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2-3 दिसम्बर की कालरात्रि

आज हम स्व. हरीश धुर्वे और उनके 44 साथी कर्मचारियोंको उनकी शहादत पर नमन करते है और श्रद्धांजलि देते है। आप ने शायद ही इनके नाम सुने होंगे, ऐसे लोग बेनाम शहिद होते है जिन्हें ज्यादा प्रसिद्धि नही मिलती। लेकिन इन्होंने रेलवे में अपनी सेवा में अच्युत शिखर को छुवा।

वह 2-3 दिसम्बर 1984 की भयानक रात थी, भोपाल जंक्शन पर हरीश धुर्वे अपनी स्टेशन मास्टर की ड्यूटी निभा रहे थे। स्टेशन के करीब यूनियन कार्बाइड के प्लान्ट से अचानक मिथैल आयसोसिएट नामक विषैले वायु का रिसाव शुरू हो गया। प्लाट के आजुबाजुमे लोग दम घुटने से मरने लगे। स्टेशन पर भी यात्रिओंको इस विषैले वायु से साँस लेने में तकलीफ होने लगी। हरीशजी और बाकी भोपाल स्टेशन पर, ड्यूटी में हाजिर अलग अलग कर्मचारिओंकी से मदत से यात्रिओंको सुरक्षित बाहर निकालने में जुट गए।

अचानक उंन्हे यह ख्याल आया, जो लोग स्टेशन पर है उंन्हे तो यहाँ से निकाला जा सकता है या इस इलाके से दूर भी रखा जा सकता है, लेकिन उन यात्रिओंका क्या होगा जो गाड़ियोंमे भोपाल स्टेशन की ओर आ रहे है। वो तो यहाँ की त्रासदी, तकलीफ से बिल्कुल बेखबर, अन्जान है। कई यात्री तो सोये ही होंगे।

भोपाल बड़ा और मेन लाइन का स्टेशन है, मुम्बई, दिल्ली, चेन्नई की ओरसे लगातार गाड़ियाँ आती जाती रहती है। उस वक्त इटारसी, बीना, उज्जैन की ओरसे गाड़ियोंकी कतार एक एक करके भोपाल की ओर आने जा रही थी। उसमें हजारों यात्री, महिलाएँ, बुढ़े, बच्चे, सोचकर हरीशजी का दिल काँप गया। उनको क्या करना चाहिए, यह तुरन्त समझ आ गया। चाहे तो वह और उनके साथी स्टेशनपर के यात्रिओंको स्टेशन से निकाल कर किसी सुरक्षित स्थानोंपर जा सकते थे लेकिन उन्होंने अपने जान की परवाह न करते, अपने फर्ज पर ध्यान दिया और फौरन अपने कंट्रोल से बात करते हुए सारी परिस्थितियों से उन्हें अवगत कराया।

कंट्रोल विभाग आपातकालीन स्थिति को देखते, तुरन्त ही हरकत में आया। इटारसी की ओरसे आनेवाली गाड़ियाँ एक एक करके पीछे के स्टेशनों मिसरोड़, मंडीदीप, ओबेदुल्लागंज, बुदनी और बीना की ओरसे आनेवाली गाड़ियाँ सलामतपुर, विदिशा में रोक दी गयी। कुल 24 गाड़ियाँ थी जो भोपाल आने से रोकी गयी थी। सोचिए इन 24 गाड़ियोंमेके यात्रिओंका क्या हाल होता यदि यह गाड़ियाँ सीधे भोपाल आ जाती।

मध्यप्रदेश सरकार के आंकड़े कहते है उस दिन की गैस त्रासदी से 3787 लोगोंकी मृत्यु हुई, लेकिन अखबारों और स्थानिक सुत्रोंके आँकड़े कुछ और कहते है उस दिन से लेकर दो सप्ताह के भीतर गैस त्रासदी से मरनेवालोंकी संख्या 8000 से ज्यादा थी।

स्टेशन मास्टर हरीशजी धुर्वे का अपने कर्तव्योंको निभाते हुए ड्यूटी के दौरान, देहान्त हो गया, उनके साथी 44 कर्मचारी भी उस खतरनाक विषैले गैस के प्रादुर्भाव से साँस की बीमारियों से चल बसे।

