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प रे WR की उधना – बरौनी के बीच भुसावल, जबलपुर, दानापुर होते हुए द्वीसाप्ताहिक विशेष

05 मई 2023, शुक्रवार, वैशाख, शुक्लपक्ष, पूर्णिमा, विक्रम संवत 2080

09033 उधना बरौनी द्विसाप्ताहिक विशेष दिनांक 03 मई से 31 मई तक प्रत्येक सोमवार एवं बुधवार को उधना से शाम 20:35 को रवाना होगी। वापसीमे 09034 बरौनी उधना द्विसाप्ताहिक विशेष दिनांक 05 मई से 02 जून तक प्रत्येक बुधवार एवं शुक्रवार को बरौनी से चलेगी।

गाड़ी संरचना में 01 वातानुकूल टू टियर, 02 वातानुकूल थ्री टियर, 15 स्लिपर, 04 द्वितीय साधारण और 02 एसएलआर ऐसे कुल 24 कोच रहेंगे। यात्रीगण ज्ञात रहें, उक्त विशेष गाड़ी TOD अर्थात यात्री मांग के अंतर्गत चलाई जा रही है अतः यात्री किराये नियमित किराया दर से 1.3 गुना ज्यादा रहेंगे।

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उधना – बरौनी वाया भुसावल, प रे WR की द्विसाप्ताहिक विशेष

01 मई 2023, सोमवार, वैशाख, शुक्लपक्ष, एकादशी, विक्रम संवत 2080

विस्तृत समयसारणी निम्नलिखित है,

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मध्य रेल CR की उत्तर भारत के लिए दो अनारक्षित साप्ताहिक विशेष गाड़ियाँ

27 अप्रैल 2023, गुरुवार, वैशाख, शुक्लपक्ष, सप्तमी, विक्रम संवत 2080

01123 लोकमान्य तिलक टर्मिनस गोरखपुर अनारक्षित विशेष दिनांक 28 अप्रैल से 19 मई तक प्रत्येक शुक्रवार को चलेगी एवं वापसीमे 01124 गोरखपुर लोकमान्य तिलक टर्मिनस अनारक्षित विशेष दिनांक 29 अप्रैल से 20 मई तक प्रत्येक शनिवार को चलेगी। गाड़ी की संरचना में 20 द्वितीय श्रेणी साधारण, 01 एसएलआर और 01 लगेज कम जनरेटर वैन रहेगी। यह गाड़ी लोकमान्य तिलक टर्मिनस से चलकर कल्याण, नासिक रोड, भुसावल, इटारसी, भोपाल, बीना, वीरांगना लक्ष्मी बाई झांसी, कानपुर, लखनऊ, गोण्डा होकर गोरखपुर के बीच 4 फेरे करेंगी।

01121 पुणे दानापुर अनारक्षित विशेष दिनांक 30 अप्रैल से 21 मई तक प्रत्येक रविवार को चलेगी एवं वापसीमे 01122 दानापुर पुणे अनारक्षित विशेष दिनांक 02 से 23 मई तक प्रत्येक मंगलवार को चलेगी। इस गाड़ी की संरचना उपलब्ध नही है। यह गाड़ी पुणे से चलकर दौंड कोर्ड, मनमाड़, भुसावल, इटारसी, जबलपुर, प्रयागराज छिंवकी, पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन होकर दानापुर के बीच 4 फेरे करेंगी।

गौरतलब यह है, रेल प्रशासन इन अनारक्षित गाड़ियोंको यदि द्वितीय श्रेणी की 2S आरक्षण कर चलाये तो यह गाड़ियाँ रेल्वेके ई-टिकट ऍप, वेबसाइट पर दिखने लगेंगी। इससे उन यात्रिओंको भी इन गाड़ियोंकी जानकारी मिल सकेगी जो केवल रेल्वेके वेबसाइट और ऍप देखकर अपनी रेल यात्रा का नियोजन करते है। चूँकि अनारक्षित टिकटोंमे 2S का आरक्षण शुल्क जो की नाममात्र ₹15/- प्रति सीट है, जुड़ेगा। जानकारी के ऐवज में यह शुल्क कुछ भारी नही पड़ेगा और कई बार खाली ही चलनेवाली यह गाड़ियाँ उचित यात्री भार के साथ चल पाएगी।

