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अमृतभारत और वन्देभारत, कदापि तुलना न कीजिए!

31 दिसम्बर 2023, रविवार, पौष, कृष्ण पक्ष, चतुर्थी, विक्रम संवत 2080

30 दिसम्बर 2023 से भारतीय रेलवे के लम्बे-चौडे यात्री गाड़ियोंके बेड़े में ‘अमृतभारत’ एक्सप्रेस का प्रवेश हुवा। यूँ तो यह भारतिय रेल की वन्देभारत नामक प्रीमियम गाड़ी के लगभग साथ, संगत और संकल्पनाओं की ही, शुरू की गई गाड़ी है। फर्क है, इनमें उपलब्ध सुख-सुविधाओं और श्रेणियोंका। वन्देभारत प्रीमियम दर्जे की सम्पूर्ण वातानुकूलित, खानपान सुविधाओं से युक्त गाड़ी है और ‘अमृतभारत एक्सप्रेस’ एक सर्वसाधारण जनसाधारण, अंत्योदय वर्ग की मगर शयनयान युक्त, नियमित मेल/एक्सप्रेस की तरह ग़ैरवातानुकूलित गाड़ी है। जिसमें सर्वसाधारण यात्री अपनी रेल यात्रा करने की सोच सकता है। वैसे वन्देभारत में अमृतभारत में समानता केवल दोनों सिरे पर लगे लोको या ट्रेनसेट होने की ही है और इससे ज्यादा कुछ नही।

आजकल ‘रेल इंफ्लुएंसर’ रेल गाड़ियोंकी प्रसिद्धि करनेवाले, यात्रिओंको प्रभावित कर उनका मतपरिवर्तन करने में स्वतः को सक्षम (?) समझने वाले लोग सोशल मिडिया में तैयार ही रहते है। फटाफट वन्देभारत और अमृतभारत एक्सप्रेस की तुलना करने में लग गए है। केवल ट्रेनसेट यही एक मानदण्ड समझना है, तो EMU या वातानुकूलित EMU उपनगरीय गाड़ियाँ या अभी अभी संक्रमण काल के बाद जिसका अविष्कार भारतीय रेल में लाया गया और सर्वसाधारण वर्ग के किफायती किराए वाली सवारी गाड़ियोंको हटाकर मेल/एक्सप्रेस के किरायोंमे थोपा गया, वह मेमू, डेमू गाड़ियाँ भी तो ट्रेनसेट ही है। 😊

वन्देभारत और अमृतभारत में तुलना करनेवालोंको बता दे, सबसे पहले, यात्रीगण, जो लंबी दूरी की रेल यात्रा करने के इच्छुक होते हैं, जिन्हें समय की ज्यादातर परवाह नहीं है, वे बस कम से कम ट्रेन में अपने पैर धरने के लिए पर्याप्त जगह चाहते हैं। वे बस, ट्रेन की दिशा का पता लगाते हैं और उसमें चढ़ जाते हैं। ये सभी द्वितीय श्रेणी, जनरल, साधारण श्रेणी के यात्री हैं। वे ट्रेन के नाम, उसके दर्जे और उसमें मिलने वाली सुविधाओंके, जो भारतीय रेलवे बताती है, दीनदयालु कोच में वाटर फ़िल्टर, अमृतभारत एक्सप्रेस में लगी डेस्क या कुशण्ड सीट्स के बारे में नहीं सोचते। वैसे जानकारी के लिए बता दें, आजकल शायद ही किसी दीनदयालु कोच में वाटर फिल्टर काम कर रहे होंगे और जै चलते भी होंगे, तो वहाँ तक कोच में भरी बेतहाशा भीड़ के चलते, बेचारा यात्री पहुंच ही नहीं पाता होगा।

