेंगे।

क्या रेल पटरियों पर, रेल से टकरा कर आवारा मवेशियों के कटने की खबरें आम थी, अर्थात सुर्खियों में छपती थी? नहीं, मगर वन्देभारत के संदर्भ के कर यह खबर हेडलाइन्स में आती रही है। क्या पहले रेल पर पत्थरबाजी कभी नही हुई? होती थी और उनपर रेल प्रशासन की ओर से उपाय, उपचार और कड़ी कार्रवाई भी की गई है, मगर वन्देभारत पर यह खबरें सुर्खियों में छापी गयी। एक प्रवाद है, जिनके नाम होते है, उन्हें बड़ी आसानी से बदनाम भी किया जा सकता है, क्योंकि कौन, किस के बारे में, यह ज्यादा समझाना नही पड़ता। है ना?

कुछ वन्देभारत गाड़ियाँ खाली चल रही है। मीडिया इस मामले भी बड़ी सक्रियता से उन्हें असफल होने का तमगा लिये पीछे दौड़ रहा है। एक अभ्यास बताता है, किसी भी वन्देभारत का परिचालन खर्च, गाड़ी मात्र 30 प्रतिशत यात्रीभार से भी चले तो, निकलता है। गौरतलब यह है, देश भर के सारे जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र में वन्देभारत चले इसके लिए आग्रही थे और है। देशभर में अब तक 25 वन्देभारत गाड़ियाँ चली है और कुल 200 वन्देभारत गाड़ियाँ आने वाली है। 25 में से 2 या 3 गाड़ियाँ अपेक्षित यात्री भार से कम यात्रिओंका वहन कर रही है, तो क्या वन्देभारत एक्सप्रेस को असफ़ल करार दिया जा सकता है, कदापि नहीं।

मीडिया का दूसरा चहेता विषय है, गरीबों की गाड़ियाँ विरुद्ध वन्देभारत एक्सप्रेस। यह कैसी तुलना है? भारतीय रेल में द्वितीय श्रेणी से लेकर एग्जीक्यूटिव और वातानुकूल प्रथम तक विभिन्न टिकट श्रेणियाँ है। अनारक्षित डेमू/मेमू से लेकर सम्पूर्ण वातानुकूलित राजधानी एक्सप्रेस तक की विभिन्न गाड़ियोंके प्रकार यात्रिओंके लिए चलाये जाते है। ऐसे में कम उत्प्रन्न वाले यात्रिओंको वन्देभारत एक्सप्रेस कहाँ आड़े आती है?

शून्याधारित समयसारणी कार्यक्रम के अंतर्गत कुछ गाड़ियोंको बन्द करना तय किया गया था। यह भारतीय रेल का दूरदृष्टिता विकास कार्यक्रम था। पुराने पारम्परिक कोचेस को बदलकर नए गतिमान आधुनिक LHB कोच लाना, रेल के सम्पूर्ण विद्युतीकरण से लोको का शंटिंग कर बदलने की प्रक्रिया से परिचालन समय की बचत करना, देशभर की पटरियों को उच्च क्षमता में बदलकर उनका मजबूतीकरण करना, सिग्नलिंग यंत्रणाओंको आधुनिक बनाना, सेल्फ प्रोपल्ड लोको वाली ट्रेन सेट को चलाना, मालगाड़ियोंके लिए समर्पित गलियारों का निर्माण, अलग रेल नेटवर्क या रेल दोहरीकरण, तिहरीकरण कर अलग पटरी बनाना, रेलवे स्टेशनोंको आधुनिकता का नया जामा पहनाना ताकी यात्रिओंके आवागमन में गतिशीलता आये, उनका आवागमन सुविधाजनक हो ऐसी व्यवस्था करना यह सारा कार्य भारतीय रेल को आधुनिकता की ओर ले जाने की जद्दोजहद ही तो है, क्या यह भद्दे नैरेटिव चलाने वालोंकी समझ से परे है? शायद नही, मगर बहुत से आम लोग इससे बरगलाए जरूर जा सकते है।

मित्रों, यह बात सच है, देश का आम यात्री साधारण गाड़ियाँ, मेल/एक्सप्रेस में साधारण कोच की कामना रखता है। उसे इन वातानुकूलित प्रीमियम गाड़ियोंकी न ही चाहत है, न ही फिलहाल कोई आवश्यकता। मगर हर व्यवस्था को बेहतर और ज्यादा बेहतर करने का अपना वक्त, समय होता है। जिस तरह आज रेल आधुनिकीकरण का वक़्त चल रहा है, उन सेल्फ प्रोपल्ड डेमू/मेमू गाड़ियोंका का भी वक़्त आएगा और जरूर आएगा। अपनी मांगों, जरूरतों को संजोए रखिये। भारतीय रेल आपकी हर सुविधाओंका ख्याल रख रही है। रेल तिहरीकरण, चौपदरी करण, DFC समर्पित मालगाड़ियोंके कॉरिडोर, बुलेट ट्रेन, हाई स्पीड/सेमी हाई स्पीड कॉरिडोर बन रहे है। ऐसी स्थिति में नियमित रेल मार्गों से न सिर्फ मालगाड़ियां हटेंगी बल्कि प्रीमियम और नॉनस्टॉप गाड़ियाँ भी अलग नेटवर्क पर जा सकती है।

रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट यह प्रसव वेदना है। आनेवाला काल भारतीय रेल के लिए एक उज्वल, उषःकाल लाने वाला है। बस, हम और आप सब इसी का इंतज़ार करते है।

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बस दो दिन और…

01 जून 2023, गुरुवार, जेष्ठ, शुक्ल पक्ष, द्वादशी, विक्रम संवत 2080

जी। बस दो दिन और…! और कोंकण रेलवे पर भी दौड़ने लगेगी वन्देभारत एक्सप्रेस।

Photo Courtsey : twiter @AshwiniVaishnaw

रेल मन्त्री अश्विनी वैष्णव जी का ताज़ा ट्वीट है, बस दो दिन बचे है, कोंकण रेलवे पर मध्य रेल के मुम्बई और कोंकण रेल के मडगांव स्टेशन को वन्देभारत से जुड़ने में। हमे कुछ परिपत्रक मीले है, लेकिन उन में समयसारणी तो है, मगर अभी गाड़ी क्रमांक जाहिर नहीं हुवा है। तो हम और थोडासा इंतज़ार कर लेते है, तब तक आप निम्नलिखित समयसारणी देख अपनी वन्देभारत की सवारी प्रोग्राम सेट कर लीजिए!😊

यह है, प्रस्तावित समयसारणी!
और यह है, उद्धाटन विशेष की समयसारणी
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एक और वन्देभारत…

23 मई 2023, मंगलवार, जेष्ठ, शुक्ल पक्ष, चतुर्थी, विक्रम संवत 2080

’15 अगस्त तक 75 वन्देभारत!’ घोषणा याद है न! थोड़ा बहुत पीछे चल तो रहे है, मगर चल रहे है और जल्द ही देशभर में 75 वन्देभारत चलने लगेंगी।

इसी कड़ी में, अगली वन्देभारत एक्सप्रेस दिल्ली – देहरादून के बीच चलाने की तैयारी हो रही है। निम्नलिखित समयसारणी देखिए, यज्ञपी यह प्रस्तावित समय दिए गए है, बहुत कर यही समय निश्चित किये जायेंगे।

देहरादून से आनन्द विहार के बीच सप्ताह में 6 दिन, प्रत्येक बुधवार को छोड़कर इस वन्देभारत का शेड्यूल बनाया गया है। यह गाड़ी देहरादून से निकलकर हरिद्वार, टपरी, मेरठ सिटी, गाज़ियाबाद होकर आनन्द विहार टर्मिनल पहुंचेंगी। वन्देभारत एक्सप्रेस देहरादून जनशताब्दी के डेढ़ घण्टे बाद चलकर लगभग उसके पीछे ही दिल्ली पहुँचा देंगी। वापसीमे भी जनशताब्दी डेढ़ घण्टे बाद ही का प्रस्थान समय है। जनशताब्दी के यात्रिओंको वन्देभारत की सुपर लग्ज़री यात्रा की ओर आकृष्ट करने का प्रयास है।

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पंधरवीं वन्देभारत, केरल के खाते में!

22 अप्रैल 2023, शनिवार, वैशाख, शुक्लपक्ष, द्वितीया/तृतिया, विक्रम संवत 2080

देश की पंधरवीं वन्देभारत एक्सप्रेस कासरगोड – तिरुवनंतपुरम के बीच चलेगी। दिनांक 25 अप्रैल को माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसके उद्धाटन दौड़ को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

20633 कासरगोड तिरुवनंतपुरम वन्देभारत एक्सप्रेस और 20634 तिरुवनंतपुरम कासरगोड वन्देभारत एक्सप्रेस के नियमित फेरे, सप्ताह में 6 दिन, प्रत्येक गुरुवार को छोड़कर दिनांक 26 अप्रैल से शुरू हो जाएंगे।

इसकी समयसारणी निम्नलिखित है,

यह रही उद्धाटन विशेष की समयसारणी, यह गाड़ी 02634 क्रमांक से तिरुवनंतपुरम से दिनांक 25 अप्रैल को चलेगी।