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भारतीय रेल में आम यात्री के लिए सुनहरा काल

07 अगस्त 2023, सोमवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, सप्तमी, विक्रम संवत 2080

भारतीय रेल! हमारे देश का नैशनल कैरियर! हम आम लोगोंके लिए किफायती, सुरक्षित यातायात का प्रमुख साधन। उपनगरीय यात्रिओंको जोड़े तो किसी पश्चिमी देशोंकी समूची लोकसंख्या गिन लीजिए, इतने यात्रिओंकी एक दिन की ढुलाई, हमारी भारतीय रेल में होती है। क्या देश की प्रचण्ड लोकसंख्या इसका कारण है या भारतीय रेल के अत्यंत किफायती किराए यात्रिओंको रेल यात्रा करने के लिए आकर्षित करते है?

किसी नतीज़े पर पहुंचने से पहले और चर्चाको आगे बढाते है। भारतीय रेल में उपनगरीय गाड़ियाँ छोड़, देश की लम्बी दूरी की रेल यात्राओंको समझते है। इन गाड़ियोंमे सबसे महंगा टिकट वातानुकूल प्रथम श्रेणी का है और सबसे सस्ता द्वितीय श्रेणी का। इसी दायरे में टिकट की तमाम श्रेणियाँ, विभिन्न प्रकार की प्रीमियम, राजधानी, शताब्दी, नवावतारित वन्देभारत, जनशताब्दी, सुपरफास्ट, मेल/एक्सप्रेस और मेमू एक्सप्रेस गाड़ियाँ सम्मिलित है। चूँकि सवारी गाड़ियाँ संक्रमण काल मे बन्द हुई तो फिर आजतक चली ही नही। नही तो ग़ैरउपनगरीय क्षेत्र की सबसे सस्ती द्वितीय श्रेणी टिकट का तमगा उससे न छीन पाता। घनघोर आश्चर्य की बात है, देश की सबसे लम्बी चलनेवाली कन्याकुमारी – डिब्रूगढ़ विवेक एक्सप्रेस जो 4153 किलोमीटर यात्रा करती है, उसके बाद दूसरे क्रमांक की तिरुवनंतपुरम – सिल्चर अरुनोई एक्सप्रेस जो 3915 किलोमीटर चलती है, जिनके एण्ड टु एण्ड यात्रा में चार – चार दिन लग जाते है, उनमें भी द्वितीय श्रेणी साधारण टिकट भारतीय रेल में उपलब्ध है। इन सब बातों के दौरान हमारी रेल यात्री के स्वर्णिम काल की बात तो पिछे रह गई, चलिए लौटते है,

हमारी रेल में 3 प्रकार के यात्री होते है, रोजाना यात्रा करनेवाले, जिनमे बहुतसे यात्री उपनगरीय गाड़ियोंमें यात्रा करते है और इनके पास मासिक/त्रिमासिक (MST/QST) टिकट होता है। दूसरे फ्रिक्वेंट ट्रेवलर अक्सर रेल यात्रा करने वाले यात्री। जो अमूमन महीने – दो महीने में रेल यात्रा करते है। तीसरे कभीकभार यात्रा करनेवाले पर्यटक या कारणवश यात्रा करनी पड़े ऐसे रेल यात्री। इन फ्रिक्वेंट ट्रैवलर या नियमित यात्रा करनेवाले लोगोंकी चर्चा में भारतीय रेल में आम यात्रिओंका स्वर्णिम काल, संक्रमण के बाद जो ‘केवल आरक्षित यात्री’ बन्धन में यात्री गाड़ियाँ चल रही थी, वह था। है न, आश्चर्यभरी बात!