वन्देभारत यात्रियों के लिए यह सब मामला अलग हो जाता है। वे संभ्रांत वर्ग के लोग हैं, जो अपनी सुख-सुविधा पर खर्च कर सकते हैं और यह भी अच्छी तरह से जानते हैं की अपने व्यवसाय, नौकरी या अन्य किसी चीज के लिए खर्च की गई राशि को कैसे पुनः प्राप्त किया जाए। अतः उनके लिए वन्देभारत के महंगे किराए कोई मायने नही रखते। उन्हें अपने यात्रा समय और यात्रा के दौरान मिलने वाली सेवाओं, सुविधाओं की ज्यादा चिन्ता रहती है।

इसलिए अमृतभारत और वन्देभारत एक्सप्रेस गाड़ियों के बीच कोई तुलना नहीं है। अमृतभारत एक्सप्रेस तो बस एक नाम है, यह वही मेल/एक्सप्रेस गाड़ी है, जो फिलहाल द्वितीय श्रेणी के जनरल टिकट धारकों से भरी चल रही है।

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छह वन्देभारत एवं दो अमृतभारत एक्सप्रेस गाड़ियोंका का 30 दिसम्बर को शुभारंभ, समयसारणी जारी।

29 दिसम्बर 2023, शुक्रवार, पौष, कृष्ण पक्ष, द्वितीया/तृतीया, विक्रम संवत 2080

1: मालड़ा टाउन बेंगलुरु मालड़ा टाउन अमृतभारत एक्सप्रेस

13434 मालड़ा टाउन बेंगलुरु साप्ताहिक अमृतभारत एक्सप्रेस दिनांक 07 जनवरी 2024 से प्रत्येक रविवार को मालड़ा टाउन से नियमित चलना शुरू करेंगी। वापसी में 13433 बेंगलुरु मालड़ा टाउन साप्ताहिक अमृतभारत एक्सप्रेस दिनांक 09 जनवरी 2024 से प्रत्येक मंगलवार को चलेंगी।

गाड़ी की कोच संरचना : 12 स्लिपर, 7 द्वितीय साधारण, 2 एसएलआर कुल 21 कोच और दोनों सिरेपर लोको यह पूरा ट्रेन सेट है।

समयसारणी :

2: 15557/58 दरभंगा आनन्द विहार टर्मिनस दरभंगा अमृतभारत एक्सप्रेस

15557 दरभंगा आनन्द विहार टर्मिनस द्विसाप्ताहिक अमृतभारत एक्सप्रेस दिनांक 01 जनवरी 2024 से प्रत्येक मंगलवार एवं गुरुवार को दरभंगा से नियमित चलना शुरू करेंगी। वापसी में 15558 आनन्द विहार टर्मिनस दरभंगा द्विसाप्ताहिक अमृतभारत एक्सप्रेस दिनांक 02 जनवरी 2024 से प्रत्येक मंगलवार एवं शुक्रवार को चलेंगी।

गाड़ी की कोच संरचना : 11 स्लिपर, 9 द्वितीय साधारण, 2 एसएलआर कुल 24 कोच और दोनों सिरेपर लोको यह पूरा ट्रेन सेट है।

समयसारणी :

वन्देभारत एक्सप्रेस गाड़ियाँ

22488/47 अमृतसर दिल्ली जंक्शन अमृतसर वन्देभारत एक्सप्रेस सप्ताह में छह दिन, प्रत्येक शुक्रवार छोड़कर चला करेंगी।

स्टोपेजेस : बियास, जालन्धर कैंट, फगवाड़ा, लुधियाना, अम्बाला कैंट

20642/41 कोयम्बटूर बेंगलुरु कैंट कोयम्बतूर वन्देभारत एक्सप्रेस सप्ताह में छह दिन, प्रत्येक गुरुवार छोड़कर चला करेंगी।

स्टोपेजेस : तिरुप्पुर, इरोड़, सालेम, ओमालूर, धरमपुरी, होसुर

20705/06 जालना मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस जालना वन्देभारत एक्सप्रेस सप्ताह में छह दिन, प्रत्येक बुधवार छोड़कर चला करेंगी।

