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Rail Duniya E Issue 4

In this E issue,We present you with the best  36 Instagram posts.

Travel blog submitted by our Bureaucrat member Debatra Mazumdar on his tour to Russia.

And Popular articles from the week.

Hope you shall appreciate our effort, feedback and creative criticism is always welcome.

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मिलेनियम एक्सप्रेस की वह रात…

यह आर्टिकल अंग्रेजी में पढ़ने के लिए लिंक पे क्लिक करे – https://railduniya.in/2019/04/12/the-dark-night-on-millennium-express/

भारतीय लोगोंके जीवन मे रेलवे का एक अटूट सम्बन्ध रहा है। हमारे सुख दुख की साथी है यह रेलवे। लाखों लोग अपने रोजगार की जगह पर जाने के लिए रेलवे का ही उपयोग करते है। कुल मिलाकर भारत मे घूमने, फिरने और रोज की यातायात के लिए रेलवे को कोई भी अन्य और यथायोग्य पर्याय आज तो नही है।

आज अचानक ही पुराने रिकार्ड में ग्वालियर के फार्मसी कॉलेज के अध्यापक महोदय का एक प्रशंसा पर पत्र हाथ लग गया। पत्र पढ़ते ही उस रात की याद ताज़ा हो गई। यह किस्सा है तो काफी पुराना लेकिन है बड़ा ही रोमांचक।

उन दिनों रेलवे के ट्वीटर और फेसबुक अकाउंट नही थे और नाही आप रेलवे के अधिकारियों से सीधे संपर्क कर पाते थे, तो एक रात करीबन दो बजे का वक्त रहा होगा, रेलदुनिया का लैंडलाइन फोन घनघना उठा। सामने से एक बड़ी डरी सहमी सी आवाज़ में एक व्यक्ति बोल रहा था, ” साहब, आधी रात को तकलीफ़ देने के लिए माफी चाहता हूँ, लेकिन प्लीज हमारी मदद कीजिए”

कहानी इस प्रकार थी, वह व्यक्ति जो फोन कर रहे थे, वह ग्वालियर इलाके के फार्मेसी कॉलेज के अध्यापक थे। वे लोग अपने विद्यार्थिनीयोंके साथ, शैक्षणिक यात्रा से ऊटी से ग्वालियर की ओर लौट रहे थे। उनके शयनयान डिब्बे में करीबन 25 आरक्षण थे, डिब्बा इंजिन से दूसरा था और बगल वाला डिब्बा अनारक्षित याने सेकंड जनरल था। सबरीमाला के यात्रियों की बड़ी भीड़ गाड़ी में एकाएक चढ़ी और इन लोगोंके डिब्बे में कुछ असामाजिक तत्व उधम मचाने लगे। रात का वक्त, साथ मे लड़कियाँ, भाषा के कारण संभाषण की दिक्कतें , डिब्बे में कोई रेलवे का न तो RPF और न ही TTE, खतरे की जंजीर खिंचे तो काम नही कर रही थी।

अध्यापक महोदय ने हर सम्भव प्रयास कर लिया था। उन लोगोंसे बातचीत की, उनसे प्रार्थना की, की वे उन्हें अपने आरक्षित जगहों पर से ना उठाए चाहे तो आधी जगह में वो लोग ले ले और बची जगह में लड़कियों को एडजस्ट होने दे। लेकिन वे लोग से अब छेड़छाड़ होने की आशंका भी अध्यापक और उनके विद्यार्थिनीयोंको सताने लगी थी।

गाड़ी थी मिलेनियम एक्सप्रेस और हमारे टूरिस्ट चढ़े थे कोयम्बटूर से। उनकी सारी आरक्षित जगहे पहलेसे ही, एर्नाकुलम से लबालब भर भर के आयीं थी। डिब्बे में तो यह लोग चढ़ गए लेकिन हाल जो हो रहे थे उसका नजारा हमने आपको बताया।

रात मे ईन लोगोने गाड़ी में से लोकल पुलिस को भी फोन लगाने की कोशिशें की, लेकिन मदत नहीं पा सके। उन्होंने एक SOS तरीके की कोशिश करने की सोची और उनके पास रेलदुनिया की किताब में से उसका ऑफिस का नम्बर डायल किया।

अब आगे क्या हुवा, बताते है। रात दो, ढाई बजे जब रेलदुनिया के दफ्तर में कॉल आयी तो यहाँसे तुरन्त उन्हें दक्षिण मध्य रेलवे झोन के RPF के झोनल कमिश्नर का मोबाइल नम्बर दिया गया चूँकि ट्रेन अब तक दक्षिण रेलवे पर कर दक्षिण मध्य रेल पर आ गई थी और खुद रेलदुनिया द्वारा भी कमिश्नर को प्राप्त परिस्थितियों से अवगत कराया गया। उन्होंने फौरन ट्रेन की पोजिशन ली और मार्ग के RPF कार्यलय को सावधान कर दिया। उन्हें कहा गया की पूरे बन्दोबस्त से जाए और यात्रिओंको सुरक्षा प्रदान करे, साथ ही मुख्यालय से ताजा जानकारी साझा करते रहे।

फिर रेल सुरक्षा बल ने जो काम किया है, आप अचंभित हो जाओगे। काटपाड़ी स्टेशन पर गाड़ी रुकते ही RPF दल ने पूरे डिब्बे को घेरा और बल का इस्तेमाल करते हुए डिब्बे के दरवाजे खुलवाए, अंदर प्रवेश कर उन गुंडों को अपने कब्जे में लिया और हमारे यात्रिओंको सुरक्षित किया, उन्हें अपनी जगहों पर बिठवाए। और इतनाही नहीं चार RPF का एक दल हमारे यात्रिओंके साथ, उस डिब्बे में ऑन ड्यूटी तैनात किया जो की ग्वालियर तक उनके साथ चला।

पता नही, लेकिन सफर में किसे किस तरह के अनुभवों से गुजरना पड़ सकता है। खैर, यह तो उन दिनोंकी बात है, आज कल तो रेल विभाग सुरक्षा के प्रति बहोत चाक चौबंद हो गया है। स्टेशनोंपर, गाड़ियोंमें हथियारबन्द पुलिस मौजूद रहते है।

रेलवे पुलिस हेल्पलाइन नंबर १८२.

ऊपर लिखी कथा एक सत्य घटना है। रेल दुनिया सदैव आपकी सेवा में।