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Rail Duniya E Issue 4

In this E issue,We present you with the best  36 Instagram posts.

Travel blog submitted by our Bureaucrat member Debatra Mazumdar on his tour to Russia.

And Popular articles from the week.

Hope you shall appreciate our effort, feedback and creative criticism is always welcome.

 

Please click on the e issue to download  E – Issue 4

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2-3 दिसम्बर की कालरात्रि

आज हम स्व. हरीश धुर्वे और उनके 44 साथी कर्मचारियोंको उनकी शहादत पर नमन करते है और श्रद्धांजलि देते है। आप ने शायद ही इनके नाम सुने होंगे, ऐसे लोग बेनाम शहिद होते है जिन्हें ज्यादा प्रसिद्धि नही मिलती। लेकिन इन्होंने रेलवे में अपनी सेवा में अच्युत शिखर को छुवा।

वह 2-3 दिसम्बर 1984 की भयानक रात थी, भोपाल जंक्शन पर हरीश धुर्वे अपनी स्टेशन मास्टर की ड्यूटी निभा रहे थे। स्टेशन के करीब यूनियन कार्बाइड के प्लान्ट से अचानक मिथैल आयसोसिएट नामक विषैले वायु का रिसाव शुरू हो गया। प्लाट के आजुबाजुमे लोग दम घुटने से मरने लगे। स्टेशन पर भी यात्रिओंको इस विषैले वायु से साँस लेने में तकलीफ होने लगी। हरीशजी और बाकी भोपाल स्टेशन पर, ड्यूटी में हाजिर अलग अलग कर्मचारिओंकी से मदत से यात्रिओंको सुरक्षित बाहर निकालने में जुट गए।

अचानक उंन्हे यह ख्याल आया, जो लोग स्टेशन पर है उंन्हे तो यहाँ से निकाला जा सकता है या इस इलाके से दूर भी रखा जा सकता है, लेकिन उन यात्रिओंका क्या होगा जो गाड़ियोंमे भोपाल स्टेशन की ओर आ रहे है। वो तो यहाँ की त्रासदी, तकलीफ से बिल्कुल बेखबर, अन्जान है। कई यात्री तो सोये ही होंगे।

भोपाल बड़ा और मेन लाइन का स्टेशन है, मुम्बई, दिल्ली, चेन्नई की ओरसे लगातार गाड़ियाँ आती जाती रहती है। उस वक्त इटारसी, बीना, उज्जैन की ओरसे गाड़ियोंकी कतार एक एक करके भोपाल की ओर आने जा रही थी। उसमें हजारों यात्री, महिलाएँ, बुढ़े, बच्चे, सोचकर हरीशजी का दिल काँप गया। उनको क्या करना चाहिए, यह तुरन्त समझ आ गया। चाहे तो वह और उनके साथी स्टेशनपर के यात्रिओंको स्टेशन से निकाल कर किसी सुरक्षित स्थानोंपर जा सकते थे लेकिन उन्होंने अपने जान की परवाह न करते, अपने फर्ज पर ध्यान दिया और फौरन अपने कंट्रोल से बात करते हुए सारी परिस्थितियों से उन्हें अवगत कराया।

कंट्रोल विभाग आपातकालीन स्थिति को देखते, तुरन्त ही हरकत में आया। इटारसी की ओरसे आनेवाली गाड़ियाँ एक एक करके पीछे के स्टेशनों मिसरोड़, मंडीदीप, ओबेदुल्लागंज, बुदनी और बीना की ओरसे आनेवाली गाड़ियाँ सलामतपुर, विदिशा में रोक दी गयी। कुल 24 गाड़ियाँ थी जो भोपाल आने से रोकी गयी थी। सोचिए इन 24 गाड़ियोंमेके यात्रिओंका क्या हाल होता यदि यह गाड़ियाँ सीधे भोपाल आ जाती।