स्टोपेजेस : औरंगाबाद, मनमाड़, नासिक रोड़, कल्याण, ठाणे, दादर

इसके अलावा कटरा नई दिल्ली कटरा, अयोध्या आनन्द विहार टर्मिनस अयोध्या और मंगालुरु मडगांव मंगालुरु ऐसी तीन और वन्देभारत गाड़ियोंका शुभारंभ 30 दिसम्बर को होने जा रहा है, जिसकी विस्तृत जानकारी हम लाने का प्रयास कर रहे है।

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भारतीय रेल, आम आदमी के लिए नैशनल कैरियर! मगर लोकप्रतिनिधियोंकी दखल, क्षेत्र के लिए प्रश्न गिनेचुने, नाममात्र।

27 दिसम्बर 2023, बुधवार, पौष, कृष्ण पक्ष, प्रतिपदा, विक्रम संवत 2080

एक सर्वे तो इस मुद्दे पर हो ही जाए! ऐसा कोई सांसदीय क्षेत्र शायद ही होगा, जहाँ के स्थानीय रेल उपयोगकर्ता उनके लोकप्रतिनिधि से संतुष्ट होंगे। कुछ नेता गण अपवाद है, मगर कितने 2% या 3%?

जी। हाल ही में एक रेल संगठनोंकी गोष्ठी में इस विषय पर वार्तालाप हुवा और बात बढ़ते बढ़ते क्षेत्र के लोकप्रतिनिधियोंके, रेल यात्रिओंके लिए, उनकी रेल सुविधाओं सम्बन्धी समस्याओं के विषय मे सदन में वार्तालाप करने या समस्याओं का समाधान करने के लिए पहल करने पर जाकर खत्म हुई। नतीजा चौकाने वाला था। प्रत्येक संगठन इस बात से सहमत था, उनके प्रश्नोको सुलझाने हेतु उचित प्रतिनिधित्व नही मिल रहा है।

कहा गया है, इस कैलेंडर वर्ष में भारतीय रेल के यात्रिओंकी संख्या 700 करोड़ से भी ज्यादा है और संशोधन का विषय रहेगा, भारतीय रेल के यात्रिओंकी समस्याओं के समाधान हेतु उठने वाले प्रश्न अनुपात में कितने थे?

हम भारतियोंकी उच्चतम सहिष्णुता का नमूना देखना हो तो भारतीय रेल में यात्रा कर के देखिए। भाईसाहब, वन्देभारत जैसी प्रीमियम गाड़ियोंमें नही, आम भारतियोंकी कोई भी मेल/एक्सप्रेस की किसी भी श्रेणी का आरक्षित टिकट लेकर यात्रा कीजिएगा। चूँकि आप अनारक्षित द्वितीय श्रेणी में तो यात्रा करना दूर, प्रवेश भी नही कर पाओगे अतः आरक्षित कोच का विकल्प दे रहे है। ग़ैरवातानुकूलित स्लिपर क्लास की स्थिति अब द्वितीय श्रेणी अनारक्षित कोच की तरह रहती है और वातानुकूलित थ्री टियर, टु टियर की शयनयान स्लिपर की तरह। यात्री जस तस अपनी बर्थ पर जाकर जम जाए तो बेहतर है, उसके बाद न तो वह कोच में लगे बेसिन का न ही शौचालय का उपयोग कर पाता है।

वातानुकूलित थ्री टियर है जी।
यह तो ए सी फर्स्ट क्लास है!!!