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भारतीय रेल के सभी प्रमुख रेल मार्ग के साथ और 53 शाखा मार्ग भी 130 kmph गति के लिए उन्नत किये जायेंगे।

19 अप्रैल 2023, बुधवार, वैशाख, कृष्ण पक्ष, चतुर्दशी, विक्रम संवत 2080

भारतीय रेल अब अपनी गति से आगे बढ़ने लगी है। उन्नत चल स्टॉक अर्थात तेज गति के लोको, कोचेस, वन्देभारत जैसे ट्रेन सेट्स, ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम और बहुत कुछ।

मित्रों, वाहन तेज गतीसे चलने के काबिल हो तो उसे उसकी पूर्ण क्षमता के मार्ग भी आवश्यक है। साथ ही मार्ग की अन्य गाड़ियाँ जैसे मालगाड़ी जिनकी गति ज्यादा नही होती वह इन तीव्र गति की गाड़ियोंको चलने में प्रतिरोध उत्पन्न करती है अतः उनके लिए रेल विभाग अलगसे मार्ग चाहता है। यूँ तो EDFC और WDFC दो मालगाड़ी के लिए समर्पित गलियारों का निर्माण पुर्णत्व की ओर है, मगर इतर मार्ग जहाँ फ़िलहाल इस तरह के पूर्णतः अलग फ्रेट कॉरिडोर नही है, वहाँ पर तीसरी, चौथी लाइन मालगाड़ी के लिए उपयोग में लाने की हेतु निर्माण की जा रही है।

रेल्वेके जो स्वर्ण चतुर्भुज मार्ग है; मुम्बई – चेन्नई, चेन्नई – कोलकाता, कोलकाता – दिल्ली और दिल्ली – मुम्बई साथ ही इनको छेदने वाले अक्ष मुम्बई – कोलकाता और दिल्ली – चेन्नई इनके 130 kmph गति के लिए उन्निकरण का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। इन्ही मार्गों का तिहरीकरण, चौथे मार्ग के भी सर्वे औऱ कई खण्डो में काम जारी भी है।

अब रेल विभाग इन प्रमुख मार्गोंके अलावा शाखा मार्गोंको भी 130 kmph गति क्षमता के योग्य करना चाहती है और यह कार्य मार्च 2024 तक पूरा करने की टाइम लाइन तैयार की जा रही है। आइए, हम देखते है उन मार्गोंकी सूची,

आप यह समझ कर चलिए, आनेवाले दिनोंमें जो 400 वन्देभारत गाड़ियाँ पटरियों पर दौडनेवाली है, यह सारी तैयारियाँ उसी की है। 😊

ग्रुप A के चार मार्ग, नई दिल्ली – हावड़ा राजधानी मार्ग, नई दिल्ली – मुम्बई सेंट्रल फ्रंटियर मेल मार्ग, नई दिल्ली – चेन्नई ग्रैंड ट्रंक मार्ग एवं हावड़ा – नागपुर – मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज यह 160 kmph की गति में उन्नत किये जायेंगे।
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रेलवे का स्लिपर क्लास

चार महीने पहले, लम्बी कतारोमे, धक्के खाते, आरक्षण कन्फर्म करवा के आखिर वो यात्रा की शुभ घड़ी आ ही गई थी की हम इलाहाबाद के कुम्भ स्नान का पुण्य अपने गांठ बांध लें।