इसके लिए हमें आजकल भारतीय रेल के 90 फीसदी गाड़ियोंमे जो धान्दली चल रही है, उसे समझना होगा। रेल गाड़ियोंकी संरचना मानकीकरण के नामपर द्वितीय श्रेणी साधारण कोचों की कटौती, यात्री सुविधाओं की निगरानी रखनेवाले TTE चल टिकट निरीक्षक की कमी, और स्लिपर क्लास के रद्द नही किये गए प्रतिक्षासूची वाले काउंटर टिकट धारी यात्री, कम अन्तर यात्रा करनेवाले नियमित मासिक पास धारक और अनारक्षित टिकट धारक यात्री तमाम लोग बड़ी बेदरकारी से आरक्षित स्लिपर कोच और वातानुकूल थ्री टियर में धड़ल्ले से घुस कर यात्रा करने वाले यात्री। आज की ताजा ख़बर है, हावडा – चेन्नई मेल के आरक्षित कोच के यात्रिओंने खड़गपुर स्टेशनपर कोच में घुसे अनारक्षित यात्रिओंको निकाल बाहर करने तक गाड़ी को रोके रखा। यह गाड़ी खड़गपुर स्टेशनपर 4 घण्टे खड़ी रही।

आज कल की रेल गाड़ियोंकी स्थिति

यह सारी धान्दली, संक्रमण काल मे और बाद के लगभग 1 वर्ष तक बिल्कुल बन्द थी। केवल अग्रिम आरक्षण प्राप्त यात्री ही स्टेशन के अहाते में आ सकते थे। साधारण टिकट पूर्णतः बन्द कर दिए गए थे। अनारक्षित यात्रिओंके लिए रेलवे स्टेशन और तमाम यात्री गाड़ियाँ बन्द थी। सारे द्वितीय साधारण कोच में 2S आरक्षित द्वितीय सिटिंग के भाँती बुकिंग्ज की जा रही थी। तमाम मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट गाड़ियोंमें जितनी बुकिंग बस उतने ही यात्री यह माहौल था। केवल आवश्यकता पड़नेपर ही यात्री टिकट आरक्षित कर रेल यात्रा के लिए स्टेशनोंपर पहुंच रहा था। इस काल को यह लोग आम यात्रिओंके लिए स्वर्णिम काल कह रहे है।

मित्रों, यहॉं आपको निश्चित ही हैरानी लग रही होगी, बन्धनोंमें रहकर रेल यात्रा स्वर्णिम काल कैसे हो सकती है? क्या आरक्षित कोच में अनारक्षित यात्रिओंका यात्रा न करना यह उस संक्रमण काल का ही नियम था, पूर्वचलित न था? क्या MST धारक की स्लिपर क्लास में यात्रा करने की अनुमति है? क्या काउंटर का छपा टिकट वेटिंग लिस्ट में रह जाये तो भी आरक्षित श्रेणी में यात्रा कर सकता है? नहीं ना? फिर अब क्यों यह लोग नियमोंको ताक पर रख धान्दली मचा रहे है? क्यों रेल के टिकट जाँच दल, रेल्वेके अधिकारी अनाधिकृत यात्रिओंको दण्डित नही करते है? संक्रमण काल मे जो यात्री अनाधिकृत थे वे अब भी अनाधिकृत ही है। बस, फर्क यह है, लोगोंको नियमोंको ताक पर रखने की आदतसी हो गयी है। रेल विभाग को अपने वर्षोँ चले ढर्रों पर कायम है। हजारों किलोमीटर की साधारण टिकटें जारी कर ही रही है। अब भी काऊंटर्स की प्रतिक्षासूची में रह जानेवाली टिकट को बिना टिकट मान कर दण्डित करने में लापरवाही बरती जा रही है।