रेल प्रशासन ने कोच संरचना के मानकीकरण के नाम पर जो कहर बरपाया है, वह अदभुत, अकल्पनीय है। निजामुद्दीन से वास्को के बीच प्रतिदिन चलनेवाली गोवा एक्सप्रेस का उदाहरण लीजिए। गाड़ी की कोच संरचना मानकीकरण में बदली, मात्र दो कोच द्वितीय श्रेणी और दो ही कोच स्लिपर के। अब परिस्थिति यह है, प्रतिदिन इस गाड़ी के वातानुकूलित कोच साधारण अनारक्षित कोच की तरह भरे रहते है। यात्रिओंकी सुविधाओं का कोई माई-बापू नही। आरक्षण कर यात्रा करने वाला यात्री वर्ष में कितनी बार रेल में पहुंचता होगा? हद हो गई दो या तीन बार। एक बार यात्रा पूर्ण हुई वह उसके कटु अनुभव पीछे छोड़ देता है। कोई शिकायत या पत्राचार नही करता और प्रण लेता है, आगे से और अप्पर क्लास की टिकट लेकर यात्रा करने का प्रयत्न करेगा।

क्या हमारे जनप्रतिनिधि अपने अपने क्षेत्र से गुजरने वाली रेलगाड़ियों की ऐसी भीषण परिस्थितियों से अवगत नही है? सवारी गाड़ियोंके किफायती किराए, उन गाड़ियोंके साथ ही अदृश्य हो गए। उनकी जगह ‘0’ शून्य क्रमांक से शुरू होनेवाले विशेष गाड़ियोंका चलन आ गया। ऐसी विशेष गाड़ियाँ जो कभी समयपर नही चलती, जिनके कोचेस अमूमन पुराने जमाने के होते है, जिनके साधारण किराए ही ‘तत्काल’ दर से वसूले जाते है, जिनके परिचालन की कोई शाश्वती (गारण्टी) नही होती।

रेलवे स्टेशनोंपर पहले वर्दीधारी टिकट जांच निरीक्षक उपस्थित रहते थे जो आज कल गाड़ियोंमे अकस्मात जाँच दलोंमें चल रहे है। स्टेशनोंके आगमनोंमें आगंतुकों पर कोई पाबन्दी नही थी अब तो गंतव्यों पर भी कम ही दिखाई पड़ती है। लाखों रुपए मूल्योंके स्कैनर केवल दिखावे मात्र भर रह गए है। उन स्कैनरोंके पास भले ही जाँच अधिकारी उपस्थित हो मगर रेलवे स्टेशनोंपर पहुंचने के कई अन्य रास्ते राजमार्ग की तरह सरे आम खुले रहते है। ऐसी शायद ही कोई मेल/एक्सप्रेस होगी जिनमे यात्रिओंको अवैध विक्रेता, त्रुतीयपंथी, भीख मांगने वाले, फटेहाल झाड़ू लगानेवालों से सामना न करना पड़ता हो।

वहीं बात गाड़ी में खान-पान सामग्री बेचनेवाले वेंडर्स की भी है। कभी बिल पर बहस तो कभी सामग्री की गुणवत्ता पर खिचखिच। आम यात्री यह मान चुका है, पानी बोतल ₹20/- में ही मिलती है।

आप सोचते होंगे इन सब बातोंके के बीच, समस्याओं के लिए (जिसकी चर्चा हम हमेशा ही करते है) आज जनप्रतिनिधियों का विषय क्यों उपस्थित किया गया? मित्रों, आम रेल यात्री सोचता है, कोई है जो हमारे प्रश्न, हमारी समस्याएं उन तक पहुंचाए, जो इस पर निर्णय लेते है और यह काम उन्ही जनप्रतिनिधियों का है। बातें बहुत छोटी है और हमारी सहिष्णुता बहुत विशाल। हम रेल यात्रा का समापन कर जब गाड़ी से उतरते ही ‘जान बची लाखों पाए’ वाली कहावत के उक्त आचरण में ढल जाते है और अपनी जिंदगी की रेस में इतर समस्याओं से दो-चार होने आगे बढ़ जाते है। बस, हम चाहते है, हमारे प्रश्न को कोई अपनी आवाज़ दे, कोई ऊपर तक उसे पहुंचाए।