मध्यप्रदेश सरकार के आंकड़े कहते है उस दिन की गैस त्रासदी से 3787 लोगोंकी मृत्यु हुई, लेकिन अखबारों और स्थानिक सुत्रोंके आँकड़े कुछ और कहते है उस दिन से लेकर दो सप्ताह के भीतर गैस त्रासदी से मरनेवालोंकी संख्या 8000 से ज्यादा थी।

स्टेशन मास्टर हरीशजी धुर्वे का अपने कर्तव्योंको निभाते हुए ड्यूटी के दौरान, देहान्त हो गया, उनके साथी 44 कर्मचारी भी उस खतरनाक विषैले गैस के प्रादुर्भाव से साँस की बीमारियों से चल बसे।

आज भोपाल स्टेशनपर, जाँबाज, कर्तव्यनिष्ठ हरीशजी धुर्वे और 44 कर्मचारियोंके स्मारक पर श्रद्धांजलि देकर उन्हें याद किया जा रहा है। यह स्मारक सभी रेल कर्मियोंके लिए, अपनी सेवा के प्रति निष्ठा का अटूट प्रेरणास्रोत है।

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New Train Index – Update

Dear members, we are sharing with you the updated train index with new trains started and announced.

The trains highlighted in yellow are the newly inaugurated, extension of existing trains, change in frequency and the trains details can be read as a comment by taking the cursor to the highlighted portion.

Kindly take advantage of the index and share with maximum number of your friends and family.

TRAIN INDEX FOR PDF 15 march 19

Visitor's Stories

O meri rail gaadi…

O meri rail gaadi,

Teri baat hi hai kuch atrangi si,
Chahe tujhe kitna bhi kosu, kahin pauch nahi sakta tere bina main.

Tu band hoti hai toh aadha sheher jaise tham sa jaata hai.

Station par khada har aadmi tere intezaar main rehta hai.

Bambayi ki baarish ho ya koi band,
Tere aane se hi ek aasha jaise jag jaati hai ki tu aayegi aur hume saath le jaayegi.

Tere aur mere itne safar ki kahaniyan juddi hai ki ab mere manzil ka ek khaas hissa ban chuki hai tu.

O meri rail gaadi,
Teri baat hi hai kuch atrangi si.

Contributed by : Karan

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Shakuntala Railways: India’s only private railway line.

Shakuntala Railway, the only privately-owned railway line in India offering passenger services, may soon be a part of history. Then Railway Minister Suresh Prabhu has cleared a proposal to take over the narrow gauge line and convert it into broad gauge at an estimated cost of Rs 1,500 crore.
Shakuntala Railway covers a 188-km stretch from Yavatmal to Achalpur in Amaravati district of Maharashtra. The Central Province Railway Company (CPRC), or the Shakuntala Railway, was founded in 1910 by Killick Nixon, a British firm, mainly to transport cotton from the area.
The route was used to ferry cotton from Vidarbha for exporting. But even after the nationalisation of other private sector railway lines, Shakuntala Railway continued to be privately-owned.
According to the contract with CPRC, if the Indian government fails to acquire the line in 2016, it will only be able to acquire it a decade later.
The Indian Railways pays an annual usage fee of Rs 2-3 crore for running two passenger trains and few goods trains on these tracks to CPRC.
Earlier, the railways was not keen on taking over the loss-making line. As per the contract, major expenses above Rs 10,000 must be borne by the company. According to the railways, the rent of using the line was adjusted from the cost of repairs and maintenance. All other lines owned by CPRC got nationalised. Interestingly, even now all the rail signals are from the British era, with a “Made in Liverpool” tag.
According to Indian Railways, on an average, five wagons are booked from Achalpur station to transport goods such as cotton, dry chilly, timber, handloom cloth, rosha oil, coffee seeds, mangoes, guavas and oranges from the area.
Information Compiled by Vignesh ( https://www.instagram.com/chwhaan/?hl=en)
Picture courtesy : Railfan Roopesh Kohad/ Google.

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