अब रेल प्रशासन को अपने आदि-अनादि काल के नियमोंको बदलने का वक्त आ गया है। कोई यात्री गाड़ी 500 किलोमीटर से ज्यादा यात्रा करनेवाली है, उसे सम्पूर्ण आरक्षित गाड़ी कर चलाया जाना चाहिए। इसके साथ ही 500 किलोमीटर से कम अन्तर की इंटरसिटी गाड़ियाँ, 250 किलोमीटर से आसपास अन्तर चलनेवाली अनारक्षित डेमू/मेमू गाड़ियोंकी समुचित व्यवस्था करना चाहिए। मासिक पास, द्वितीय अनारक्षित टिकट केवल इंटरसिटी और कम अन्तर वाली डेमू/मेमू तक ही सीमित होना चाहिए। MST टिकट में सड़क पर लगनेवाले टोल नाकोंकी तरह दखल ली जाए। यह जो भी स्टेशन डेवलपमेंट योजनाओं के अंतर्गत स्टेशनोंपर आगमन, एन्ट्री पॉइंट पर भी यात्री टिकट, पास चेक हो और अधिकृत व्यक्ति ही रेल आहाते में आए। यह इतनी सी अपेक्षाओंकी पूर्तता होती है तो भारतीय रेल सदा के लिए अपने यात्रिओंके लिए स्वर्णिम काल लेकर आएगी।

Photo courtesy : http://www.indiarailinfo.com

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सोलापुर और शिर्डी वन्देभारत अब ठाणे, कल्याण के यात्रिओंको भी अनुग्रहित करेंगी। 😊

03 अगस्त 2023, गुरुवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, द्वितिया, विक्रम संवत 2080

मध्य रेल की दो वन्देभारत एक्सप्रेस, 22225/26 मुम्बई सोलापुर मुम्बई और 22223/24 मुम्बई साईं नगर शिर्डी मुम्बई अपने फेरों में दिनांक 04 अगस्त से ठाणे और कल्याण यह स्टोपेजेस नियमित रूप से जोड़ने जा रही है। समयसारणी निम्नलिखित है,

मित्रों, वन्देभारत एक्सप्रेस की जो बनावट है, अविष्कार है, दरअसल बनी ही ऐसी है की उसे तुरन्त तीव्र गति से चलाया जा सके (क्विक पीकअप) और उतनी ही शीघ्रता से रोकी भी की जा सकती है ( क्विक कण्ट्रोल) और तो और इस परिचालन के दौरान यह गाड़ी विद्युत पुनरुत्पादन भी करती है। (ऑटो जनरेशन) ऐसी विशिष्टता के साथ चलनेवाले इस क्रान्तिकारी अविष्कार को जब यात्रिओंके बेहतर उपयोग हेतु अधिकाधिक स्टोपेजेस दिए जाते है, यात्री उसका उपयोग करते है तो यह बात रेल प्रशासन और क्षेत्र के यात्रिओंके लिए लाभदायक ही है।

रेल प्रशासन को चाहिए की वह सभी वन्देभारत एक्सप्रेस के मार्गोंके यात्रिओंके रुचि और जरूरत, मांग पर विचारपूर्वक निर्णय ले कर उनके स्टोपेजेस बढ़ाए। इससे कुछ वन्देभारत गाड़ियोंमे निम्नतम यात्रीभार के चलते, जो रियायती किरायोंमें चलाने की मजबूरी भरी योजनाओं को लाना पड़ रहा है, शायद उससे भी ना लाना पड़े। वैसे एक अभ्यास के अनुसार किसी वन्देभारत एक्सप्रेस का यात्रीभार 30 प्रतिशत से ज्यादा है तो वह अपने परिचालन खर्च की भरपाई कर रही है।

एक बात और है, वन्देभारत एक्सप्रेस यह संकल्पना बहुत सुन्दर, जबरदस्त है, बस आम यात्रिओंको इसके पर्यायोंसे तुलनात्मक अभ्यास करने की जरूरत न पड़े!😊 आम आदमी अभी भी अपने कमाई को कम्फर्ट और यात्रा अवधि के मुकाबले दाँव पर नही लगाना चाहता है। उसे अभी भी यात्रा अवधि थोड़ा ज्यादा लग रहा है तो उसकी परवाह नहीं है, बशर्ते पैसे दुगने न लगते हो, कुछ बचत हो जाये। जहाँ सड़क परिवहन मुकाबले में आ जाये तो फिर क्या कहने? वहाँ वन्देभारत पसंदीदा श्रेणी में नही आ सकती। इन्दौर – भोपाल मार्ग पर यही हो रहा है। वहाँ मार्ग की वॉल्वो गाड़ियाँ किराए और यात्री बोर्डिंग, डीबोर्ड में कडी टक्कर में है।

खैर, कल्याण, ठाणे के यात्रिओंको वन्देभारत यात्रा की बधाई!☺️

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अमृत भारत योजना के अंतर्गत आम आदमी अब, अपने गाँव, शहर के रेल्वे स्टेशन को अद्ययावत कराने में सहभाग लेगा!