(लेख में उधृत तस्वीरें प्रातिनिधिक रूप में, रेल संगठन ग्रुप से साभार)

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‘अमृत भारत एक्सप्रेस’ वन्देभारत की ग़ैरवातानुकूलित आवृत्ती की किराया सूची एवं नियमावली जारी

27 दिसम्बर 2023, बुधवार, पौष, कृष्ण पक्ष, प्रतिपदा, विक्रम संवत 2080

भारतीय रेल की बहुचर्चित प्रीमियम ट्रेन, वन्देभारत एक्सप्रेस श्रेणी में ग़ैरवातानुकूलित संस्करण, जिसमे केवल द्वितीय श्रेणी साधारण एवं शयनयान स्लिपर श्रेणी के ही कोच की संरचना रहेगी ऐसी ‘अमृतभारत एक्सप्रेस’ 30 दिसम्बर से यात्रिओंकी सेवा में शुरू होने जा रही है। अब तक की जानकारी नुसार यह दो गाड़ियोंका शुभारंभ होने जा रहा है। जिसमे एक अयोध्या – आनंदविहार (दिल्ली) और दूसरी मालड़ा टाउन – बेंगलुरु के बीच चलेंगी।

indiarailinfo.com से साभार

अमृतभारत एक्सप्रेस यह गाड़ी भी वन्देभारत एक्सप्रेस की तरह एक ट्रेनसेट संरचना में रहेंगी। ट्रेनसेट याने जिनमे गाड़ी के साथ, उसके दोनों सिरेपर लोको लगा हुवा रहता है, शंटिंग करने की आवश्यकता नही रहती। चूँकि यह गाड़ी भी सर्वसाधारण मेल/एक्सप्रेस से अलग श्रेणी की यात्री गाड़ी है अतः इसकी अपनी अलग किराया तालिका है। अब तक मेल/एक्सप्रेस के अलावा, भारतीय रेल में, वन्देभारत, राजधानी, शताब्दी, जनशताब्दी, गतिमान, तेजस, हमसफ़र, गरीबरथ, सुविधा, जनसाधारण इन गाड़ियोंकी अलग किराया तालिका बनाई गई है।😊

अमूमन साधारण मेल/एक्सप्रेस किराया दर से, 5% से 8% किराए ज्यादा दिखाई दे रहे है। आइए ‘अमृतभारत एक्सप्रेस’ की किराया तालिका एवं नियमावली जानते है,

किराया श्रेणी में केवल बेसिक किराए दर्शाए गए है। सुपरफास्ट चार्जेस, आरक्षण शुल्क, जीएसटी जो भी लागू हो, अलग से जोड़े जाए।

‘चाइल्ड टिकट’ बच्चों के टिकट के किराए, यथावत नियमानुसार लागू रहेंगे।

किरायोंका पूरणांक ‘राउंड ऑफ’ यथावत किया जाएगा।

गाड़ी में कोई भी रियायती टिकट या मानार्थ पास द्वारा यात्रा करने की अनुमति नही है।

रेल कर्मचारियों की प्रिव्हिलेज पास/पीटीओ/ड्यूटी पास के लिए मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंके नियम लागू रहेंगे।

सांसद/विधायक इनके यात्रा कूपन एवं स्वतंत्रता सेनानी पास द्वारा बुकिंग की अनुमती रहेंगी।

सेना / पुलिस वारण्ट जिनकी प्रतिपूर्ति पूर्ण की जाती है, वास्तविक किराया विनिमय पर पात्र समझे जाएंगे।

अनारक्षित टिकट पर ‘अमृतभारत एक्सप्रेस’ मुद्रीत रहेगा। अर्थात यह टिकट केवल इसी गाड़ी की लिए उपयोग किया जाएगा।

रिफण्ड नियम यथावत लागू रहेंगे।

किराया तालिका :

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रेल यात्रिओंके एमिनिटीज की बैंड बजी पड़ी है, और रेल प्रशासन है, की ‘नॉन-फेयर’ रेवेन्यू बटोरने में लगा है।