आज भोपाल स्टेशनपर, जाँबाज, कर्तव्यनिष्ठ हरीशजी धुर्वे और 44 कर्मचारियोंके स्मारक पर श्रद्धांजलि देकर उन्हें याद किया जा रहा है। यह स्मारक सभी रेल कर्मियोंके लिए, अपनी सेवा के प्रति निष्ठा का अटूट प्रेरणास्रोत है।

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मध्य रेलवे की विशेष गाड़ियाँ :

मध्य रेलवे ने विशेष गाड़ियोंकी लिस्ट जारी की है। मुम्बईसे कानपुर, पुणे से झांसी, अमरावती रायगड़, अम्बिकापुर इज्तेमा स्पेशल, और नागपुर से मुम्बई के बीच महापरिनिर्वाण स्पेशल गाड़ियाँ चलाई जा रही है।

पश्चिम रेलवे के राजकोट विभाग से गुजरने वाली गाड़ियोंमे लगेंगे अतिरिक्त कोचेस।

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आज फोटोज देखते है: कुछ पुराने, कुछ नए

यह फोटो 1940 की, लाहौर स्टेशन की है, जब रेलवे सीधे मुम्बईसे पेशावर तक चलती थी। ब्रिटिश राज था और पार्टीशन नही हुवा था।

1920 में कोलकाता से चेन्नई याने तब का कलकत्ता से मद्रास मार्ग के किसी स्टेशन की है। तब आम हिंदुस्तानी यात्री रेलवे के तीसरे दर्जे में यात्रा कर पाते थे।

यह है पुरैच्ची थलाईवार डॉ एम जी आर चैन्नई सेंट्रल स्टेशन। अरे भाई, यह आज का नाम है, तब याने 1870 का मद्रास सेंट्रल स्टेशन। इसके ब्रिटिश वास्तुविद थे जॉन होर्डिंग्ज।

यह है जामरुड रेल्वे स्टेशन, आ हाँ! अब पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पेशावर के पास का स्टेशन है।

चलो, आ जाते अपने आज में। एक नई गाड़ी 14817 / 14818 बांद्रा भगत की कोठी एक्सप्रेस वाया भीलड़ी, समदड़ी होकर चलने लगी है।

आज 13147 / 13148 सियालदाह न्यु कूचबिहार सियालदाह उत्तर बंग एक्सप्रेस का बामनहाट स्टेशन तक विस्तार किया गया। उसी की कुछ तस्वीरें और समयसारिणी।

पुराने फोटो : इंडियन हिस्ट्री फोटोज ट्विटर से साभार

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मुम्बई के लिए महाराष्ट्र के विभिन्न भागोंसे चलेगी महापरिनिर्वाण स्पेशल गाड़ियाँ।

06 दिसम्बर को भारतरत्न बाबासाहेब आम्बेडकर को आदरांजलि देने हेतु पूरे देश से उनके अनुयायी मुम्बई की ओर निकल पड़ते है। यह ऐसा जुनून होता है, हर किसी को उस दिन दादर की चैत्यभूमि पर जाकर अपने नेता, अपने दैवत को नमन करने की अटूट इच्छा रहती है। मुम्बई की ओर आनेवाली सभी गाड़ियोंमे जय भीम ऐसा जयघोष गूंजते रहता है। विशेष गाड़ियाँ और रेग्युलर चलनेवाली भी गाड़ियाँ यात्रिओंसे बिल्कुल भरी रहती है।

हर वर्ष की तरह मध्य रेलवे ने इस बार भी, मुम्बई में महापरिनिर्वाण पर्व पर पहुंचने वाले यात्रिओंके लिए नागपुर मुम्बई, सोलापुर, आदिलाबाद से मुम्बई के बीच विशेष गाड़ियोंका नियोजन किया है। साथही भुसावल मुम्बई पैसेंजर और मुम्बई कोल्हापुर महालक्ष्मी एक्सप्रेस में अतिरिक्त कोचेस लगाए जा रहे है। कृपया परिपत्रक देख ले।

SCR special train :-

Adilabad -Dadar – Adilabad special

Central Railways circular on Mahaparinirvan special trains