02 अगस्त 2023, बुधवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, प्रतिपदा, विक्रम संवत 2080

भारतीय रेल अपने स्टेशनोंके उन्नतिकरण, सुधार योजना, अमृत भारत मे देश के नागरिकोंको सहभागी कर रही है। आज भारतीय रेल हर रोज तकरीबन 14,000 यात्री गाड़ियोंके जरिये, सवा दो करोड़ यात्रिओंको, देश के 7,500 स्टेशनोंपर सेवा दे रहा है। इन मे से 1,200 स्टेशनोंके रिडेवलपमेंट के कार्य “अमृत भारत स्टेशन” योजना के अंतर्गत किये जाने है। रेल प्रशासन चाहता है, रेल का प्रत्येक यात्री, स्टेशन सुधार में सलाह देकर सहभाग ले।

रेल प्रशासन को निम्नलिखित मदों में, यात्रिओंसे सलाह की अपेक्षाएँ है,

मौजूदा FOB फुट ओवर ब्रिज, ऊपरी पैदल पुलिया के अलावा अतिरिक्त FOB की आवश्यकता

स्टेशनसे प्लेटफार्म पर पहुंचने हेतु यन्त्रचलित सीढियां (एस्कलेटर), उद्वाहन (लिफ़्ट) की आवश्यकता

रेल्वे स्टेशन के अहाते और यात्री बरामदे में यथोचित सुधार

सार्वजनिक शौचालय और साधारण प्रतिक्षालयोंमे सुधार और सुविधाओंकी माँग

स्टेशन के बाहरी रचना को आकर्षक बनाना

स्टेशन की समूची विद्युत प्रकाश योजनाओं में सुधार

स्टेशनपर यात्री सुविधाओंका दृश्य मानकीकरण करना, अर्थात साइन बोर्ड्स, कोच पोजिशन इंडिकेटर, डिस्प्ले इत्यादि की माँग

स्टेशनपर उपलब्ध वाहनतल व्हीकल पार्किंग की सुविधा में सुधार की मांग

प्लेटफार्म्स पर उपलब्ध शेड की सुविधा

यूँ तो रेलवे इन सारी वस्तुविधान के लिए वर्षोँसे समितियाँ बनाती रहती है। स्टेशन लेवल पर प्लेटफॉर्म यूजर कमिटी, मन्डल स्तर पर DRUCC, क्षेत्रीय स्तर पर ZRUCC, NRUCC इत्यादि, लेकिन इस बार रेल प्रशासन से आम यात्री अपनी दरख्वास्त ट्वीट, ईमेल या निम्नलिखित लिंक से सीधे कर सकता है।

https://indianrailways.gov.in/railwayboard/FeedBackForm/index.jsp

अपनी सलाह भेजनेके लिए अंतिम तिथि 15 अगस्त 2023 है। तो चलिए, सुधारिए अपने स्टेशन को अपने हिसाब से! एक ध्यान रखे, आप कहीं स्टोपेजेस, नयी गाड़ियोंको चलवाने की फेहरिस्त मत जोड़ दीजिएगा। ☺️😊

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गोवा एक्सप्रेस का मनमाड़ स्टेशनसे, अपने निर्धारित समय से 85 मिनट पहले छूट जाने के अकल्पनीय हादसे पर मरे की ओर से खुलासा…