25 दिसम्बर 2023, सोमवार, मार्गशीर्ष, शुक्ल पक्ष, चतुर्दशी, विक्रम संवत 2080

मित्रों, आजकल आये दिन, आप सोशल मीडिया में रेल के आरक्षित कोचों में यात्रा करती बेतहाशा भीड़ देखी होगी। पहले यह मंजर स्लिपर क्लास तक सीमित था मगर यह आगे बढ़ वातानुकूल कोचों तक पहुंच गया है, और तो और यात्रिओंकी भीड़ अब प्रीमियम गाड़ियाँ जैसे की राजधानी एक्सप्रेस तक को नही बख्श रही। राजधानी गाड़ियोंके वातानुकूल प्रथम वर्ग के कोच में भी अनारक्षित यात्री बेखटके यात्रा कर रहे है। ऐसी अराजक दुर्व्यवस्था की वजहें कई निकल आएगी। आज उस पर चर्चा करते है।

मित्रों, सबसे पहले हम द्वितीय श्रेणी ग़ैरवातानुकूलित मगर आरक्षित स्लिपर क्लास देखते है। अपने जमाने मे यात्रिओंके बीच बेहद लोकप्रिय यह श्रेणी, यात्रिओंके लिए किफायती और सुविधाजनक रहती थी। द्वितीय श्रेणी साधारण अनारक्षित जनरल क्लास के टिकट से अमूमन दुगना किराया देकर यात्री आरक्षित शायिका पा लेता था और उसकी रेल यात्रा सुगमता से हो जाती थी। इसमे अतिक्रमण शुरू हुवा सीजन पास MST धारक और कम अन्तर की यात्रा करनेवाले रेल कर्मियों द्वारा, यह लोग “बस, अगले स्टेशन तक जाना है” कह स्लिपर कोच में, आरक्षित यात्रिओंके बीच, उन्हें खिसकाकर बैठ जाते थे। उनके देखा-देखी आम यात्रिओंने भी अपनी घुसपैठ बना ली।

स्लिपर वर्ग में घुसे अतिक्रमित यात्रिओंमें PRS, छपे आरक्षित मगर प्रतिक्षासूची के टिकट धारकोंकी संख्या भी बहुत होती है। यह एक गलत धारणा यात्रिओंके बीच बैठ गयी है या बिठा दी गयी है, की प्रतिक्षासूची का काउंटर वाला, कागजी टिकट रद्द नही होता और वह स्लिपर क्लास के आरक्षित कोच में यात्रा करने के लिए अनुमतिपात्र होता है। हालांकि ऐसा बिल्कुल नही है, सभी प्रतिक्षासूची टिकट रद्द ही होते है केवल छपे टिकट की धनवापसी करने हेतु काउंटर्स पर जाना आवश्यक है और यात्री वहाँ जाता नही अपितु स्लिपर कोच में सवार हो जाता है। यही रवायत आजकल वातानुकूल कोचों में पहुंच गई है।

पहले और आजकल की रेल यात्रा में ऐसा क्या हो गया की आरक्षित कोचों में अनाधिकृत घुसपैठ बढ़ गयी? एक तो अनारक्षित द्वितीय श्रेणी टिकटोंकी असीमित बिक्री। कोई सीमा ही नही है, इन टिकटोंको बेचने की, चौबीसों घन्टे टिकट काउंटर्स खुले रहते है और अब UTS ऑनलाइन भी टिकट खरीद सकते है। दूसरा यह की आजकल आदर्श कोच संरचना के चक्कर मे रेल प्रशासन ने लगभग सभी मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंमे अनारक्षित कोच जोड़ने कम कर दिए है। बमुश्किल एक कोच आगे और एक कोच आखिर में होता है। जिसके हजारों अनारक्षित टिकट बेचे गए हो और मार्ग का प्रत्येक स्टेशन अलग से वही टिकट बेचते ही जा रहा है, कहाँ तक बैठ पाएंगे यात्री? यह यात्री अपना रुख थोड़े खाली दिखनेवाले स्लिपर कोच की ओर करते है और अब स्लिपर कोचों की हालात भी अनारक्षित द्वितीय श्रेणी जैसी हो गई तो बहुतायत में लगे वातानुकूल कोचों की तरफ करने लगे है।