गाड़ी पुणे स्टेशन से दोपहर सवा चार बजे छुटने वाली थी। तीर्थयात्रा जाना था, बड़े बूढ़े कहते है बारवास में सकून देखना चाहिए पैसे नही, तो कैब बुलवा ली और पहुंच गए स्टेशन। हालाँकि कुम्भ में शाहीस्नान के पर्व की तिथि तो नही थी पर पुणे स्टेशन की भीड़ देख कर ऐसा लग रहा था, जैसे सभी को हमारे साथ ही पूण्य अर्जित करने की सूझी है।

पौने चार बजे गाड़ी स्टेशनपर लगी, तो क्या जनरल डिब्बे और क्या आरक्षित शयनयान डिब्बे। भीड़ तो ऐसे उमड़ी की जैसे लंगर लगा हो। हम भी हो लिए, हमारे डिब्बे एस 4 की ओर। बड़ी जद्दोजहद के बाद डिब्बे में घूंसे, अपने बर्थ तक पहुँचे, तो हमारी दोनोंही लोअर बर्थ पर 6 – 6 लोग पहलेसे ही जमे थे। अब वार्तालाप देखिए, हमने कहा, “भाई यह हमारे रिजर्वेशन है, हमे बैठने दीजिए।” अपने पाँव मोड़ कर के, आगे पीछे खिसक के, सलाह मिली, “लीजिए, आप बैठ जाइए। रिजर्वेशन टिकट तो हमारे भी है, बस कन्फर्म नही हुए वेटिंग में है।” अब पूरी डिब्बे की भीड़ के सामने हम विलेन बने, ” ये सिट मुझे दे दे ठाकुर” वाली स्टाईल में गब्बर की तरह दिखाई दे रहे थे और सैंकड़ों जय, वीरू और बसंतियाँ हमे घूर रही थी। जाना तो सभी को इलाहाबाद, वाराणसी। खैर! अब शुरू हुआ एडजस्टमेंट वाला खेल। गाड़ी चल पड़ी तो थोड़े सरको, जरा खिसको, थोड़ा बैठो और सेट हो जाओ।

गाड़ी चले, 4 घंटे हो चुके थे। टिटी साहब का कोई अतापता नही था। हमें भरोसा था, बाबूजी आएंगे और बिना रिजर्वेशन वालोंसे हमारी जगह ख़ाली करवा देंगे। अब तो हमारी बेगम भी हमे अपनी आंखें दिखाने लग गई थी। शाम ढलते ढलते, वैसी ही भीड़भाड़ मे हमने अपना टिफिन निकाला और खाना खा लिए। रात के 10 बज गए, ” भाई, अब हम सोएंगे, बर्थ खाली कर दो” थोड़े लोग इधर उधर हो गए, जगह बनाई गई और श्रीमतीजी मिडल बर्थ पर और हम निचले बर्थ पर लेट गए। बड़ी मुश्किल से नींद आई, अचानक हमारे पैर किसी भारी वजन से दब गए। हड़बड़ाकर उठने हुए तो हमारे बगल में हमारी बर्थ पर एडजस्ट हुवा एक बन्दा दन से नीचे गिरा, उसको सम्भालते तब तक जो पैर पर का बोझा भी लुढक़ चुका था। बड़ाही हडक़म्प मच गया। क्योंकि जहाँ ये लोग गिरे वहाँ भी लोग हाथ पैर पसारे चित हुए पड़े थे। ” ऐ काका, शांती से सोते रहा, काहे उठत रहे?” इधर हम अपने दबे पैरों का दर्द सहते बोले, ” भैया, हमारा बर्थ …..” अरे चाचा, आप ही तो सोये है, तनिक टिक लिए तो कौन तकलीफ़ हो गई? रात का समय है, आँख लग गई, तो थोड़ा सा…., और वैसे भी सुबह होने को है। आप पूरी रात सोए हो, अब हम भी थोड़ा सो ले?”

हम सोच रहे, हमारा कहाँ चूक हो गया, शायद स्लिपर क्लास में रिजर्वेशन कराने में? वातानुकूलित डिब्बे में एडजस्ट वाला खेला नही होता।