30 जुलाई 2023, रविवार, अधिक श्रावण, शुक्ल पक्ष, द्वादशी, विक्रम संवत 2080

मित्रों, कल हमारे ब्लॉग पर एक खबर प्रसारित की गई थी, “अरे! हमारी रेल्वे में ऐसा भी होता है?☺️😊” दरअसल तमाम मीडिया में यह ‘गोवा एक्सप्रेस’ वाली खबर उछली और उसपर मध्य रेल को जवाब देना जरूरी था। हम चाहते तो, ‘प्रेस नोट’ को मीडिया वाले संस्कार कर एक अलग पोस्ट बनाकर ला सकते थे, लेकिन हम यहाँ उस प्रेस नोट को यथावत दे रहे है। हालाँकि इसके बाद भी पाठकोंके अनसुलझे सवाल कायम है। पहले आप मध्य रेल की प्रेस नोट समझे, आगे कुछ प्रश्न हम रख ही रहे है,

मध्य रेल
प्रेस विज्ञप्ति

 रेलवे कर्मचारियों के अनुकरणीय प्रयासों ने यात्रियों के लिए आरामदायक यात्रा  सुनिश्चित की

 हुब्बलि मंडल के ब्रागांज़ा घाट खंड के कैसल रॉक – कैरनज़ोल स्टेशनों के बीच भूस्खलन के कारण, 26 जुलाई, 2023 को वास्को डी गामा से शुरू हुई ट्रेन संख्या 12779 वास्को-डी-गामा – हज़रत निज़ामुद्दीन एक्सप्रेस को मडगांव, माजोर्डा के रास्ते चलाने के लिए डायवर्ट किया गया था । जिसे निर्धारित मार्ग पर बिना ठहराव के संवाइडे कुडचडे , कालें, केसलरॉक, लोंडा, बेलगावी, घाटप्रभा, रायबाग, कुडची, मिरज, सांगली, कराड, सतारा, पुणे, दौंड कॉर्ड लाइन, अहमदनगर के बजाय वाया मडगांव, माजोर्डा मदुरे, रोहा, पनवेल, कर्जत और मनमाड के रास्ते चलाया गया।

 दिनांक 27/7/2023 को ट्रेन संख्या 12779 डाउन वास्को डी गामा-हज़रत निज़ामुद्दीन एक्सप्रेस को उसके निर्धारित रूट मिराज-पुणे-दौंड कॉर्ड लाइन के बजाय पनवेल-कल्याण-मनमाड के रास्ते डाईवर्ट किया गया था । इस डाईवर्जन के कारण, ट्रेन का मनमाड स्टेशन पर आगमन अपने निर्धारित समय से पूर्व 9:01 बजे हुआ और प्रस्थान 9:10 बजे जो अपने पूर्व निर्धारित समय के स्थान पर 10:35 बजे के बजाय 85 मिनट पूर्व ही मनमाड़ स्टेशन से हो गया । ट्रेन के समय से पूर्व प्रस्थान करने के कारण 3 ऑन बोर्ड टिकट चेकिंग स्टाफ और 44 आरक्षित यात्री ट्रेन में चढ़ नहीं सके।

 इस भगदड़ की स्थिति को स्टेशन कर्मचारियों द्वारा बड़ी सूझ-बूझ के साथ प्रबंधित किया गया और यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने की सुगम व्यवस्था की गई । स्टेशन प्रबंधन द्वारा वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था के संबंध में मनमाड स्टेशन पर बार-बार घोषणा की गई, यात्रियों के मार्गदर्शन और मदद के लिए टिकट चेकिंग स्टाफ और आरपीएफ कर्मियों को तैनात किया गया।  सभी यात्रियों को बैठने की व्यवस्था और जलपान भी प्रदान किया गया।  उप स्टेशन अधीक्षक की निगरानी में तीन यात्रा टिकट परीक्षक और 5 और टीटीई (कुल 8 टिकट चेकिंग स्टाफ), 3 रेलवे सुरक्षा बल के जवान, 3 वाणिज्यिक कर्मचारी  यात्रियों की मदद में निरंतर जुटे हुए थे ।  इस बीच, ऑपरेटिंग और वाणिज्यिक कर्मचारियों ने ट्रेन संख्या 12859 सीएसएमटी-हावड़ा गीतांजलि एक्सप्रेस को मनमाड में विशेष ठहराव (हॉल्ट) प्रदान करने के प्रयास किए और 8 टीटीई बचे हुए यात्रियों के साथ गीतांजलि एक्सप्रेस में जलगांव तक गए।  जलगांव में, स्टेशन प्रबंधक के साथ 2 और टीटीई, 2 आरपीएफ ने यात्रियों आगे की यात्रा में मदत कर जलगांव में उनकी निर्धारित ट्रेन 12779 वास्को डी गामा – हजरत निजमुद्दीन एक्सप्रेस में चढ़ने की व्यवस्था की।