अब मुख्य मुद्दे पर आते है। पहले प्रत्येक आरक्षित कोच, चाहे वह ग़ैरवातानुकूलित स्लिपर हो या वातानुकूल थ्री, टु टियर, प्रथम श्रेणी हो, रेल प्रशासन की ओरसे ‘एमिनिटी स्टाफ़’ TTE या कंडक्टर अवश्य ही हाजिर रहता था। गाड़ियोंमें वातानुकूल कोच बढ़ने लगे तो दो/तीन स्लिपर में एक TTE रहने लगे, जो यात्रिओंके अनाधिकृत प्रवेशपर अंकुश लगाते थे। TTE को कोच के सामने हाजिर देख, आज भी अनाधिकृत यात्री सकपका जाता है।

मगर रेल प्रशासन की बदलती नीति में एमिनिटीज स्टाफ़ का मूल्य कम होता नजर आ रहा है। लगभग आधे से ज्यादा स्टाफ़ को टिकट चेकिंग में बड़े बड़े राजस्व के लक्ष्य के साथ बांध दिया जाता है। अखबारों की सुर्खियों में महीने में एक -एक करोड़ रुपए वसूलने वाले टिकट जांच कर्मियोंकी तस्वीरें छपती है, रेल प्रशासन उन्हें प्रमाणपत्र देता है, बड़ी वाहवाही होती है। इधर नियमित, अधिकृत यात्री जो महीनों पहले आरक्षित टिकट लेकर यात्रा के लिए निकल पड़ता है और देखता है, उसके बर्थ के पास 10 लोगोंका अनावश्यक ही जमावड़ा है। उसे शौचालय जाना है, तो पूरा पैसेज भीड़ से भरा पड़ा है। यहाँतक की शौचालय में भी दो-चार लोग घुसे पड़े है।

सोशल मीडिया में गोरखपुर के सांसद मा. रविकिशन शुक्ल का एक पत्र वायरल हुवा है,

उपरोक्त पत्र में टिकट चेकिंग स्टाफ़ की वहीं व्यथा अंकित है, जिस का विस्तृत वर्णन हम यहाँपर और पहले भी कई बार हमारे लेख में कर चुके है।

रेल प्रशासन को चाहिए की वह द्वितीय श्रेणी टिकटों के बेचे जाने पर बन्धन लगाए। द्वितीय श्रेणी अनारक्षित टिकट केवल 200 किलोमीटर तक की यात्रा के लिए ही वैध हो। 200 किलोमीटर से ज्यादा के लिए केवल आरक्षित द्वितीय श्रेणी 2S का निर्धारण करना चाहिए। PRS काउंटर्स से प्रतिक्षासूची के टिकट की बिक्री बिल्कुल बन्द करनी चाहिए। इन काउंटर्स पर केवल ‘उपलब्ध’ सीटों/शायिका के टिकट ही बेचे जाए। एमिनिटी स्टाफ़ बढ़ाया जाए ताकि प्रत्येक दो/तीन कोच के बीच एक TTE हाजिर रहे। RAC टिकट भी प्रतिक्षासूची के जैसे ही चार्ट बनने के बाद रद्द हो जाना चाहिए। कोई अर्थ ही नही है के 72/80 यात्री क्षमता के कोच में RAC के नामपर, अतिरिक्त 8/9 यात्रिओंको जबरन अधिकृत किया जाता है।

आशा करते है, सांसद महोदय ने बात उठाई है, तो अवश्य ही उचित कार्रवाई होगी।