यात्री अपनी यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए रेलवे कर्मचारियों द्वारा की गई व्यवस्थाओं और प्रयासों से प्रसन्न और संतुष्ट थे।

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 दिनांक: 29 जुलाई, 2023
 पीआर नंबर 2023/07/47
 यह प्रेस विज्ञप्ति जनसंपर्क विभाग, मध्य रेल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस मुंबई द्वारा जारी की गई है

मित्रों, रेल विभाग कोई ‘वन मैन शो’ तो नही है। पूरा का पूरा महकमा लगा रहता है।

जब गाड़ी अपने निर्धारित समयसे 90 मिनट, रेल्वेके हिसाब से 85 मिनट पहले आयी तो उसकी रिपोर्टिंग कमर्शियल कंट्रोल पर हुई होगी। परिचालन विभाग ने भी समझा होगा। गाड़ी के लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर याने गार्ड, चेकिंग स्टाफ़ जो मनमाड़ जंक्शन पर अपनी ड्यूटी बदल रहे थे। क्या किसी ने इस बात पर आपत्ति नहीं ली होगी? क्या गार्ड, लोको पायलट इगतपुरी से भुसावल तक थ्रू बुक किए गए थे? क्या मनमाड़ से नया परिचालक दल, वाणिज्यिक दल बदला नहीं गया था? क्या मुख्यालय से 12779 वास्को निजामुद्दीन गोवा एक्सप्रेस को मनमाड़ से निर्धारित समयसारणी से चलाने की अग्रिम सूचनाएं नही मिली थी?

गौरतलब यह है, रेल विभाग ने डैमेज़ कंट्रोल बखूबी निभाया। यात्रिओंको संभालकर, सहेजकर अपनी नियोजित रेल यात्रा में फिर पुनर्स्थापित किया। मगर जो प्रश्न यात्रिओंको खाये जा रहे है, वह रेल विभाग की ‘इंटर्नल इनक़्वायरी’ से शायद ही मीडिया तक पहुँचेंगी। कहते है न, बून्द से गयी वह हौज से क्या आएगी? 😢

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इन्दौर – दाहोद नई रेल लाइन, रतलाम – खण्डवा गेज कन्वर्जन और बरलाई – लक्ष्मीबाई नगर रेल दोहरीकरण पर भारतीय रेल सीईओ की समीक्षा बैठक

24 जुलाई 2023, सोमवार, अधिक श्रावण, शुक्ल पक्ष, षष्टी/सप्तमी, विक्रम संवत 2080

23 जुलाई, 2023 को चेयरमैन व सीईओ, रेलवे बोर्ड अनिल कुमार लाहोटी ने पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के इंदौर स्थित उप मुख्य इंजीनियर (निर्माण) कार्यालय कांफ्रेंस हॉल में महाप्रबंधक, पश्चिम रेलवे अशोक कुमार मिश्र के साथ इंदौर क्षेत्र में चल रहे विभिन्‍न प्रोजेक्टों समीक्षा बैठक की।

बैठक के दौरान रतलाम – खंडवा गेज कन्वर्जन, दाहोद – इंदौर नई लाइन व बरलई – लक्ष्मीबाईनगर दोहरीकरण प्रोजेक्ट की प्रगति को पॉवर पॉइंट
प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया गया। इसके अलावा रतलाम मंडल की लोडिंग परफॉरमेंस व संरक्षा रिव्यू जैसे विषय पर भी चर्चा की गई।

इस दौरान मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) विनीत गुप्ता, मंडल रेल प्रबंधक रतलाम रजनीश कुमार, चीफ इंजिनियर (निर्माण) धीरज कुमार के
अतिरिक्‍त मंडल व निर्माण विभाग के अन्‍य अधिकारी भी मौजूद थे बैठक से पूर्व, पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक अशोक कुमार मिश्र ने महू रेलवे
स्टेशन का निरीक्षण भी किया।

प्रेजेंटेशन के दौरान बताया गया कि महू- मुख्त्यारा बलवाडा सेक्शन (71किमी) में फाइनल लोकेशन सर्वे लगभग पूरा हो चुका हैI इस खंड में नया
अलाइनमेंट फाइनल किया जा चुका है तथा जियो टेक्निकल सर्वे का कार्य भी 80% पूरा हो चुका है। खंड में भूमि अधिग्रहण तथा फॉरेस्ट विभाग से
क्लीयरेंस का कार्य भी प्रगति पर है। महू- मुख्त्यारा बलवाडा सेक्शन में नए अलाइनमेंट मे 21 टनल, 36 बड़े पुल, 76 छोटे पुल, 12 रोड अंडर ब्रिज व
3 रोड ओवर ब्रिज बनाने होंगे। इस सेक्शन में बडीया-बेका के बीच बनने वाली 4.1 किमी की टनल के लिये टेंडर कर दिए गये हैI इसके अतिरिक्त क्योंकि यह रेलखंड जंगल से गुजरता है, अतः जंगली जानवरों के आने-जाने के लिए भी उचित
व्यवस्था का प्रावधान किया जा रहा है। इस सेक्शन की फाइनल सर्वे रिपोर्ट भी राइट्स लिमिटेड द्वारा तैयार कर ली गई है।

इस प्रोजेक्ट के राऊ – पतालपानी खंड में बड़ी लाइन व राऊ-डॉ. अम्‍बेडकरनगर दोहरीकरण कार्य का लक्ष्य इसी साल रखा गया है। दूसरी ओर से सनावद – खंडवा सेक्शन का कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा खंडवा बाईपास केबिन व खंडवा (5.92 km) सेक्शन को भी जनवरी में पूर्ण कर लिया गया है। इसके अतिरिक्त ओमकारेश्वर के पास नर्मदा नदी पर पुल बनाने का कार्य भी प्रगति
पर है। महू यार्ड में फार्मेशन व लिंकिंग वर्क भी शुरू किया जा चुका है इसके अलावा स्टेशन प्लेटफ़ॉर्म व पैसेंजर शेड का कार्य भी प्रगति पर है।

बैठक के दौरान बताया कि दाहोद –इंदौर नई लाइन के झाबुआ- धार खंड में फाइनल लोकेशन सर्वे का कार्य लगभग पूरा हो चुका है तथा फाइनल लोकेशन सर्वे की रिपोर्ट 31 अगस्त, 2023 तक तैयार कर ली जाएगी।

टीही व धार के बीच कार्य प्रगति पर है। टिही – पीथमपुर खंड में दोनों तरफ से सुरंग का कार्य शुरू हो चुका है। पीथमपुर साइड से ब्लास्टिंग व खुदाई
कार्य प्रगति पर है वही टीही की साइड से ब्लास्टिंग कार्य शुरू हो गया है। टीही से धार व कटवारा से झाबुआ के बीच अर्थ वर्क एवं ब्रिज निर्माण
कार्य चल रहा हैI

बैठक के बाद रेलवे बोर्ड चेयरमैन व सीईओ श्री अनिल कुमार लाहोटी ने मीडिया कर्मियों से भी संवाद किया तथा बताया कि इंदौर के आस-पास के क्षेत्र की रेल परियोजनाओं को पश्चिम रेलवे प्राथमिकता पर ले रहा है तथा इन परियोजनाओं को तेज गति से पूरा करने के लिए सभी संभव कदम उठाए जा रहे है।

जनसंपर्क अधिकारी, रतलाम मंडल द्वारा प्राप्त प्रेस नोट पर उधृत